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प्रॉपर्टी के कागज खो गए, तो ऐसे बेचें घर

by Live India
प्रॉपर्टी के कागज खो गए, तो ऐसे बेचें घर

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बिना कागजात के संपत्ति बेचना: प्रॉपर्टी के पेपर्स हमारे लिए सबसे कीमती चीजों में एक होते हैं. कैश और गहनों के साथ इसे भी लोग तिजोरी में रखते हैं. ऐसे में अगर प्रॉपर्टी के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स खो जाएं, चोरी हो जाए या गलती से खराब हो जाएं, तो घर के मालिक के लिए यह बुरे सपने से कम नहीं होगा. ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोगों को लगता है कि वे अपनी प्रॉपर्टी नहीं बेच पाएंगे. लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है.

कानून में कई ऐसे नियम हैं जो खोए हुए डॉक्यूमेंट्स के साथ भी प्रॉपर्टी को कानूनी तौर पर बेचने की इजाजत देते हैं. ओरिजिनल प्रॉपर्टी पेपर खोने का मतलब अपनी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक खोना नहीं है. भारतीय प्रॉपर्टी कानूनों के तहत, ओरिजिनल प्रॉपर्टी पेपर गुम होने पर भी प्रॉपर्टी को कानूनी तौर पर बेचा जा सकता है, लेकिन शर्त है कि सही कानूनी प्रोसेस का पालन किया जाए. सबसे पहले, डॉक्यूमेंट्स के खोने की रिपोर्ट पुलिस को देनी चाहिए और अगर जरूरी हो, तो संबंधित ऑफिस से डुप्लीकेट कॉपी भी ली जा सकती हैं. हाल ही में हैदराबाद में एक NRI सेलर के साथ हुए प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन से पता चलता है कि जब प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स गायब हो जाते हैं, तो जानकारी और समय पर कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी है. इस खबर में आप जानेंगे कि ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स के बिना भी आप प्रॉपर्टी कैसे बेच सकते हैं.

प्रॉपर्टी के कागज इतने जरूरी क्यों हैं

प्रॉपर्टी के कागज किसी भी प्रॉपर्टी के लेन-देन में सबसे जरूरी कानूनी डॉक्यूमेंट होता है. यह सेलर से खरीदार को मिले मालिकाना हक को ऑफिशियली रिकॉर्ड करता है और इसमें प्रॉपर्टी का विवरण, मालिकाना हक का इतिहास, उसकी वैल्यू और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स जैसी जरूरी डिटेल्स होती हैं. ज्यादातर मामलों में, प्रॉपर्टी के कागज मालिकाना हक के मुख्य सबूत के तौर पर काम करते हैं. बैंक, खरीदार, हाउसिंग सोसायटी और सरकारी अधिकारी रीसेल, रजिस्ट्रेशन, लोन अप्रूवल और लीगल वेरिफिकेशन के दौरान इस पर भरोसा करते हैं. इसके बिना प्रॉपर्टी का लेन-देन काफी मुश्किल हो सकता है. अब जानें, अगर आप ओरिजिनल पेपर्स खो देते हैं तो क्या होता है?

पेपर्स खो जाने से कई प्रैक्टिकल और कानूनी मुश्किलें आ सकती हैं, जैसे खरीदार मालिकाना हक की चिंताओं के कारण हिचकिचा सकते हैं और बैंक लोन अप्रूवल में देरी कर सकते हैं या उसे रिजेक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा कानूनी वेरिफिकेशन जरूरी हो सकता है. अगर नुकसान की ऑफिशियली रिपोर्ट नहीं की जाती है तो धोखाधड़ी या मालिकाना हक के झगड़े हो सकते हैं.

डॉक्यूमेंट्स गायब होने पर खरीदार क्यों घबराते हैं

भारत के रियल एस्टेट मार्केट में, खरीदार पहले से ही टाइटल क्लैरिटी और लीगल ओनरशिप को लेकर सावधान रहते हैं. ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स के गायब होने से विवादित ओनरशिप, नकली ट्रांजैक्शन, डुप्लीकेट सेल्स या छिपी हुई लायबिलिटीज को लेकर चिंताएं पैदा हो सकती हैं. बैंक भी उतने ही सावधान रहते हैं क्योंकि होम लोन प्रोसेस करते समय आमतौर पर ओरिजिनल पेपर्स की जरूरत होती है. इसलिए तुरंत कानूनी कार्रवाई और ट्रांसपेरेंट डॉक्यूमेंटेशन बहुत जरूरी हो जाता है. सर्टिफाइड कॉपी और लीगल वेरिफिकेशन के साथ ठीक से हैंडल किया गया केस खरीदार का भरोसा काफी हद तक वापस ला सकता है.

हालिया मामला

हाल ही में हैदराबाद में एक NRI मालिक की प्रॉपर्टी की बिक्री से पता चलता है कि पेपर्स खो जाने से कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. प्रॉपर्टी मालिक ने अपनी हैदराबाद प्रॉपर्टी बेचने की तैयारी करते समय मुंबई एयरपोर्ट पर ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स खो दिए. हालांकि उसके पास डॉक्यूमेंट की सर्टिफाइड कॉपी थी, लेकिन उसे बिक्री पूरी करने के लिए जरूरी लीगल प्रोसेस के बारे में पक्का नहीं था, जिसके कारण प्रॉपर्टी बेचना उसके लिए मुश्किल हो गया. खरीदार हिचकिचा रहे थे, लोन अप्रूवल मुश्किल हो गए और दो शहरों में FIR फाइल करने से मुश्किलें पैदा हो गईं.

इस समस्या को हल करने के लिए, लीगल एक्सपर्ट्स ने एक साथ कई स्टेप्स को कोऑर्डिनेट करने में मदद की. उन्होंने डॉक्यूमेंट रिकवरी प्रोसेस शुरू किया और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस सर्टिफाइड कॉपी लेकर प्रॉपर्टी का ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक किया. यह केस एक जरूरी बात दिखाता है कि डॉक्यूमेंटेशन की कमियों को अक्सर कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है अगर उन्हें जल्दी और सिस्टमैटिक तरीके से किया जाए.

बिना पेपर्स के कैसे बेच सकते हैं प्रॉपर्टी

भारत में प्रॉपर्टी बेचने के लिए ओरिजिनल पेपर्स होना जरूरी है. इसलिए प्रॉपर्टी के मालिक अक्सर यह मान लेते हैं कि ओरिजिनल पेपर्स खो जाने का मतलब है कि प्रॉपर्टी अब बेची नहीं जा सकती. असल में, सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम (Transfer of Property Act), 1882 घर के मालिक को कुछ कानूनी फॉर्मैलिटी पूरी करने और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट के आधार पर लेन-देन को आगे बढ़ाने की इजाजत देता है. ओरिजिनल जमीन के कागज खो जाने पर भी प्रॉपर्टी कानूनी तौर पर बेची जा सकती है, लेकिन मालिक को यह पक्का करना होगा कि डॉक्यूमेंट सच में खो गया था, मालिकाना हक वैलिड है और प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई झगड़ा या बोझ नहीं है. ऐसा करने के लिए, अधिकारियों और खरीदारों को आमतौर पर लीगल रिकॉर्ड और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट के कॉम्बिनेशन की जरूरत होती है.

डॉक्यूमेंट खो जाए तो आपको क्या करना चाहिए

– कई प्रॉपर्टी मालिक जरूरी डॉक्यूमेंट्स खोने के बाद कार्रवाई में देरी करते हैं, यह सोचकर कि वे आखिरकार कहीं मिल जाएंगे. लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती है. लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस देरी से रिस्क बढ़ सकता है, खासकर अगर डॉक्यूमेंट का गलत इस्तेमाल होता है या अगर कोई ट्रांजैक्शन पहले से चल रहा हो. पेपर्स खो जाने के तुरंत बाद FIR दर्ज कराना जरूरी है. एफआईआर में प्रॉपर्टी की पूरी डिटेल और पेपर्स खोने की वजह साफ-साफ लिखें. इससे एक ऑफिशियल लीगल रिकॉर्ड बनता है और मालिक को संभावित गलत इस्तेमाल या धोखाधड़ी के दावों से बचाता है.

अखबारों में नोटिस छपवाएं– जमीन के कागज खोने पर आपको अखबार में एक पब्लिक नोटिस भी छपवाना होगा. आपको कम से कम एक अंग्रेजी अखबार और एक क्षेत्रीय भाषा के दैनिक समाचार पत्र में पब्लिक नोटिस छपवाना होगा. इसमें यह डिटेल जरूर बताएं कि प्रॉपर्टी का ओरिजिनल डॉक्यूमेंट खो चुका है. अखबार में नोटिस छपवाने का मकसद यह होता है कि कोई अन्य व्यक्ति 15 दिनों के अंदर उस प्रॉपर्टी पर अपना दावा या आपत्ति तो नहीं जता रहा है.

सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से सर्टिफाइड कॉपी लें- अखबार में नोटिस देने के 15 दिन बाद, आपको उसी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (SRO) जाना होगा जहां आपकी प्रॉपर्टी पहली बार रजिस्टर हुई थी. वहां आप तय फीस देकर और FIR और अखबार में नोटिस की कॉपी जमा करके अपने जमीन के कागज की सर्टिफाइड कॉपी के लिए अप्लाई करें. यह सर्टिफाइड कॉपी कानूनी तौर पर आपके मालिकाना हक का सही सबूत मानी जाती है.

एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) लें– अपनी प्रॉपर्टी के लिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिस या किसी ऑनलाइन पोर्टल से एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) लें. यह सर्टिफिकेट खरीदार को भरोसा दिलाता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, मॉर्गेज या कानूनी झगड़ा पेंडिंग नहीं है, जिससे आपकी डील आसान हो जाएगी. ये सभी डॉक्यूमेंट्स (सर्टिफाइड प्रॉपर्टी के पेपर, FIR, अखबार की कटिंग और EC) तैयार होने के बाद, आप नए खरीदार के साथ फ्रेश स्टाम्प पेपर पर सेल डीड तैयार कराकर रजिस्ट्री करवा सकते हैं.

कितना समय लग सकता है.

इस पूरी प्रक्रिया में आपको लगभग दो महीने का समय लग सकता है. एफआईआर कराने में एक दिन लग सकता है. इसके बाद अखबार में नोटिस छपवाने के बाद आपको 15 दिन का इंतजार करना होगा. रजिस्ट्रार से सर्टिफाइड कॉपी लेने में आपको 1-2 हफ्ते लग सकते हैं ( हर राज्य में अलग-अलग समय लग सकता है). इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 4 से 8 हफ्ते लग सकते हैं.

भविष्य में नुकसान से बचें

भविष्य में ऐसे नुकसान और भागदौड़ से बचने के लिए कुछ डिजिटल और बेहद जरूरी तरीके अपनाएं. पेपर्स को अच्छे स्कैनर ऐप से स्कैन करके इसका पीडीएफ तैयार कर लें. हर पन्ने की डिटेल साफ-साफ दिखनी चाहिए. उसमें सब- रजिस्ट्रार की मुहर और गवाहों के साइन साफ दिखने चाहिए. अब इस पीडीएफ को गूगल ड्राइव या माइक्रोसॉफ्ट ड्राइव में सुरक्षित फोल्डर बनाकर अपलोड कर दें. इस पीडीएफ पर पासवर्ड लगाएं, ताकि कोई और इसे खोल न सके.

भारत सरकार का DigiLocker डिजिटल डॉक्यूमेंट्स के लिए सबसे सुरक्षित और कानूनी तौर पर मान्य प्लेटफॉर्म है. अपने आधार कार्ड से लिंक्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके DigiLocker में साइन इन करें. ‘Issued Documents’ सेक्शन में जाएं. कई राज्यों में रेवेन्यू डिपार्टमेंट और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस अब सीधे DigiLocker से रजिस्टर्ड डीड जारी करते हैं. DigiLocker के डिजिटल डॉक्यूमेंट्स ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स जितने ही मान्य हैं.

संक्षेप में कहें तो, ओरिजिनल प्रॉपर्टी के पेपर खोना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती है. लेकिन ज़्यादातर मामलों में, यह ट्रांजैक्शन को कानूनी तौर पर मैनेज किया जा सकता है. सही डॉक्यूमेंटेशन, FIR फाइलिंग, सर्टिफाइड कॉपी, पब्लिक नोटिस और कानूनी वेरिफिकेशन के साथ, भारत में प्रॉपर्टी के मालिक अभी भी कानूनी और सुरक्षित तरीके से प्रॉपर्टी के लेन-देन पूरे कर सकते हैं. घर के मालिकों के लिए खासकर दूर से प्रॉपर्टी मैनेज करने वाले NRI के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे जल्दी एक्शन लें, ट्रांसपेरेंसी बनाए रखें और आगे बढ़ने से पहले सही कानूनी प्रोसेस को फॉलो करें.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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