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मानसून में अवश्य जाएँ स्थान: जब मानसून भारत की धरती पर उतरता है, तो कुछ जगहें सिर्फ भीगती नहीं हैं, बल्कि वो पूरी तरह बदल जाती हैं. हवा में मिट्टी की खुशबू, पहाड़ों पर उतरते बादल और नदियों का उफान मिलकर ऐसा सीन क्रिएट करते हैं, जैसे कोई फिल्म देख रहे हों. इस फिल्म का सबसे ग्रेंड सेट है, पश्चिमी घाट. ये माउंटेन रेंज यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, जो भारत के 6 राज्यों में फैली हुई है. मानसून में यहां का हर कोना जैसे जिंदा हो उठता है. यानी ये जगह कभी रोमांटिक, कभी सस्पेंस से भरी, तो कभी बिल्कुल एडवेंचर फिल्म जैसी लगती हैं. ऐसे में अगर आप भी इस मानसून सीज़न में कोई ऐसी जगह ढूंढ़ रहे हैं, जहां आप सिर्फ घूमना नहीं चाहते, बल्कि उसे फील भी करना चाहते हो, तो भारत की ये 10 डेस्टिनेशन्स आपकी ट्रिप को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी.
मुन्नार, केरल
मुन्नार मानसून के मौसम में किसी ड्रीम डेस्टिनेशन की तरह दिखता है. चाय के बागान जब बारिश में भीगते हैं, तो पूरी घाटी हरे रंग की खूबसूरत चादर बन जाती है. मानसून में वहां बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि लगता है जैसे आप आसमान के अंदर चल रहे हों. ये जगह केरल के इडुक्की इलाके में हैं. ये साउथ इंडिया के सबसे पॉपुलर और खूबसूरत हिल स्टेशन्स में से एक है. समुद्र तल से लगभग 1600 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस हिल स्टेशन के नाम का मलयालम मतलब तीन नदियों का संगम है.

क्या देखें?
मुन्नार आकर आप एराविकुलम नेशनल पार्क देखना ना भूलें. इसे राजमाला के नाम से भी जाना जाता है. ये पार्क ‘नीलगिरी तहर’ के लिए फेमस है. इसके अलावा मट्टुपेट्टी बांध अपनी हरी पहाड़ियों, चाय के बागानों और शानदार नज़ारों के लिए मशहूर है. मुन्नार आकर आप चाय म्यूज़ियम भी जरूर जाएं. इस म्यूज़ियम में आप चाय बनाने के पूरे प्रोसेस को नज़दीक से देख और समझ सकते हैं. अगर टाइम हो तो, मुन्नार से लगभग 32 किलोमीटर दूर टॉप स्टेशन भी जा सकते हैं. ये सबसे ऊंचा व्यू-पॉइंट है, जहां से घाटी और बादलों का नज़ारा काफी खूबसूरत दिखता है.
कैसे पहुंचें?
मुन्नार का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो वहां से लगभग 110 किलोमीटर दूर है. यहां से टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं. इसके अलावा अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो, करीबी रेलवे स्टेशन अलुवा और एर्नाकुलम हैं. यहां से मुन्नार की दूरी भी 110 किलोमीटर ही है. वहीं, ये जगह तमिलनाडु और केरल के बड़े शहरों से अच्छी तरह कनेक्टेड है, तो आज बाय रोड़ भी ट्रेवल कर सकते हैं.
कूर्ग, कर्नाटक
कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है. मानसून में ये नाम पूरी तरह सच्चा भी लगता है. कॉफी बागानों की खुशबू, बहते हुअ झरने और घने जंगल इस जगह को किसी पेंटिंग जैसा बना देते हैं. कर्नाटक के दक्षिण-पश्चिमी घाट में बसा ये एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है, जहां हर साल लाखों टूरिस्ट आते हैं.
क्या देखें?
आप कूर्ग पहुंचकर एबी फॉल्स देखें. कॉफी और मसालों के बागानों के बीच ये झरना लगभग 70 फीट की ऊंचाई से गिरता है. इसके अलावा मदिकेरी का राजा सीट जाएं. ये जगह अपने खूबसूरत सनसेट और मनोरम घाटियों के नज़ारों के लिए फेमस है. कूर्ग का गोल्डन टेंपल कहा जाने वाला नामड्रोलिंग बौद्ध मठ भी आपकी वॉच लिस्ट में जरूर होना चाहिए. ये भारत की सबसे बड़ी तिब्बती बस्तियों में से एक है. इसके अलावा आप कुर्ग में दुबारे एलिफेंट कैंप और तालाकावेरी भी जा सकते हैं. कावेरी नदी के किनारे बसी ये जगह आपकी ट्रिप को और यादगार बना देंगी.
कैसे पहुंचें?
वैसे तो, कूर्ग का अपना कोई एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन नहीं है. लेकिन फिर भी आप यहां आसानी से पहुंच सकत हैं. यहां पहुंचने का सबसे आसान तरीका बाय रोड है. कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसें बेंगलुरु और मैसूर से कूर्ग (मदिकेरी) के लिए रेगुलर चलती हैं. इसके अलावा आप प्राइवेट टैक्सी भी बुक कर सकते हैं. अगर ट्रेन से आना चाहते हैं तो, कूर्ग का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन मैसूर जंक्शन है, जो यहां से लगभग 115 किमी दूर है. मैसूर पहुंचने के बाद, आप वहां से बस या टैक्सी लेकर आसानी से कूर्ग पहुंच सकते हैं. इसके अलावा सबसे पास बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. ये कूर्ग से 260 किलोमीटर की दूरी पर है. इसके अलावा मैसूर एयरपोर्ट भी एक ऑप्शन है. दोनों ही एयरपोर्ट से आपको टैक्सी सर्विस मिल जाएगी.
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वायनाड, केरल
वायनाड की खूबसूरती मानसून में कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है. घने जंगल, प्राचीन गुफाएं और झरने इस जगह को एडवेंचर लवर्स के लिए बिल्कुल परफेक्ट बनाते हैं. केरल का वायनाड अपनी हरी-भरी पहाड़ियों, झरनों और मसालों के बागानों के लिए काफी फेमस है. यहां घूमने के लिए बहुत कुछ है.
क्या देखें?
वायनाड का बानासुरा सागर बांध भारत का सबसे बड़ा और दूसरा सबसे बड़ा मिट्टी का बांध है. यहां आप खूबसूरत नज़ारों के साथ-साथ बोटिंग का भी मज़ा ले सकते हैं. इसके अलावा सुलतान बाथेरी के पास बनी एडेक्कल गुफाएं देखना भी अलग ही तरह का एक्सपीरियंस होगा. इन गुफाओं में स्टोन एज के लगभग 3 से 6 हज़ार चित्र हैं. वहीं, जंगल के बीच सूचिपाड़ा वाटरफॉल नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट स्पॉट है. वहीं, चेंब्रा पीक और हार्ट लेक ट्रेकर्स के लिए परफेक्ट जगह है. इन सबके अलावा आप वायनाड वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का मज़ा भी ले सकते हैं. ये जगह, बाघ, हाथी और अलग-अलग रेयर पक्षियों का घर है.
कैसे पहुंचें?
वायनाड का सबसे नजदीकी एयरपोक्ट कोझिकोड का करिपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. वायनाड यहां से 110 किलोमीटर दूर है. आप यहां पहुंचने के लिए एयरपोर्ट से टैक्सी या बस ले सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं, तो नजदीकी रेलवे स्टेशन कोझोकोड़ है. यहां से वायनाड पहुंचने में आपको 2-3 घंटे का टाइम लगेगा. ट्रेन से उतरकर आपको आसनी से टैक्सी और बस की सर्विस मिल जाएगी. इसके अलावा अगर आप बाय रोड आना चाहते हैं तो, बैंगलोर, मैसूर और कोच्चि से यहां के लिए रेगुलर बसें चलती हैं.

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र
महाबलेश्वर मानसून में बादलों के बीच तैरता हुआ खूबसूरत शहर बन जाता है. हर व्यू पॉइंट पर ऐसा लगता है जैसे आप आसमान को छू सकते हैं. महाराष्ट्र का ये हिल स्टेशन अपने झरनों, वादियों और स्ट्रॉबेरी के बागानों के लिए फेमस है. अगर आप महाराष्ट्र में ही रहते हैं, तो महाबलेश्वर घूमने के लिए लंबी छुट्टियों की भी जरूरत नहीं है. आप वीकेंड पर भी यहां की ट्रिप प्लॉन कर सकते हैं.
क्या देखें?
यहां के व्यू पॉइन्ट्स से सनराइज और सनसेट देखना अलग ही एक्सपीरियंस देता है. इसके अलावा आर्थर सीट, केट्स पॉइंट और एलीफेंट हेट पॉइंट यहां के सबसे फेमस स्पॉट हैं. इन व्यू पॉइन्ट्स के अलावा यहां की वेन्ना झील में आप बोटिंग का मज़ा ले सकते हैं. पास ही में हॉर्स राइडिंग भी होती है. नेचर लवर्स के लिए यहां का लिंगमाला झरना बढ़िया जगह है. अगर आपको हिस्ट्री से प्यार हैं तो, आप प्रतापगढ़ किला भी जा सकते हैं. ये महाबलेश्वर से लगभग 24 किलोमीटर दूर है. साथ ही स्ट्रॉबेरी के लिए फेमस मैप्रो गार्डन जाकर आप अलग-अलग तरह की डिसेस का लुत्फ उठा सकते हैं.
कैसे पहुंचें?
पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट महाबलेश्वर से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर है. इसके अलावा मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट यहां से 250 किलोमीटर दूर है. आप यहां से टैक्सी और बस लेकर आराम से महाबलेश्वर पहुंच सकते हैं. अगर ट्रेन से जा रहे हैं तो, नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे जंक्शन है. वैसे, महाबलेश्वर के लिए रोड की कनेक्टिविटी भी काफी अच्छी है. यानी आप बाय रोड भी यहां आसानी से आ सकते हैं.

अगुम्बे, कर्नाटक
अगुम्बे भारत के सबसे ज्यादा बारिश वाली जगहों में से एक है. यानी जिन लोगों को बारिश का मौसम बहुत पसंद है, उनके लिए ये जगह बेस्ट है. वैसे, अगुम्बे को साउथ इंडिया का चेरापूंजी भी कहा जाता है. इसके अलावा ये जगह ‘मालगुडी डेज’ के शूटिंग स्पॉट्स के लिए भी फेमस है.
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क्या देखें?
ये जगह पश्चिमी घाट की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है. यही वजह है कि यहां से अगर साबर में डूबता और उगता हुआ सूरज देखना लोगों को काफी ज्यादा पसंद आता है. ऐसे में आप भी यहां का सनसेट व्यू पॉइंट मिस मत करना. अगुम्बे का बारकाना और ओनके अब्बे झरना मानसून में देखने लायक होता है. यहां के रेनफोरेस्ट के बीच ट्रेकिंग करना एडवेंचर लवर्स को खूब पसंद आता है. घूमने के साथ-साथ अगर आप स्प्रिचुएलिटी का भी एक्सपीरियंस करना चाहते हैं तो, यहां पर 14वीं सदी का प्राचीन गोपालकृष्ण मंदिर भी है. साथ ही यहां अगुम्बे रेनफोरेस्ट रिसर्च स्टेशन भी है. इस कोबरा कैपिटल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है.
कैसे पहुंचें?
अगर आप भी इस खूबसूरत जगह पर घूमना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मंगलुरु है. ये अगुम्बे से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर है. आप यहां से टैक्सी, कैब या फिर बस लेकर आसानी से अगुम्बे पहुंच सकते हैं. ट्रेन जर्नी चाहते हैं तो, उडुपी रेलवे स्टेशन सबसे पास है. ये स्टेशन अगुम्बे से 5 किलोमीटर दूर है. प्लेन और ट्रेन की बजाय अगर आप रोड ट्रिप से यहां पहुंचना चाहते हैं तो, उडुपी और मंगलुरु से यहां रेगुलर बसे चलती हैं. बैंगलोर से अगुम्बे सिर्फ 350 किलोमीटर दूरी पर है. यानी आप ट्रेन, प्लेन और रोड, तीनों ही तरह से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं.
मानसून का असली मज़ा
भारत का पश्चिमी घाट सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि नेचर की वो फिल्म है जो हर बारिश में नया चैप्टर लिखती है. कहीं झरनों की प्यारी आवाज सुनाई देती है, कहीं बादलों की धीमी चाल, तो कहीं जंगलों की खामोशी है. यही वजह है कि ये जगहें आपको कभी ना भूलने वाला एक्सपीरियंस देती हैं.
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