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मचैल माता यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू

by Live India
मचैल माता यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साहः प्रशासन की तैयारियां शुरू, ऑनलाइन पंजीकरण और RFID कार्ड हुआ अनिवार्य

Machail Mata Yatra: जम्मू-कश्मीर में अगस्त महीने में शुरू हो रहे मचैल माता यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है. भक्तों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस वर्ष की यात्रा के लिए प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों के लिए आरएफआईडी (RFID) कार्ड और ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है.

Machail Mata Yatra: जम्मू-कश्मीर में अगस्त महीने में शुरू हो रहे मचैल माता यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है. भक्तों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस वर्ष की यात्रा के लिए प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों के लिए आरएफआईडी (RFID) कार्ड और ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है. बिना इसके यात्रियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को किश्तवाड़ जिले में वार्षिक मचैल माता यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की. यात्रा इस साल अगस्त में शुरू होने वाली है. मुख्य सचिव ने यात्रा के सुरक्षित और परेशानी मुक्त संचालन की व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने यात्रा मार्ग पर पिछले साल बादल फटने के बाद जारी निर्देशों के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की.

मुख्य सचिव ने तैयारियों का जाना हाल

मालूम हो कि पिछले साल 14 अगस्त को मचैल माता मंदिर के प्रवेश द्वार चिसोती गांव में बादल फट गया था, जिसमें 63 लोग मारे गए थे.मृतकों में ज्यादातर श्रद्धालु थे, कई अन्य घायल हो गए थे और लगभग 30 लोग लापता हो गए थे. मुख्य सचिव को ऑनलाइन और आरएफआईडी आधारित पंजीकरण प्रणालियों की शुरूआत, आपदा शमन पहल, मौसम अलर्ट के लिए स्वचालित वर्षा गेज (एआरजी) और स्वचालित मौसम स्टेशनों (एडब्ल्यूएस) की स्थापना और विस्तृत मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के विकास जैसे उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया, जिसका उद्देश्य यात्रा अवधि के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करना है. जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार ने बताया कि भक्तों की अपेक्षित भीड़ को पूरा करने के लिए किश्तवाड़ मुख्यालय, गुलाबगढ़, चिशोती और मचैल सहित विभिन्न स्थानों पर आवास की व्यवस्था की जा रही है.

तीर्थयात्रियों के लिए बनाए जा रहे आवास

कहा कि सरकारी आवास, निजी आवास सुविधाएं, होम स्टे और टेंट आवास को बढ़ाया जा रहा है, जबकि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए मचैल में एक टेंट सिटी भी स्थापित की जा रही है. 100 प्रतिशत ऑनलाइन पंजीकरण और आरएफआईडी सक्षम ट्रैकिंग के माध्यम से भीड़ प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की वास्तविक समय की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया. बैठक के दौरान संभागीय आयुक्त द्वारा तीर्थयात्रियों की आवाजाही की दैनिक निगरानी, ​​संवेदनशील बिंदुओं पर पर्याप्त जनशक्ति की तैनाती और यात्रा के प्रभावी प्रबंधन के लिए विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने की व्यवस्था के बारे में भी विस्तार से बताया गया. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रशासन भूस्खलन शमन उपाय भी कर रहा है और मार्ग के संवेदनशील हिस्सों पर निगरानी प्रणाली को मजबूत कर रहा है.

चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस सेवाएं भी रहेंगी उपलब्ध

किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने वाहनों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने और सड़क संपर्क की बहाली सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई व्यापक यातायात और परिवहन प्रबंधन योजनाओं के बारे में जानकारी दी. मुख्य सचिव ने यात्रा के लिए चिकित्सा तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा की. बैठक में बताया गया कि मार्ग के प्रमुख स्थानों पर चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस सेवाएं, आपातकालीन प्रतिक्रिया दल और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं स्थापित की जाएंगी. तीर्थयात्रा के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मियों और आवश्यक दवाओं की भी व्यवस्था की जा रही है. आवश्यक सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने और तीर्थयात्रा मार्ग पर स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण बनाए रखने के लिए सभी विभागों को निकट समन्वय में काम करने के निर्देश जारी किए गए.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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