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मैच फिक्सिंग विवाद: क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ माना जाता है. इस खेल की पॉपुलेरिटी ने दुनिया को आकर्षित किया है और अब ज्यादा तर देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय टीमों को भी बनाना शुरू कर दिया है. क्रिकेट का जलवा वर्तमान में इतना हो गया है कि जब कोई क्रिकेटर शानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को मैच जीता देता है तो वह रातों-रात स्टार बन जाता है. खास बात यह है कि खेल ने न सिर्फ क्रिकेटर्स को पहचान दी है बल्कि करोड़ों-अरबों की कमाई का एक बिजनेस भी तैयार करके दिया है. अब प्राइवेट कंपनियों भी उन्हीं स्टार क्रिकेटर्स को विज्ञापन देना पसंद करती हैं, जिन्होंने अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करके दिखाया है और वह सोशल मीडिया पर भी काफी पॉपुलैरिटी बटोर रहे हैं. हालांकि, कई दफा कुछ खिलाड़ी पैसा कमाने के लिए गलत रास्तों की तरफ भी मुड़ जाते हैं. इसी बीच हम उन मैच फिक्सिंग विवादों को सामने लेकर हैं आए जिनको पढ़कर आज भी हर कोई हैरान हो जाता है.
हैंसी क्रोन्ये कांड (2000)
वर्ष 2000 को विश्व क्रिकेट का काला अध्याय माना जाता है. इसी साल क्रिकेट में फिक्सिंग के सबसे बड़े खुलासे ने क्रिकेट जगत में हड़कंप मच दिया था. इस कांड के मुख्य विलेन दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन कप्तान हैंसी क्रोनिए थे. 11 अप्रैल, 2000 को क्रोनिए ने स्वीकार किया था कि भारतीय सट्टेबाजों से उन्होंने पैसे लिए थे और बेहद सम्मानित खिलाड़ी के रूप अपनी पहचान बनाने वाले क्रोनिए की छवि रातों-रात धूमिल हो गई थी. अप्रैल में क्रोनिए के फिक्सिंग से जुड़े होने की बात एक रिपोर्ट से सामने आई थी. इसके बाद ही पूर्व कप्तान लगातार मैच फिक्सिंग के आरोपों को खारिज करते रहे. बता दें कि मार्च 2000 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज खेली जा रही थी और इस दौरान दिल्ली पुलिस ने जबरन वसूली के एक मामले में कुछ फोन को टैप किया था. इन फोन टैपिंग्स के माध्यम से हैंसी क्रोनिए और सट्टेबाज संजीव चावला के बीच मैच फिक्सिंग की बातचीत का खुलासा हुआ. हालांकि, शुरुआत में कप्तान क्रोनिए और दक्षिण अफ्रीका बोर्ड ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. इसके बाद जांच में पता चला कि हैंसी क्रोनिए ने सट्टेबाजों से लाभ और पैसे लिए हैं. साथ ही हर्शल गिब्स और निकी बोए जैसे खिलाड़ियों को भी खराब प्रदर्शन करने के लिए पैसे की पेशकश की थी. इसके बाद क्रोनिए से कप्तानी छीन ली गई और सरकार द्वारा नियुक्त किंग कमीशन ने क्रोनिए को असली दागदार साबित किया. इसके अलावा क्रोनिए पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और दक्षिण अफ्रीकी बोर्ड ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था.
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मोहम्मद अजहरुद्दीन विवाद
भारतीय टीम में दिग्गज खिलाड़ियों में से एक मोहम्मद अजहरूद्दीन का करियर भी मैच फिक्सिंग के एक विवाद ने लील लिया. क्रिकेटर के रूप में उनका करियर काफी शानदार रहा और वह अपनी विकेटकीपिंग के लिए भी दुनिया में काफी मशहूर थे. पूर्व कप्तान अजहरूद्दीन अपने जीवन में कई विवादों से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनके जीवन में सबसे प्रमुख विवाद वर्ष 2000 का मैच फिक्सिंग कांड रहा और हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) में अध्यक्ष रहते हुए लगभग 20 करोड़ रुपये के फंड में हेराफेरी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा है. इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था और इसकी वजह से वह अपना 100वां टेस्ट खेलने से चूक गए. वहीं, प्रतिबंध लगने के बाद अजहरुद्दीन ने एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और साल 2012 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उनके ऊपर से आजीवन प्रतिबंध को रद्द कर दिया. बता दें कि अजहरूद्दीन ने 1984 में अपना इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. एक खिलाड़ी के रूप में उन्होंने भारतीय टीम के लिए 47 टेस्ट और 175 वनडे मैचों में कप्तानी की. इस दौरान वह इंटरनेशनल करियर में 9000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी भी बने. अजहरुद्दीन अपने वक्त के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक थे और उनका करियर सूर्य की तरह चमक रहा था. उन्होंने अपने करियर में 9 टेस्ट और 334 वनडे खेले हैं. साथ ही 147 टेस्ट पारियों में 45.03 की औसत से 6215 रन बनाए, जिसमें 22 शतक और 21 अर्धशतक शामिल थे. इस दौरान उनका हाई स्कोर 199 रन था.
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शेन वॉर्न और मार्क वॉ का मामला
एक ऐसा खिलाड़ी जिसका क्रिकेट के मैदान पर करियर लाजवाब था. उतना ही विवादों में रहा था. हम बात कर रहे हैं पूर्व क्रिकेटर शेन वार्न के बारे में. साथ ही उनके सहयोगी प्लेयर Mark Waugh के बारे में भी. वार्न और वॉ से जुड़ा सबसे चर्चित विवाद 1994-95 में हुआ था. इस दौरान इन दोनों ऑस्ट्रेलिया क्रिकेटर्स पर ‘जॉन’ (John) नाम के एक भारतीय सट्टेबाज से पैसे लेने का आरोप लगा था. मामला यह है कि 1994 में श्रीलंका दौरे के दौरान इन दोनों प्लेयर ने पिच की स्थिति और मौसम के बारे में जानकारी साझा करने के बदले में सट्टेबाज से भारी रकम ली थी. वहीं, शेन वार्न ने इस बात को स्वीकार कर लिया था कि उन्होंने सट्टेबाज से 6,000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर लिए थे. हालांकि, वार्न और वॉ ने इस बात को भी स्वीकार किया था कि उन्होंने मैच फिक्सिंग नहीं की थी और न ही प्लेइंग इलेवन के बारे में जानकारी साझा की थी. उस दौरान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड (ACB) इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया था. साथ ही बोर्ड ने खिलाड़ियों पर निजी तौर पर भारी जुर्माना लगाया था. बोर्ड का उस वक्त मानना था कि अगर इन दोनों प्लेयर्स की गवाही बाहर आती है तो सट्टेबाजों के खिलाफ उनकी गवाही कमजोर पड़ जाएगी. साथ ही यह विवाद काफी समय बाद मीडिया में आया और इस दुनिया भर में काफी सुर्खियां बटोरी थी. इसके अलावा निजी तौर पर कार्रवाई को लेकर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट काफी बदनामी हुई थी और बोर्ड की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए थे. बता दें कि शेन वार्न ने अपने करियर में 145 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें 708 विकेट झटके हैं. इसके अलावा उन्होंने 194 वनडे मुकाबलों में 293 विकेट भी चटकाए हैं. वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर विराजमान हैं और उनसे ऊपर श्रीलंकाई स्पिनर मुथैया मुरलीधरन हैं.
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स्पॉट-फिक्सिंग मामला (2010)
आज से करीब 16 साल पहले क्रिकेट जगत की एक घटना ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया. 28 अगस्त, 2010 को लॉर्ड्स में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच के दौरान मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ पर आरोप लगा था कि उन्होंने पैसे लेकर नो-बॉल फेंकी थी. साथ ही इस कार्य में कप्तान सलमान बट को भी संलिप्त पाया गया. इन तीनों पाकिस्तानों पर सिर्फ बोर्ड ने बैन नहीं लगाया बल्कि इनको जेल तक जाना पड़ा था. पाकिस्तान के सट्टेबाज मजहर मजीद के साथ डील करने के बाद नो-बॉल फेंकी थी. उस वक्त यूके के एक अखबार ‘न्यूज ऑफ द वर्ल्ड’ ने स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से मजहर मजीद का पर्दाफाश किया था. उस वक्त बताया गया था कि 1,40,000 पाउंड के बदले उन्होंने नो-बॉल फेंकी थी. आपको बताते चलें कि 27 अगस्त 2010 को मैच के दौरान मोहम्मद आमिर ने एक बहुत बड़ी नो-बॉल फेंकी. इसके बाद दूसरी पारी में मोहम्मद आसिफ ने भी बहुत बड़ी नो-बॉल फेंकी थी. वहीं, आईसीसी प्रतिबंध के अलावा लंदन की साउथवार्क क्राउन कोर्ट ने खिलाड़ियों पर आपराधिक मुकदमा चलाया था. इसी कड़ी में नवंबर 2011 में तीनों खिलाड़ियों के ऊपर सट्टेबाजी के आरोप में दोषी पाया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया. इस दौरान सलमान बट को 30 महीने, मोहम्मद आसिफ को एक साल, मोहम्मद आमिर को 6 महीने और मजहर मजीद को 32 महीने की जेल की सजा मिली.
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IPL स्पॉट-फिक्सिंग स्कैंडल (2013)
क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़े विवादों में से एक IPL स्पॉट-फिक्सिंग स्कैंडल (2013) भी है. दिल्ली पुलिस की तरफ से राजस्थान रॉयल्स के तीन क्रिकेटरों एस. श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजीत चंडीला की गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा हुआ था. इस स्कैंडल के बाद ही चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था. मामला यह था कि दिल्ली पुलिस ने 16 मई, 2013 को तीनों खिलाड़ियों (श्रीसंत, चव्हाण, चंडीला) को सट्टेबाजों के साथ मिलकर ‘स्पॉट-फिक्सिंग’ के आरोपों में पकड़ा था. इन तीनों पर आरोप था कि इन्होंने कुछ ओवर डालने के बदले में पैसे लिए थे. दूसरी तरफ मुंबई पुलिस ने सट्टेबाजी रैकेट की जांच के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स के प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा को गिरफ्तार कर लिया था. वहीं, लोढ़ा समिति ने साल 2015 में सख्त फैसला सुनाते हुए चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और राजस्थान रॉयल्स (RR) को दो साल (2016 और 2017 सीजन) के लिए निलंबित कर दिया था. हालांकि, सबूतों के अभाव में पटियाला हाउस कोर्ट ने श्रीसंत, चव्हाण और चंदीला सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में श्रीसंत पर लगे आजीवन प्रतिबंध को रद्द करने का फैसला दिया.
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