Home Latest News & Updates रेप के मामलों में टॉप पर राजस्थान

रेप के मामलों में टॉप पर राजस्थान

by Live India
Rape Statistics in India

भारत में बलात्कार के आँकड़े: भारत के समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में हर दिन महिलाओं से जुड़े अपराध की नई खबरें सुनाई देती हैं, हालांकि उनमें केवल नाम और जगह बदलते हैं, लेकिन अपराध वहीं रहता है. महिलाओं के खिलाफ अपराध अब समाज और राजनीति के लिए इतना आम हो गया कि हम न इसके खिलाफ कुछ करने की मांग करते हैं और न ही नेताओं को महिला सुरक्षा एक जरूरी मुद्दा लगता है. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बैनरों और विज्ञापनों के पीछे छुप जाती हैं उन बेटियों की चीखें जिन्हें किसी हैवान ने अपनी हवस का शिकार बना लिया.

घर से लेकर स्कूल और ऑफिस तक शायद ही कोई ऐसी जगह होगी, जहां किसी बेटी के साथ दरिंदगी न हुई हो. स्त्रीद्वेषी और रूढ़िवादी लोगों अक्सर महिलाओं के पहनावे और रहन-सहन को अपराध का कारण बताते हैं. लेकिन सच तो यह है कि 6 महीने की बच्ची से लेकर 60 साल की बूढ़ी महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है. ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जहां एक पिता और खून रिश्तों ने अपनी ही बच्ची को नहीं बख्शा. ऐसे में सवाल यह है कि एक लड़की कहां सुरक्षित है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में हर साल लगभग 30,000 रेप की घटनाएं होती हैं. इस खबर आप आंकडों की मदद से समझेंगे कि कि देश में हर साल रेप के कितने मामले सामने आते हैं और कौन से राज्य इस लिस्ट में टॉप पर रहते हैं.

हर दिन 80 रेप के मामले

भारत में हर दिन लगभग 80 केस दर्ज किए जाते हैं और हर 18 मिनट में एक महिला या बच्ची के साथ दरिंदगी होती है. साल 2024 में देश मे 29,536 रेप की घटनाएं हुई. वहीं रेप दर 4.3 रहा. यह डेटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है और NCRB द्वारा इकट्ठा किया गया है.

इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 से 71 और IPC की धारा 376 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 से 71 और IPC की धारा 376 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. डेटा के मुताबिक, राजस्थान रेप के मामले में टॉप पर रहा. यहां साल में कुल 4871 मामले सामने आए हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में रेप के 3209 केस रजिस्टर हुए. इसके बाद महाराष्ट्र में 3091, मध्य प्रदेश में 3061, हरियाणा में 1391 मामले दर्ज किए गए. नीचे आपको राज्य-वार आंकड़े दिए गए हैं.

रैंक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश रेप के मामले
1 राजस्थान 4,871
2 उत्तर प्रदेश 3,209
3 महाराष्ट्र 3,091
4 मध्य प्रदेश 3,061
5 हरियाणा 1,391
6 ओडिशा 1,268
7 छत्तीसगढ़ 1,171
8 बिहार 1,165
9 तेलंगाना 1,148
10 पश्चिम बंगाल 1,118
11 झारखंड 1,073
12 दिल्ली 1,058
13 केरल 940
14 असम 927
15 कर्नाटक 671
16 गुजरात 661
17 पंजाब 475
18 आंध्र प्रदेश 441
19 तमिलनाडु 419
20 हिमाचल प्रदेश 324
21 उत्तराखंड 305
22 जम्मू एवं कश्मीर 261
23 गोवा 105
24 अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह 7
25 अरुणाचल प्रदेश 76
26 त्रिपुरा 64
27 मेघालय 57
28 मिजोरम 20
29 मणिपुर 19
30 नागालैंड 14
31 चंडीगढ़ 96
32 दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव 11
33 पुडुचेरी 9
34 लक्षद्वीप 9
35 सिक्किम 7
36 लद्दाख 2

रेप की कोशिश के 2561 मामले

साल 2024 में ही, पूरे देश में रेप की कोशिश के कुल 2561 मामले दर्ज किए गए हैं. पूरे भारत में दर्ज हुए कुल 29,536 रेप केस में से, 28950 में पीड़िता 18 साल या उससे ज्यादा उम्र की थी, जबकि 784 केस में पीड़िता 18 साल से कम उम्र की थी. इसके अलावा भारत में BNS के सेक्शन 74 के तहत ‘महिलाओं की इज्जत खराब करने के इरादे से’ हमला करने के 48,303 केस दर्ज किए गए. इसके अलावा देशभर में सेक्सुअल हैरेसमेंट के 15620 केस दर्ज किए गए, जिसमें सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश 2,659 और महाराष्ट्र 2,637 से रिपोर्ट किए गए. वहीं दिल्ली में सेक्सुअल हैरेसमेंट के 324 केस सामने आए.

भारत में 2024 में दहेज के लिए 5,737 बेटियों की हत्या कर दी गई. पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,027 मामले दर्ज किए गए. महिलाओं को किडनैप करने या शादी के लिए मजबूर करने के कुल 28,949 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 13,192 मामलों में 18 साल से कम उम्र की लड़कियां शामिल थीं. NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में प्रति लाख महिलाओं की आबादी पर दर्ज क्राइम रेट 64.6 था, जबकि 2023 में यह 66.2 था. यानी एक साल में ही 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

85 प्रतिशत मामलों में परिचित होते हैं आरोपी

NCRB के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल रजिस्टर्ड मामलों में से लगभग 85% से 90% में आरोपी कोई जान-पहचान वाला, रिश्तेदार, पड़ोसी या ऐसा कोई व्यक्ति होता है, जो पीड़िता को पहले से जानता हो. पिछले कुछ सालों के रेप के मामलों पर नजर डालें तो, 2023 में 29670 मामले, 2022 में कुल 31516 मामले और 2021 में 31677 मामले दर्ज मामले किए गए. यानी पिछले सालों में हमें कुछ खास सुधार देखने को नहीं मिला है.

कितनों को मिला न्याय

वहीं अगर यह 2024 में 29,536 रेप केस में से लगभग 7,200 में सजा हुई यानी कुल 24 प्रतिशत. इनमें से ज्यादातर केस (75% से ज़्यादा) या तो कोर्ट में साबित नहीं हुए, गवाह के मुकरने की वजह से खारिज हो गए, या बरी हो गए. 2024 में पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 6,23,377 मामलों की जांच की जिसमें पिछले साल के 1,81,717 पेंडिंग मामले शामिल थे. इनमें से 3,36,609 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई और चार्जशीट दाखिल करने की दर 77.2 प्रतिशत रही.

राजस्थान में मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म

राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक बेहद दर्दनाक मामला आया है, जहां एक 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने 5 दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया. आरोपियों ने पीड़िता को तीन होटलों- खुंगर, जैप इन और सफायर में बंधक बनाकर तीन दिनों तक इस अपराध को अंजाम दिया. मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 23 जून को होटल खुंगर में छापा मारा और नाबालिग का रेस्क्यू किया. उसे छुड़ाकर पूछताछ करने पर पता चला कि होटल मालिक और मैनेजर उससे रेप के लिए पैसे वसूल रहे थे.

Rajasthan Rape

पीड़िता ने 18 जून अपने घर से बाहर निकली घर से बाहर खेलने निकली थी. रास्ते में एक रिक्शा चालक ने बच्ची के सीधेपन का फायदा उठाया. उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा लिया और उसे शहर के एक होटल मालिक को बेच दिया. होटल के मैनेजर ने बच्ची की तस्वीर व्हॉट्सऐप पर दूसरे होटलों को शेयर की. इसके बाद तीन होटलों में उसके साथ दुष्कर्म हुआ. पुलिस जांच में पता चला कि तीनों होटलों में अलग-अलग दिनों में कुल 32 लोगों ने नाबालिग का साथ दुष्कर्म किया. कभी तीन से चार लोग, तो कभी उससे भी ज्यादा.

कोलकातार रेप-मर्डर केस

साल 2024 में अगस्त में कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में एक 31 साल की पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ बेरहमी से गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. वह 36 घंटे की ड्यूटी के बाद वहां आराम कर रही थी. इस भयानक घटना से पूरे देश में, खासकर मेडिकल कम्युनिटी में बहुत गुस्सा फैल गया. डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और खराब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश भर में हड़तालें और बड़े पैमाने पर नागरिक विरोध प्रदर्शन हुए. मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का खुद संज्ञान लिया और दोषी संजय को फांसी की सजा सुनाई. हालांकि पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का आरोप है कि इस अपराध में और भी लोग शामिल थे.

कोलकाता बलात्कार हत्या

निर्भया रेप और हत्या

निर्भया रेप और हत्याकांड के बारे में शायद की कोई भारतीय नहीं जानता होगा. यह मामला रूह कंपा देने वाला था. 16 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली में पैरामेडिकल स्टूडेंट निर्भया के साथ चलती बस में छह लोगों ने बेरहमी से गैंगरेप किया था. इस भयानक हमले के दौरान, उसे और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा गया. उन्होंने पीड़िता के शरीर के अंदर बाहरी सामान डाला, जिससे उसे आंतरिक चोटें आईं. 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए. नतीजतन भारत सरकार ने बलात्कार विरोधी कानूनों को कड़ा करने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया, जिसके कारण आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 पारित हुआ और फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना हुई. मामले के छह आरोपियों में से एक ने जेल में आत्महत्या कर ली, एक नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया गया और चार मुख्य दोषियों को मार्च 2020 में फांसी दे दी गई.

यह मामला आज भी महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में सुधार का प्रतीक माना जाता है. हालांकि आंकड़े कुछ और ही तस्वीर बयां करते हैं. हर दिन महिलाएं इस हैवानियत का शिकार होती है. ये तो कुछ वो मामले थे जो हम तक पहुंच पाए, लेकिन हर दिन करीब 80 महिलाओं के बारे में हम जान नहीं पाते. आज भी पीड़िताएं न्याय मिलने का इंतजार रही हैं और पुरुष उन्हें वस्तु समझकर शोषण.

हर 92 मिनट में एक बेटी की मौत, दहेज हत्या की लिस्ट में ये राज्य हैं सबसे आगे, आधे से ज्यादा मामलों में नहीं होती सजा

समाचार स्रोत: एनसीआरबी

Related Articles