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2025 की इन आतंकी घटनाओं ने देश को झकझोरा

by Live India
Terror Attacks of 2025

परिचय

28 दिसंबर, 2025

2025 के आतंकी हमले: आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से साल 2025 में भारत को कई घाव मिले. इस साल हुए पहलगाम हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. कश्मीर घाटी पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 मासूम लोगों की जान ले ली. पहलगाम हमले के दर्द से देश उभरा ही था कि उसे एक बार झटका लगा, जब राष्ट्रीय राजधानी में आतंकियों ने धमाके को अंजाम दिया. इस धमाके में भी 15 लोगों की जान चली गई. इसी के साथ सामने आया व्हाइट-कॉलर आतंकवाद का एक बड़ा जाल. कुल मिलाकर साल 2025 भारतवासियों को गहरा घाव दे गया. आइए जानते हैं कि साल 2025 आंतरिक सुरक्षा और आतंकवादी घटनाओं के लिहाज से कैसा रहा.

सामग्री की तालिका

  • पहलगाम आतंवादी हमला
  • लाल किला धमाका
  • भारत में नक्सलवाद

पहलगाम आतंवादी हमला और भारत का जवाब

22 अप्रैल, 2025 का दिन भारत के इतिहास में एक काला दिन बन गया. कश्मीर की पहलगाम घाटी में घूमने गए पर्यटकों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया. आतंकवादियों ने उनका धर्म पूछ-पूछकर उन्हें गोलियों से भून दिया. वहां किसी नई दुल्हन ने अपने पति को खोया तो किसी बच्चे ने अपने पिता को. जब पहलगाम के भयानक दृश्य सामने आए तो पूरा देश हिल गया. देश की जनता का गुस्सा अपने चरम पर था. इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली. यह 2025 की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक था. यह इलाका न केवल पर्यटकों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में भी रहता है. इसके बावजूद, आतंकवादी हमला करने में कामयाब रहे, जो खुफिया नेटवर्क या ज़मीनी सुरक्षा में कहीं न कहीं चूक का संकेत देता है. इस घटना में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिसने एक बार फिर आतंकवाद का क्रूर चेहरा सामने ला दिया.

पहलगाम हमला

भारत ने आतंकवाद का मुहंतोड़ जवाब देते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया. पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें पहलगाम हमले के जुड़े 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए. आतंकी पाकिस्तान ने इस हमले का जवाब देकर और भारत-पाकिस्तान में जंग शुरू हो गई. भारत के हमलों से पाकिस्तान की कमर टूट गई और आखिरकार चार दिन बाद पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए. इसके बाद भारत संघर्ष विराम के लिए सहमत हुआ.

लाल किला धमाका और आतंकवाद का सफेद चेहरा

10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किला के पास कार में बम धमाका हुआ, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 32 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए. इस हमले ने न सिर्फ दिल्ली को दहलाया बल्कि देश के सामने आतंकवाद का एक नया चेहरा उजागर कर दिया. जांच में पता चला कि कार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर उन नबी चला रहा था. बम धमाके की जांच में एक व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ. इससे पहले, पुलिस ने फरीदाबाद और दूसरी जगहों से 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया था, जिससे यह पता चला कि आतंकवादियों का प्लान बहुत ही बड़ा और भयानक था, जिसे पुलिस और एजेंसियों ने समय रहते रोक लिया.

विस्फोट के लिए लाल

इसके बाद डॉ. उमर उन नबी अपनी कार लेकर मौके से फरार हो गया. विस्फोटक बरामद होने के बाद वह कुछ समय तक फरार रहा. बाद में, वह दिल्ली पहुंचा और अपनी कार के साथ खुद को उड़ा लिया. इस मामले में डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. आदिल समेत कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया. इस पूरे टेरर मॉड्यूल ने यह साबित कर दिया कि आतंकवादी हमारे बीच ही हमारे संसाधनों पर पल रहे हैं. इस हमले में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद का हाथ पाया गया. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) इस मामले की जांच कर रही है. दिल्ली के लाल किला इलाके में हुई सुरक्षा घटना ने देश की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दीं.

नक्सलवाद का आखिरी साल- 2025

नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक लंबे समय से चली आ रही लेकिन अभी भी गंभीर समस्या है. 2025 में, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई मुठभेड़ हुईं. इन घटनाओं में दोनों तरफ नुकसान हुआ. इस बीच भारतीय सेना को एक बड़ी सफलता मिली. सेना के एनकाउंटर में एक करोड़ का इनामी नक्सली हिडमा मारा गया. माडवी हिडमा कुख्यात नक्सली कमांडर था, जो 19 नवंबर को अपनी पत्नी और अन्य नक्सलियों समेत मारा गया. हिडमा ने 2010 में 76 सीआरपीएफ के जवानों को मारा था, इसलिए हिडमा का मारा जाना छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने के अभियान में एक बड़ी सफलता है.

भारत में नक्सलवाद

केंद्र सरकार नक्सलवाद खत्म करने के लिए तेजी से अभियान चला रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया है कि 31 मार्च, 2026 तक भारत नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा, जिस दिशा में आए दिन बीजापुर समेत कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इसके अलावा सुरक्षाबल नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए और एक नई जिंदगी जीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. अकेले 2025 में, 270 नक्सलियों (जिनमें टॉप लीडर भी शामिल थे) को मार गिराया गया 680 से ज़्यादा को गिरफ्तार किया गया और लगभग 1225 ने सरेंडर कर दिया, जिससे नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है.

निष्कर्ष

2025 की ये घटनाएं भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने आने वाली कई चुनौतियों को उजागर करती हैं. चाहे वह पहलगाम आतंकवादी हमला हो, लाल किले इलाके में सुरक्षा घटना हो, या नक्सल प्रभावित इलाकों में मुठभेड़ें हों, हर घटना सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट करने और मजबूत करने की जरूरत बताती है.

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