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US is Buying Icebreakers : आर्कटिक क्षेत्र में मजबूती बनाने के लिए अमेरिका अब आइसब्रेकर की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है. साथ ही उसने ने फिनलैंड से भी इस मामले में डील की है.
20 जनवरी 2026
अमेरिका खरीद रहा है आइसब्रेकर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ग्रीनलैंड को USA का हिस्सा होना चाहिए. साथ ही आर्कटिक क्षेत्र पर उनके बढ़ते फोकस के कारण ट्रंप आइब्रेकर (बर्फ को तोड़ने वाले जहाज) खरीदना चाहते हैं. ये आइब्रेकर ठोस बर्फ से ढके समुद्र में आसानी से चल सकते हैं. अब अमेरिका इन जहाजों के एक्सपर्ट फिनलैंड के पास गया है और उससे डील करने की बात कह रहा है. ये जहाज पानी की जमी हुई उन सतह को साफ करते हुआ निकल जाता है, जिनसे आम जहाज नहीं निकल पाते हैं. फिनलैंड के पास बर्फ तोड़ने वाले जहाजों के डिजाइन और निर्माण में दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक है.
रूस की तुलना में बहुत कम आइसब्रेकर
आइसब्रेकर को लेकर अमेरिका फिनलैंड के साथ इसलिए डील कर रहा है क्योंकि इनके बीच में ‘आइसब्रेकर कोलैबोरेशन एफर्ट’ एक समझौता भी है. साथ ही इसका मकसद आर्कटिक में अपनी क्षमता को मजबूत करना है. इसके अलावा अमेरिका के पास रूस की तुलना में बहुत कम और पुराने आइसब्रेकर भी है, जिससे उसकी आर्कटिक क्षमता सीमित होती है. दूसरी तरफ आर्कटिक के संसाधनों और शिपिंग लेन पर नियंत्रण के लिए रूस और चीन के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अमेरिका को आर्कटिक में अपनी शक्ति को बढ़ाना है. वहीं, फिनलैंड के जहाजों से अमेरिका को तुरंत तकनीक का जखीरा मिल जाएगा और भविष्य में अमेरिका अपना उत्पादन कर सकेगा.
फिनलैंड की नहीं कोई टक्कर
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी इससे पहले कह चुके हैं कि आइसब्रेकर के मामले में अमेरिका, रूस से काफी पीछे है. यह अमेरिका के लिए एक शर्म की बात है. उन्होंने एक बार हैरानी और गुस्से में कहा था कि अमेरिका के पास एक आइसब्रेकर है, जबकि रूस के पास 48 हैं. साथ ही ट्रंप ने अपनी कमियों को ध्यान में रखते हुए कहा था कि इतने बड़े देश होने के बाद हमारे पास एक आइसब्रेकर है और रूस के पास 48 हैं. ये बहुत हास्यास्पद है. जहाजों को लेकर आइस परफॉर्मेंस इंजीनियर रीक्का मटाला कहती हैं कि यह बहुत जरूरी है कि इसमें पर्याप्त स्ट्रक्चरल मजबूती और इंजन की पावर हो. दूसरी तरफ कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव मिका होविलाइनेन ने बताया कि जहाज का आकार भी बहुत जरूरी है.
होविलाइनेन ने आगे कहा कि जहाज का डिजाइन ऐसा होना चाहिए जो बर्फ को मरोड़कर तोड़ दें. आपको बताते चलें कि जब आइसब्रेकर की बात आती है तो फिनलैंड दुनिया का बिना किसी शक के लीडर है. अभी जितने भी आइसब्रेकर चल रहे हैं, उनमें से 80 फीसदी कंपनियों ने डिजाइन किए हैं.
