15
ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर को बुधवार को दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
इंजीनियर की मौत का मामला: ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर को बुधवार को दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. विशेष जांच दल (SIT) ने घटना की जांच तेज करते हुए नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछताछ की. सहायक पुलिस आयुक्त (ग्रेटर नोएडा) हेमंत उपाध्याय ने पीटीआई को बताया कि आरोपी बिल्डरों में से एक एमजेड विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया. जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उपाध्याय ने बताया कि एफआईआर में नामजद दूसरे बिल्डर रियल एस्टेट डेवलपर लोटस ग्रीन्स के बिल्डर की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं. उन्होंने बताया कि जांच के तहत बुधवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों ने दुर्घटनास्थल से नमूने एकत्र किए. अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने सेक्टर 6 स्थित नोएडा प्राधिकरण मुख्यालय में कई घंटे बिताए और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कनिष्ठ कर्मचारियों, विशेष रूप से यातायात प्रकोष्ठ से जुड़े लोगों से पूछताछ की.
SIT ने दुर्घटनास्थल का किया दौरा
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मेरठ जोन) भानु भास्कर के नेतृत्व में मेरठ संभागीय आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता सहित विशेष जांच दल (एसआईटी) मंगलवार को नोएडा पहुंचा. दल ने सेक्टर 150 स्थित दुर्घटनास्थल का दौरा किया और मृतक के पिता राज कुमार मेहता से भी बात की. बुधवार सुबह से ही सेक्टर 150 स्थित दुर्घटनास्थल पर फोरेंसिक प्रयोगशाला और अन्य विभागों की टीमें सड़क और उससे सटे नाले की माप-जोख करती नजर आईं. अधिकारियों ने उस क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया, जिसमें वह गहरा गड्ढा भी शामिल था, जो अब जलमग्न तालाब जैसा दिख रहा है. इसी गड्ढे से दुर्घटना के तीन दिन बाद मंगलवार शाम को मृतक युवराज मेहता की कार निकाली गई थी. गुरुग्राम में काम करने वाले युवराज मेहता 16 जनवरी की रात को घर लौट रहे थे, तभी सेक्टर 150 में एक निर्माण स्थल के पास उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई.
JE की सेवाएं समाप्त
घने कोहरे के बीच पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के बचाव प्रयासों के बावजूद करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बाद उनकी मौत हो गई. उनके असहाय पिता राज कुमार मेहता इस त्रासदी को अपनी आंखों के सामने देखते रहे. निर्माणकर्ताओं और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को घटना की एसआईटी जांच के आदेश दिए. इससे पहले प्राधिकरण के यातायात प्रकोष्ठ के एक कनिष्ठ अभियंता की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं. पुलिस ने मंगलवार को एमजेड विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया, जो उस निर्माण भूखंड का मालिक है, जहां 2021 से पानी जमा है. दूसरा बिल्डर फरार है. अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले यह भूखंड लोटस ग्रीन्स के स्वामित्व में था. पुलिस ने बताया कि एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना) और 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) के साथ-साथ अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है.
ये भी पढ़ेंः संभल हिंसा: मुख्य साजिशकर्ता शारिक साठा की करोड़ों की संपत्ति कुर्क, विदेश भागने की आशंका के बीच बड़ी कार्रवाई
