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जानें कैसे शुरु हुई काशी की मसान होली

by Live India
जानें कैसे शुरु हुई काशी की मसान होली

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Kashi Masan Holi: महादेव की नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट पर सभी शिवभक्त मसान होली खेलते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि इसका महत्व क्या है.

27 फरवरी, 2026

भारत में होली का त्योहार बहुत ही उल्लास से मनाया जाता है. इस दिन सभी अपने परिवार और दोस्तों को रंग लगाकर होली खेलते हैं. गली-मोहल्ले से लेकर मंदिरों तक हर जगह होली के रंग में रंग जाती हैं. लेकिन काशी में एक अनोखी तरह की होली खेली जाती है. महादेव की नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट पर सभी शिवभक्त मसान होली खेलते हैं. मसान मतबल होता है श्मशान. यानी श्मशान की भस्म से होली खेलना. होली से पहले आने वाली आमलकी एकादशी के अगले दिन काशी में लोग चिता की भस्म से खेलते हैं. यह नजारा अद्भुत होता है. आज हम आपको बताएंगे कि भस्म की होली क्यों खेली जाती है और इसकी शुरुआत कैसे हुई.

इस साल कब खेली जाएगी मसानी होली

इस साल आमलकी एकादशी 27 फरवरी को है यानी 28 फरवरी को मणिकर्णिका घाट पर मसान होली खेली जाएगी. बता दें, मणिकर्णिका घाट एक ऐसा घाट है, जहां चिता कभी नहीं बुझती. यहां हमेशा कोई न कोई चिता जलती रहती है, इसलिए भस्म भी आसानी से मिल जाती है. हिंदूओं के लिए मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस अद्भुत होली का नजारा बहुत आकर्षित होता है.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, फाल्गुन महीने की रंगभरी एकादशी को भगवान शिव देवी पार्वती को विदा करके पहली बार काशी लौटे थे. उस खुशी में उन्होंने अपने भक्तों के साथ गुलाल उड़ाकर उत्सव मनाया था. लेकिन महादेव के कुछ प्रिय भक्त, जैसे भूत, प्रेत और अघोरी, इस जश्न में शामिल नहीं हो पाए थे. क्योंकि शिव अपने भक्तों से प्रेम करते हैं, इसलिए वे किसी भी भक्त को अकेला नहीं छोड़ सकते थे? महादेव एकादशी के अगले दिन खुद मणिकर्णिका घाट गए. वहां उन्होंने श्मशान में रहने वाले अपने खास भक्तों के साथ जलती चिताओं की राख से होली खेली. तब से काशी में मसान होली की यह अनोखी परंपरा चली आ रही है.

मसान का महत्व

मसान होली का अपना आध्यात्मिक महत्व है. यह बताती है कि कुछ भी बुरा या अपवित्र नहीं है. मृत्यु कोई शोक का कारण नहीं है. श्मशान की राख से होली खेलने का मतलब है कि मौत जीवन का का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है. महादेव का तो श्रृंगार भी चिता की भस्म से होता है, क्योंकि वे सिर्फ मनुष्य नहीं, बल्कि राक्षस, जानवर और भूत-प्रेतों के भी भगवान हैं. वहीं काशी तो महादेव का निवास स्थान मानी जाती है. माना जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर चिता जलने से मोक्ष मिल जाता है. इसलिए हर कई यहीं अपना अंतिम संस्कार करवाने की इच्छा रखता है.

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