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America में छाया नौकरी का संकट, फरवरी में गईं 92,000 जॉब

by Live India
America में छाया नौकरी का संकट, फरवरी में 92,000 लोगों की गई जॉब; अब पड़ेगी महंगाई की मार

Unemployment rate in America: अमरीका में महंगाई और वॉर की वजह से पिछले महीने 92,000 नौकरियां गई हैं. इस वजह से वहां की बेरोजगारी दर 4.4% तक पहुंच गई है.

07 मार्च, 2026

अमरीकी बाजार से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है. अक्सर हम सुनते हैं कि अमरीका सपनों का देश है, लेकिन पिछले महीने वहां के एम्प्लॉयमेंट मार्केट की जो तस्वीर सामने आई है, वो थोड़ी हैरान करने वाली है. दरअसल, लेबर डिपार्टमेंट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अमरीकी कंपनियों ने उम्मीद के परे 92,000 नौकरियां कम कर दी हैं. ये इस बात का क्लियर हिंट है कि वहां का बाजार अभी भी काफी दबाव में है. इसी के साथ बेरोजगारी की दर भी बढ़कर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है.

फ्यूचर की चिंता

जनवरी के महीने में जब 1,26,000 नई नौकरियां जुड़ी थीं, तब सबको लगा था कि अब अच्छे दिन आने वाले हैं. इकॉनोमिस्ट ने भी अंदाज़ा लगाया था कि फरवरी के महीने में कम से कम 60,000 नई पोस्ट्स निकलेंगी. लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उलटा. ऊपर से दिसंबर और जनवरी के पुराने आंकड़ों में भी सुधार किया गया, जिससे पता चला कि वहां पहले ही 69,000 नौकरियां कम थीं.
नेवी फेडरल क्रेडिट यूनियन की चीफ इकोनॉमिस्ट हीथर लॉन्ग का कहना है कि जॉब मार्केट इस टाइम कई मुश्किलों का सामना कर रही है. कंपनियों के लिए इस मौसम में नई भर्तियां करना काफी रिस्की हो गया है. वैसे भी, जब तक ईरान के साथ चल रही लड़ाई के बादल नहीं छंटते और लोगों में खर्च करने की हिम्मत नहीं आती, तब तक कंपनियां अपने हाथ रोकने पर मजबूर हैं.

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इन सेक्टर्स पर गाज

अमेरिका में नौकरियों के जाने का सिलसिला लगभग हर सेक्टर में देखा गया. कड़ाके की ठंड की वजह से कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने 11,000 नौकरियां कम कीं. सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े हेल्थकेयर सेक्टर से आए, जहां 28,000 नौकरियां कम हो गईं. इसकी एक बड़ी वजह नर्सों और फ्रंट-लाइन वर्कर्स की हड़ताल रही. फैक्ट्री वर्कर्स के लिए भी टाइम सही नहीं चल रहा है, पिछले 15 महीनों में से 14 बार वहां छंटनी ही देखी गई है. सिर्फ इतना ही नहीं, हमारे फेवरेट रेस्टोरेंट्स और बार में भी करीब 30,000 नौकरियां कम हुई हैं. कूरियर और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज में भी हजारों लोगों को काम से हाथ धोना पड़ा. हालांकि, फाइनेंस सेक्टर में 10,000 नई नौकरियां आईं, लेकिन वहां भी छंटनी का डर बना हुआ है.

ईरान और ट्रंप का असर

अमरीकी अर्थव्यवस्था इस समय दोहरी मार झेल रही है. एक तरफ ईरान के साथ वॉर की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इससे आम आदमी और बिजनेस दोनों का बजट बिगड़ गया है. दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और सरकारी छंटनी ने मार्केट की कमर पहले ही तोड़ दी थी. फेडरल रिजर्व के लिए ये सिचुएशन किसी बुरे सपने जैसी है. अब उनके पास दो ही रास्ते हैं, या तो वो इंटरेस्ट रेट कम करें ताकि नौकरियां बढ़ें, या फिर इसमें कोई बदलाव ना करें, ताकि महंगाई को कंट्रोल किया जा सके.

उम्मीद की किरण

इन सबके बीच कुछ पॉजिटिव खबरें भी हैं. ‘बेसिक फन’ जैसी खिलौने बनाने वाली कंपनियों के सीईओ जे फोरमैन को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ टैरिफ हटाए जाने के बाद उन्हें राहत मिलेगी. अगर उन्हें टैक्स रिफंड मिलता है, तो वो अपने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा सकेंगे और नई भर्तियां भी करेंगे. हालांकि, ये रास्ता इतना आसान नहीं है. नए टैरिफ के लागू होने से उनकी कंपनी का बिल दोगुना होने का भी डर है. यानी अमरीकी जॉब मार्केट इस टाइम एक चौराहे पर खड़ी है. आने वाले कुछ महीने ये तय करेंगे कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटती है या ये मंदी की नई शुरुआत है.

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