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Rupee vs Dollar: शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, भारतीय रुपया 95.86 पर खुला. उसके बाद इंट्राडे कारोबार में गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.14 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 50 पैसे की गिरावट दर्ज करता है.
रुपया बनाम डॉलर: भारतीय करेंसी रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. शुक्रवार को रुपया 96.14 पर आ गया. मतलब कि एक अमेरिकी डॉलर बराबर 96.14 रुपया. यह पहली बार है जब भारतीय करेंसी इतनी नीचे गई है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने डॉलर के मुकाबले रुपये को कमजोर किया है. शुक्रवार को कच्चे तेल के बढ़ते दाम और महंगाई संबंधित चिंताओं के बीच रुपया 96.14 के स्तर पर आ गया था, वहीं बाजार बंद के दौरान यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.81 पर बंद हुआ. आइए एक्सपर्ट और बाजार के जानकार से जानते हैं कि रुपये में यह गिरावट क्यों आई है.
रुपये में अब तक 6% की गिरावट
मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय करेंसी रुपया में इस साल अब तक 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. पिछले 6 कारोबारी सत्रों में ईरान युद्ध के बढ़ते खतरे और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से रुपये में 2 प्रतिशत की गिरावट आई है. एक्सपर्ट बताते हैं कि मजबूत अमेरिकी खुदरा बिक्री और स्थिर श्रम मार्केट आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने से डॉलर इंडेक्स में तेजी दिखी है.
शुक्रवार को 95.86 पर खुला रुपया
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, भारतीय रुपया 95.86 पर खुला. उसके बाद इंट्राडे कारोबार में गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.14 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 50 पैसे की गिरावट दर्ज करता है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.81 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 17 पैसे की गिरावट को दिखाता है. इसमें आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप का भी योगदान रहा.
वहीं, गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.96 तक कमजोर हो गया, लेकिन अंत में 2 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 95.64 पर बंद हुआ था.
रुपये में गिरावट की वजहें
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं, अपेक्षाकृत हाई वैल्यूएशन और एआई-आधारित निवेश के अवसरों की कमी ने कैपिटल फ्लो पर दबाव डाला है. इसके अलावा, कमजोर शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI Inflows) से भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ने की संभावना है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं.
बाजार के एक्सपर्ट और मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई संबंधी चिंताओं के चलते रुपये में निगेटिव रुझान रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, “डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, आरबीआई के हस्तक्षेप और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी से रुपये को निचले स्तर पर सहारा मिल सकता है. डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 95.60 से 96.20 के दायरे में रहने की उम्मीद है.”
समाचार स्रोत: पीटीआई
