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ठाकरे ब्रदर्स का हुआ मिलन, जानें अलगाव से अलायंस तक का सफर

by Live India
ठाकरे ब्रदर्स का हुआ मिलन, जानें अलगाव से अलायंस तक का सफर

Uddhav and Raj Thackeray: दो दशकों की दूरी को खत्म करते हुए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आज फिर से हाथ मिला लिया है और गठबंधन का ऐलान किया है.

24 दिसंबर, 2025

Uddhav and Raj Thackeray: महाराष्ट्र की सियासत में आज बड़ा मोड़ आया है. दो दशकों की दूरी को खत्म करते हुए उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने आज फिर से हाथ मिला लिया है. महाराष्ट्र में अगले साल बीएमसी का चुनाव होने वाला है, लेकिन उससे ठाकरे भाइयों ने शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन का ऐलान कर दिया है. आज के दिन शिवसेना के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर हैं, क्योंकि बालासाहब ठाकरे की विरासत को संभालते हुए उनका परिवार फिर से पूरा हो गया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने कहा कि आज से महाराष्ट्र की सियासत का नया अध्याय शुरू हो गया है.

उत्तराधिकारी बनने की थी लड़ाई

शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे ने अपनी पार्टी को हिंदूवादी पार्टी के रूप में स्थापित किया था. बालासाहब की विरासत संभालते हुए उनके बेटे उद्धव ठाकरे और भतीजे राज ठाकरे सियासत में आए, लेकिन राजनीति में उद्धव से ज्यादा राज ठाकरे की रुचि थी. राज ठाकरे को बालासाहब ठाकरे की छवि के रूप में देखा जाता था. उनकी बोल और विचार बालासाहब जैसे ही थे, इसलिए उन्हें ही पार्टी का उत्तराधिकारी माना जाता था. राज ठाकरे के ऊपर ही पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियां थी. लेकिन जब बालासाहब ठाकरे ने अपने उत्तराधिकारी के लिए अपने बेटे उद्धव ठाकरे को चुना तो राज ठाकरे को बड़ा धक्का लगा. यही हर राजनीतिक परिवार की तरह ठाकरे परिवार में भी दरार आ गई.

उद्धव का उदय

इसके बाद उद्धव ने भी राजनीति में अपने पैर जमाना शुरू किया. उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र सामना से शुरुआत की और धीरे-धीरे पार्टी के बाकी बड़े काम करने लगे. एक तरफ उद्धव को संगठन में ज्यादा अहमियत मिलने लगी, तो दूसरी राज ठाकरे उनके समर्थकों में जलन की भावना पैदा होने लगी. साल 2002 में मुंबई महानगरपालिका चुनाव में पार्टी प्रचार का जिम्मा उद्धव ठाकरे को दिया गया, जो अब तक राज ठाकरे के पास था. चुनाव में शिवसेना को प्रचंड जीत मिली. इसी तरह 2004 के विधानसभा चुनाव में उद्धव ने ही सारी जिम्मेदारियों संभाली, लेकिन शिवसेना को करारी हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में राज ठाकरे के समर्थकों ने हार का ठीकरा उद्धव पर फोड़ा और पार्टी में कलह और बढ़ गया.

‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ की घोषणा

साल 2005 में जब बालासाहब ठाकरे ने उद्धव को पार्टी का कार्याध्यक्ष बनाया तो राज ठाकरे नाराज हो गए और शिवसेना से अलग होने का फैसला लिया. 18 दिसंबर 2005 को राज ठाकरे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और तीन महीने बाद अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया. यह दिन महाराष्ट्र का सियासी समीकरण बदलने वाला दिन था. 9 मार्च 2006 को राज ठाकरे ने अपनी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ की घोषणा की. राज ठाकरे ने 2007 में पहली बार BMC चुनाव लड़ा. उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में 28 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. इसके बाद, उनकी पार्टी ने 2009 के विधानसभा चुनावों में 13 सीटें जीतीं. ​​उस समय लगा कि राजठाकरे ने महाराष्ट्र में अपनी पकड़ बना ली है, लेकिन वे ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाए.

शिवसेना का बंटवारा

इस बीच, उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की कमान संभाली लेकिन उनके समर्थक उनसे संतुष्ट नहीं थे. शिवसेना के एक बड़े हिस्से ने आरोप लगाया कि उद्धव हिंदुत्व को छोड़कर कांग्रेस की विचारधारा पर चलने लगे हैं. 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर कब्ज़ा कर लिया और उद्धव से हाथ से महाराष्ट्र की सत्ता छिन गई. एकनाथ शिंदे नए मुख्यमंत्री बने. शिवसेना दो गुटों में बंट गई. उद्धव ठाकरे को शिवसेना (UBT) नाम से अपनी पार्टी बनानी पड़ी. 2024 के विधानसभा चुनावों में, उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और सिर्फ 20 सीटें जीतीं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 81 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 57 सीटें जीतीं. राज ठाकरे की पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.

लगातार हार के बाद हुआ मिलन

इसी तरह, उद्धव और राज ठाकरे दोनों की पार्टियों को नगर परिषद चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा. अब दोनों ठाकरें भाइयों का अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में नजर आने लगा. महाराष्ट्र की सियासत में फिर से पकड़ मजबूत करने और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने हाथ मिलाने का फैसला किया और आज अपने गठबंधन का ऐलान किया.

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