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टंप ने 66 ग्लोबल संस्थानों से अमेरिका को किया अलग

by Live India
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Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने 66 संयुक्त राष्ट्र और गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों से अमेरिका को अलग कर दिया है और इन्हें बेकार बताया है.

8 जनवरी, 2026

डोनाल्ड ट्रम्प: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र निकायों और भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सहित 66 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर कर दिया है. ट्रंप ने इन संस्थानों को बेकार और अमेरिका के हितों के विपरीत बताया है। ट्रंप के इस एक्शन से यह एक बार फिर पता चलता है कि अमेरिकी दुनिया के साथ विकास के रास्ते पर नहीं चलना चाहता, बल्कि सिर्फ अपना फायदा चाहता है. ट्रंप ने बुधवार को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के विपरीत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से संयुक्त राज्य अमेरिका को वापस लेना’ शीर्षक वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.

संस्थानों को फंडिंग नहीं करेगा अमेरिका

हस्ताक्षर करने के बाद, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह तय किया है कि 66 संयुक्त राष्ट्र और गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों का सदस्य बने रहना, उनमें भाग लेना, या अन्यथा उन्हें समर्थन देना संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के विपरीत है. बुधवार को जारी व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, इसमें 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाएं, साथ ही 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन शामिल हैं जो अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, या संप्रभुता के विपरीत काम करते हैं. ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को संगठनों से संयुक्त राज्य अमेरिका की वापसी को जितनी जल्दी हो सके लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के लिए वापसी का मतलब है कि कानून द्वारा अनुमत सीमा तक उन संस्थाओं में भागीदारी या फंडिंग बंद करना.

फिजूलखर्ची रोकने के लिए किया अलग

विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 66 संस्थानों को “अपने दायरे में अनावश्यक, कुप्रबंधित, गैर-जरूरी, फिजूलखर्ची वाले, खराब तरीके से चलाए जा रहे, अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले अभिनेताओं के हितों द्वारा नियंत्रित, या हमारे राष्ट्र की संप्रभुता, स्वतंत्रता और सामान्य समृद्धि के लिए खतरा पाया है. राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट हैं- अब इन संस्थानों को अमेरिकी लोगों का खून, पसीना और खजाना भेजना स्वीकार्य नहीं है, जबकि इसके बदले में कुछ भी नहीं मिल रहा है.” रुबियो ने कहा हमारे लोगों की कीमत पर विदेशी हितों के लिए टैक्सपेयर्स के अरबों डॉलर खर्च होने के दिन अब खत्म हो गए हैं.

जलवायु संधि से बनाई दूरी

अमेरिका ने UNFCCC (यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज) से भी दूरी बना ली है. ट्रंप पहले भी जलवायु परिवर्तन को एक धोखा बता चुके हैं और अपने पहले कार्यकाल के दौरान पेरिस समझौते से पीछे हट गए थे. पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि अमेरिका जैसे बड़े प्रदूषण फैलाने वाले देश के सहयोग के बिना जलवायु संकट से निपटना मुश्किल होगा. इससे दूसरे देशों को भी अपनी प्रतिबद्धताओं से मुकरने का बहाना मिल सकता है.

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