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सीजेपी पर पंजाब फिल्म उद्योग: राजधानी दिल्ली में CJP के आंदोलन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर अब पंजाबी फिल्म और संगीत जगत की कई बड़ी हस्तियों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. जहां दिलजीत दोसांझ, सोनू सूद और जसबीर जस्सी ने छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार की अपील की है, वहीं, मशहूर पंजाबी गायक बब्बू मान ने आंदोलन के समर्थन से दूरी बनाते हुए कई सवाल खड़े किए हैं. अभिनेत्री सोनम बाजवा की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा का विषय बनी हुई है.
छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए
गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जो कुछ हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने लिखा कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था और प्रशासन से अपील की कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाए. दिलजीत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि “लोगों की आवाज भगवान की आवाज होती है.” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले भी कई बार “एंटी-नेशनलिस्ट” कहा जा चुका है और इस बार भी ऐसा कहा जा सकता है. उन्होंने किसान आंदोलन के बाद आई कानूनी परेशानियों का भी जिक्र किया और कहा कि वे उन पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं कर सकते. अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “भगवान सब देख रहा है, भगवान सबका भला करे.”
सोनू सूद की अपील
अभिनेता सोनू सूद ने भी आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि “हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए.” उनकी इस टिप्पणी को छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैये की अपील के रूप में देखा जा रहा है. इसके अलावा पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि छात्र हमारे अपने बच्चों की तरह हैं और उनके साथ प्यार और सम्मान से बात की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए और इस पूरे मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.
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सोनम ने किया सवाल
अभिनेत्री सोनम बाजवा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “सवाल करना कब से गलत हो गया?” इसके साथ उन्होंने टूटे हुए दिल की इमोजी भी लगाई. हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी घटना या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे CJP आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. दूसरी ओर, पंजाबी गायक बब्बू मान ने इस आंदोलन का समर्थन करने से इनकार करते हुए कहा कि हर बार पंजाबियों को ही संघर्ष की पहली कतार में खड़ा क्यों होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन, 1984 की त्रासदी और हालिया किसान आंदोलन तक पंजाबियों ने हर बड़े संघर्ष में सबसे आगे रहकर बड़ी कीमत चुकाई है.
बब्बू मान ने उठाई किसानों की बात
बब्बू मान ने सवाल किया कि जब 2020-21 का किसान आंदोलन चल रहा था, तब क्या CJP के प्रमुख अभिजीत देब (जैसा कि उन्होंने अपने बयान में उल्लेख किया) किसानों के समर्थन में सामने आए थे? उन्होंने कहा कि यदि उस समय समर्थन नहीं मिला, तो पंजाबियों से हर बार बिना सोचे-समझे किसी भी आंदोलन में आगे आने की अपेक्षा क्यों की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबियों की भी अपनी जिंदगी है और वे हमेशा लाठियां खाने के लिए आगे नहीं आ सकते. इसी वजह से कई पंजाबी और वे स्वयं इस प्रदर्शन का समर्थन नहीं कर रहे हैं.
छेड़ी नई बहस
दिल्ली में CJP आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर देशभर में चर्चा जारी है. इसी बीच पंजाबी फिल्म और संगीत जगत की प्रमुख हस्तियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है. जहां कुछ कलाकार छात्रों की आवाज सुनने और संवेदनशील रवैया अपनाने की वकालत कर रहे हैं, वहीं कुछ यह सवाल उठा रहे हैं कि हर आंदोलन में पंजाबियों से अग्रिम भूमिका निभाने की अपेक्षा क्यों की जाती है.
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