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NH मामले पर बोली कांग्रेस

by Live India
NH मामले पर बोली कांग्रेस

National Herald Case : नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से दायर की गई चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया.

नेशनल हेराल्ड केस: नेशनल हेराल्ड मामले में लोकसभा में प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से दायर की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया. ED ने कांग्रेस के दोनों नेताओं को आरोपी बनाया है और आरोप लगाया कि सोनिया और राहुल एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (AJL) के अंतर्गत आने वाली 2 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पा था. कोर्ट की तरफ से संज्ञान लेने से इनकार करने के बाद कांग्रेस ने मंगलवार ने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार की अवैधता और उसका राजनीति से प्रेरित मुकदमा पूरी तरह बेनकाब हो गया है.

ED का मामला अधिकार क्षेत्र से बाहर

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कोर्ट ने इस मामले में कांग्रेस सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ED की कार्यवाही को पूरी तरह से अवैध और दुर्भावनापूर्ण पाया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की दुर्भावना और अवैधता पूरी तरह से बेनकाब हो गई है. कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि ED का मामला अधिकार क्षेत्र से बाहर है. इसमें कोई FIR नहीं, जिसके बिना कोई मामला नहीं बनता है. पिछले एक दशक से मुख्य विपक्षी पार्टी के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह राजनीति से प्रेरित मुकदमा भारत के लोगों के सामने बेनकाब हो गया है. श्रीनेत आगे कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं, अपराध से हासिल कोई पैसा नहीं और संपत्ति का कोई लेन-देन नहीं, ये सभी बेबुनियाद आरोप है जो एक राजनीतिक बदले की भावना है. साथ ही प्रोपेगेंडा मानहानि और अभियान का हिस्सा रहे हैं.

अधिकारों के लिए लड़ना प्रतिबद्ध

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसका नेतृत्व सच्चाई और हर भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने आगे कहा कि हम डरेंगे नहीं औ र कभी नहीं डरेंगे, क्योंकि हम हमेशा से ही सच्चाई के लिए लड़ते आए हैं. नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और पांच अन्य के खिलाफ जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप पर संज्ञान लेने से इनकार करे हुए कोर्ट ने कहा कि दायर चार्जशीट एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर की गई जांच पर आधारित है, न कि किसी मूल अपराध की एफआईआर पर है. वहीं, जज ने कहा कि कानून में इसकी जानकारी लेना बिल्कुल गलत है. इसके अलावा फैसले का मुख्य हिस्सा पढ़ते हुए जज ने कहा कि दिल्ली की पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है और इस आधार ईडी की दलीलों पर मेरिट के आधार पर फैसला करना जल्दबाजी होगी.

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