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Sabarimala Temple में महिलाओं की एंट्री का फिर उठा मुद्दा

by Live India
Sabarimala Temple में महिलाओं की एंट्री का फिर उठा मुद्दा

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Sabarimala Temple : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री वाले मुद्दे ने फिर से जोर पकड़ लिया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर रिव्यू पिटिशन दाखिल की है और रूलिंग पार्टी CPM ने यह भी स्टैंड क्लियर किया है.

16 फ़रवरी 2026

Sabarimala Temple : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का मुद्दा एक फिर गरमाने लगा है. इस मामले में सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गई है, जिस पर विपक्ष ने स्पष्टीकरण मांगा है कि सरकार इस पर अपना रुख स्पष्ट करें. साथ ही सुप्रीम कोर्ट आज मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं की एंट्री को लेकर अपने फैसले पर दायर हुई 67 रिव्यू पिटीशन पर विचार करेगा. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के नेतृत्व वाली तीन जजों की बेंच बराबरी, आस्था की आजादी और धार्मिक रीति-रिवाजों की जरूरत से जुड़े मुद्दे पर जांच करेगी. दूसरी तरफ CPM के स्टेट सेक्रेटरी एमवी गोविंदन ने सोमवार को कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री विवादित मुद्दे पर पार्टी और सरकार स्टैंड एक जैसा हो ये जरूरी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसला किया था समर्थन

बताया जा रहा है कि सबरीमाला मंदिर के अलावा 9 जजों की बेंच मुस्लिम और पारसी कम्युनिटी में महिलाओं के धार्मिक अधिकारों और आस्था, रीति-रिवाजों में किस हद तक दखल दे सकता है. वहीं, फैसले पर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई से पहले केरल की राजनीति में उबाल देखा जा रहा है. इस पर सत्तारूढ़ पार्टी के सेक्रेटरी एम वी गोविंदन ने सीपीएम का स्टैंड बताया है. इस दौरान उन्होंने रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक पहाड़ी मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं की एंट्री का समर्थन किया था. गोविंदन ने यह भी कहा कि पार्टी का स्टैंड अलग मामला है और सरकार अपने फैसले के लिए स्वतंत्र है कि उसे क्या करना है. सरकार का अपना फैसला स्वतंत्र होगा.

राज्य में राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

पार्टी सेक्रेटरी का स्पष्ट कहना है कि सीपीएम और सरकार के फैसले में अंतर है, जो पार्टी का स्टैंड होगा वह सरकार का भी हो… यह कतई भी जरूरी नहीं है. उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि सबरीमाला मुद्दे से CPI(M) के लिए कोई मुश्किल खड़ी हुई है. थोड़े समय के ब्रेक के बाद रविवार को महिलाओं की एंट्री का मुद्दा फिर से सामने आया, जिससे केरल में नई पॉलिटिकल बहस शुरू हो गई. विपक्ष ने LDF सरकार से मंदिर में जवान महिलाओं की एंट्री पर अपना स्टैंड साफ करने को कहा. इसी बीच रूलिंग पार्टी और अपोजिशन कांग्रेस के बीच में जुबानी जंग शुरू हो गई है.

9 जजों के बेंच करेगी पुनर्विचार

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 जजों की बेंच ने 7 अप्रैल को केरल के सबरीमाला मंदिर समेत कई धर्मों और धार्मिक जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़ी पिटीशन पर आखिरी सुनवाई शुरू करेगी. कांग्रेस ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन शीर्ष अदालत के सामने सरकार की स्थिति साफ करें. इस पर सीपीएम ने कहा कि वह यह नहीं बता सकती है कि सुप्रीम कोर्ट में वह क्या पेश करने वाली है. गोविंदन ने पूछा कि आप इस मामले में बेवजह जल्दबाजी क्यों दिखा रहे हैं, पार्टी और सरकार से क्यों जवाब मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर मं पीरियड्स वाली महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था. इस फैसले से राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और यह मामला अभी भी एक बड़ी बेंच के पास विचाराधीन है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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