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Kerala Elections: SIR विवादों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार है.
केरल चुनाव: SIR विवादों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार है. मतदाता सूची का SIR इस उद्देश्य के साथ किया गया था कि कोई भी पात्र मतदाता बाहर न हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल न हो. आगामी केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद कोच्चि में उन्होंने कहा कि राज्य के लिए लोकतंत्र कोई नई बात नहीं है. केरल ने देश और दुनिया के कई हिस्सों को लोकतांत्रिक प्रथाएं सिखाई हैं. राज्य के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कुमार ने कहा कि केरल 18 वर्षों तक उनका कार्यस्थल रहा है. उन्होंने लगभग 22 साल पहले एर्नाकुलम कलेक्टर के रूप में कार्य किया था. उन्होंने कहा कि केरल में 1,000 साल से भी पहले ‘नट्टुकुट्टम’ (ग्राम सभाएं) थीं, जिन्होंने सामूहिक निर्णय लेने की नींव रखी थी. उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन करने के लिए केरल में पहली बार EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें प्रदर्शित की जाएंगी.
केरल में है 140 विधानसभा क्षेत्र
उन्होंने कहा कि केरल ने 1960 में पहली आचार संहिता भी बनाई थी. इसे बाद में सभी राजनीतिक दलों के परामर्श से भारत के चुनाव आयोग ने अपनाया, जिसे आज हम आदर्श आचार संहिता कहते हैं. CEC ने कहा कि केरल चुनाव प्रबंधन में भी अग्रणी रहा है. 1982 में परवूर विधानसभा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का पहला प्रायोगिक उपयोग शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि इस मजबूत आधार के साथ केरल के सभी राजनीतिक दलों और राज्य की पूरी चुनाव मशीनरी ने एक स्वर में घोषणा की है कि आगामी चुनाव सिर्फ राज्य के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल होंगे. केरल में 140 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें 124 सामान्य सीटें हैं, 14 अनुसूचित जाति के लिए और दो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.
शुद्ध मतदाता सूची ही लोकतंत्र का आधार
उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार है. हाल ही में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का एक ही स्पष्ट उद्देश्य था कि किसी भी योग्य मतदाता को बाहर नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी अयोग्य व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए. 5,000 नए और 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग सुनिश्चित की जाएगी. कहा कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि 397 मतदान केंद्रों का प्रबंधन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाएगा और 790 से अधिक मॉडल मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि केरल में लगभग 2.43 लाख विकलांग मतदाता हैं. 85 वर्ष से अधिक आयु के दो लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक घर से मतदान करने के पात्र होंगे. 18-19 आयु वर्ग में 4.24 लाख और 20-29 आयु वर्ग में लगभग 45 लाख मतदाता हैं, जिन्हें प्रोत्साहित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष अभियान आयोजित किए जाएंगे.
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं
चुनाव आयोग वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ग्राउंड-फ्लोर मतदान केंद्र, रैंप, व्हीलचेयर और प्राथमिकता मतदान सहित बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगा. उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों के प्रवेश द्वार तक मोबाइल फोन ले जाया जा सकता है और जमा सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन करने के लिए केरल में पहली बार EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें प्रदर्शित की जाएंगी. कुमार ने कहा कि पहले चुनाव आयोग के पास 40 से अधिक विभिन्न एप्लिकेशन थे, जिन्हें अब एकीकृत कर दिया गया है. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग होगी. उन्होंने कहा कि मतदान प्रतिशत सहित चुनाव अपडेट हर दो घंटे में उपलब्ध कराए जाएंगे. उन्होंने कहा कि रिटर्निंग अधिकारियों पर दबाव से बचने के लिए डाक मतपत्रों की गिनती ईवीएम वोटों से दो राउंड पहले की जाएगी.
समाचार स्रोत: पीटीआई
