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Dharmendra Pradhan: एक समय में पेपर लीक के खिलाफ लाठियां खाकर छात्र राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने वाले धर्मेंद्र प्रधान के लिए वर्तमान समय परीक्षा की सबसे कठिन घड़ी बन चुका है. जहां एक तरफ सोनम वांगचूक जैसे समाजसेवियों के लोकतांत्रिक अनशन सरकार के नैतिक रुख पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर डटे छात्र शिक्षा मंत्री से किसी भी प्रकार के राजनीतिक समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं. अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि अपने तीन दशकों के इस लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के मजबूत राजनीतिक संरक्षण के सहारे धर्मेंद्र प्रधान इस अभूतपूर्व छात्र आंदोलन और पेपर लीक के इस गंभीर संकट से शिक्षा मंत्रालय को कैसे बाहर निकालते हैं? इस राष्ट्रव्यापी उथल-पुथल के बीच आइए जानते हैं धर्मेंद्र प्रधान के पूरे राजनीतिक सफर के बारे में…
विरोधाभास: अतीत का संघर्ष बनाम वर्तमान का संकट
इतिहास का चक्र आज पूरी तरह से घूम चुका है. वर्तमान में छात्रों के तीखे विरोध का सामना कर रहे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगभग तीन दशक पहले (वर्ष 1997 में) खुद एक जुझारू छात्र नेता के रूप में पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे.
- 1997 का ओडिशा सचिवालय प्रदर्शन: वर्ष 1997 में ओडिशा में एक राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था. उस समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने करीब 1,500 छात्रों के साथ भुवनेश्वर में ओडिशा सचिवालय के बाहर एक उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व किया था.
- पुलिसिया दमन और चोटें: उस दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार की पुलिस ने छात्रों को तितर-बितर करने के लिए बर्बर लाठीचार्ज किया था. इस लाठीचार्ज में छात्र नेता धर्मेंद्र प्रधान को गंभीर चोटें आई थीं और उनके शरीर में फ्रैक्चर भी हुए थे.
- वर्तमान की विडंबना: आज जब NEET-UG 2026 विवाद के कारण कम से कम 21 छात्रों की आत्महत्या और देशव्यापी आक्रोश के बाद छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से जवाबदेही मांग रहे हैं, तो उन पर दिल्ली पुलिस द्वारा कड़े प्रतिबंध (जैसे धारा 163 लागू करना) और बल प्रयोग किया गया. आलोचक और विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि जो कभी खुद छात्रों के हक के लिए लाठियां खाता था, वह आज सत्ता में बैठकर देश के भविष्य पर लाठियां और पुलिसिया तंत्र चलवा रहा है.
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पारिवारिक पृष्ठभूमि
धर्मेंद्र प्रधान एक स्थापित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका झुकाव बचपन से ही राजनीतिक विमर्श की तरफ रहा है.
- पिता का राजनीतिक कद: उनके पिता डॉ. देवेंद्र प्रधान ओडिशा के एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रहे हैं. वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में राज्य मंत्री (सड़क परिवहन और पोत परिवहन) के रूप में कार्य कर चुके हैं.
- माता: उनकी माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है.
- पत्नी (मृदुला प्रधान): धर्मेंद्र प्रधान का विवाह 9 दिसंबर 1998 को मृदुला ठाकुर प्रधान से हुआ था. चुनावी हलफनामे के अनुसार, मृदुला प्रधान एक व्यवसायी हैं और सामाजिक स्तर पर ‘विकास फाउंडेशन ट्रस्ट’ नामक एक सार्वजनिक धर्मार्थ संस्था में प्रबंधकीय ट्रस्टी के रूप में काम करती हैं.
बच्चे और उनका करियर: धर्मेंद्र प्रधान के दो बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी
- बेटी (नैमिशा प्रधान): नैमिशा प्रधान ने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के मैसाचुसेट्स में स्थित प्रतिष्ठित ‘द फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी’ (टफ्ट्स यूनिवर्सिटी) से मास्टर ऑफ लॉज़ (LLM) की डिग्री पूरी की है. वे ऊर्जा क्षेत्र में सीनियर एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं.
- बेटा (निशांत प्रधान): निशांत प्रधान भी अपनी उच्च शिक्षा के सिलसिले में विदेश (यूएसए) से जुड़े रहे हैं.
शैक्षणिक यात्राः धर्मेंद्र प्रधान की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पूरी तरह से ओडिशा के स्थानीय और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में संपन्न हुई.
- स्कूली और कॉलेज शिक्षा: उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा ओडिशा के अंगुल जिले में स्थित तालचेर कॉलेज से पूरी की. कॉलेज स्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ओडिशा के सबसे प्रसिद्ध उत्कल विश्वविद्यालय (वाणी विहार, भुवनेश्वर) में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री हासिल की. मानव विज्ञान की इस पृष्ठभूमि ने उन्हें जमीनी स्तर पर सामाजिक संरचनाओं और जनजातीय समुदायों के व्यवहार को समझने में काफी मदद की.
छात्र नेता से केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक का सफर- धर्मेंद्र प्रधान ने कभी भी अपनी पार्टी नहीं बदली. वे अपने राजनीतिक जीवन के पहले दिन से ही दक्षिणपंथी विचारधारा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जुड़े रहे हैं.
- शुरुआत (1983-1995): उन्होंने वर्ष 1983 में तालचेर कॉलेज में एक उच्च माध्यमिक छात्र के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में छात्र राजनीति की शुरुआत की थी. वर्ष 1985 में वे तालचेर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए. उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें 1993 में एबीवीपी का ओडिशा राज्य सचिव और 1995 में राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया.
- मुख्य धारा की राजनीति में प्रवेश (1998-2000): छात्र संगठन से निकलने के बाद वे आधिकारिक तौर पर 1998 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए. इसके बाद उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं.
- विधायक से सांसद (2000-2004): चुनावी राजनीति में उनकी पहली बड़ी सफलता वर्ष 2000 में मिली, जब वे ओडिशा के पल्लाहड़ा निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा सदस्य (MLA) चुने गए. इसके बाद, वर्ष 2004 के आम चुनावों में वे ओडिशा की देवगढ़ लोकसभा सीट से जीतकर पहली बार 14वीं लोकसभा के सदस्य (MP) बने.
- संगठन में कद और राज्यसभा का सफर (2010-2018): हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व (विशेषकर अमित शाह और पीएम मोदी) के साथ उनके मजबूत रणनीतिक संबंधों के कारण संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया. 2010 में वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बने. इसके बाद पार्टी ने उन्हें संसद में बनाए रखने के लिए 2012 में बिहार से राज्यसभा भेजा और बाद में 2018 में वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए.
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कैबिनेट मंत्री के रूप में विभागों का सफर (2014-वर्तमान)
- 2014-2021: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014) में उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) सौंपा गया, जिसे बाद में कैबिनेट रैंक में अपग्रेड किया गया. उनके कार्यकाल में ग्रामीण महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ को भाजपा की एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक सफलता माना गया.
- 2019-2021: दूसरे कार्यकाल में पेट्रोलियम के साथ-साथ उन्हें इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया.
- 2021-2024: जुलाई 2021 में एक बड़े फेरबदल के दौरान उन्हें देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री नियुक्त किया गया. उनके इस कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के जमीनी कार्यान्वयन पर जोर दिया गया.
- 2024-वर्तमान: 2024 के लोकसभा चुनाव में संबलपुर सीट से शानदार जीत दर्ज करने के बाद उन्हें लगातार दूसरी बार तीसरे मोदी मंत्रिमंडल में भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में बरकरार रखा गया है.
आय के स्रोत और कुल संपत्ति का लेखा-जोखा
धर्मेंद्र प्रधान द्वारा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को दिए गए आधिकारिक हलफनामे (Affidavit) के अनुसार, उनकी वित्तीय स्थिति और आय का विवरण इस प्रकार है.
- कुल घोषित संपत्ति: धर्मेंद्र प्रधान और उनके परिवार (पत्नी सहित) की कुल चल और अचल संपत्ति लगभग 6.92 करोड़ है.
- आय के मुख्य स्रोत: उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी आय के मुख्य स्रोतों में सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में मिलने वाला वेतन, कृषि गतिविधियों से होने वाली आय, बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज और घरेलू संपत्ति से मिलने वाला किराया शामिल है. उनकी पत्नी की आय का जरिया उनके व्यवसाय और ट्रस्ट से जुड़े मानदेय हैं.
- अचल संपत्ति: उनके पास लगभग 2.30 करोड़ की अचल संपत्ति (कृषि भूमि, आवासीय भवन/फ्लैट) है, जिसमें भुवनेश्वर और दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्से शामिल हैं.
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बैंक जमा और एफडी: विभिन्न बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और पीपीएफ में करीब 1.80 करोड़ जमा हैं.
- म्यूचुअल फंड और निवेश: शेयर बाजार में सीधे निवेश या इक्विटी शेयरों के बजाय वे सुरक्षित निवेश पसंद करते हैं. म्यूचुअल फंड में उनका निवेश करीब 80.4 लाख है.
- बीमा पॉलिसियां: विभिन्न जीवन बीमा और सरकारी सुरक्षा बांड्स में 67.7 लाख का निवेश है.
- वाहनों का विवरण: उनके और परिवार के नाम पर वाहनों की कुल कीमत लगभग 68.5 लाख घोषित की गई है.
- सोना और आभूषण (Gold & Silver): परिवार के पास लगभग 48.5 लाख मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण हैं.
- वित्तीय देनदारियां: हलफनामे के अनुसार उन पर और उनके परिवार पर लगभग 53.4 लाख का बैंक ऋण या वित्तीय दायित्व भी बकाया है.
भौगोलिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक कर्मभूमि
धर्मेंद्र प्रधान मूल रूप से पूर्वी भारत के तटीय राज्य ओडिशा के रहने वाले हैं और वर्तमान में यही राज्य उनकी मुख्य राजनीतिक कर्मभूमि है.
- मूल निवास और जन्मस्थान: उनका जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के अनुगुल (Angul) जिले के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख औद्योगिक और कोयला खनन क्षेत्र तालचेर (Talcher) में हुआ था. उनका स्थायी पारिवारिक आवास भी भुवनेश्वर के प्राची एन्क्लेव और तालचेर में स्थित है.
राजनीतिक कर्मभूमि का विस्तार
- ओडिशा (शुरुआती दौर): उनका प्रारंभिक राजनीतिक आधार अंगुल, देवगढ़ और पल्लाहड़ा रहा, जहां से उन्होंने क्रमशः विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीते. ओडिशा में नवीन पटनायक के लंबे शासनकाल के दौरान राज्य में भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में खड़ा करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में धर्मेंद्र प्रधान की केंद्रीय भूमिका रही है.
- बिहार और मध्य प्रदेश (मध्यम दौर): जब वे ओडिशा से लोकसभा चुनाव हार गए, तब पार्टी आलाकमान ने उनकी राष्ट्रीय उपयोगिता को देखते हुए उन्हें क्रमश: बिहार (2012) और मध्य प्रदेश (2018) से राज्यसभा भेजा. इस प्रकार करीब 12 वर्षों तक हिंदी पट्टी के ये दोनों राज्य भी अप्रत्यक्ष रूप से उनकी संसदीय कर्मभूमि बने रहे, जहां उन्होंने सांगठनिक प्रभारी के रूप में पार्टी के लिए कई चुनाव जिताने वाली रणनीतियां तैयार कीं.
- संबलपुर (वर्तमान गढ़): वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में, वे राज्यसभा के सुरक्षित रास्ते को छोड़कर पुनः ओडिशा की चुनावी राजनीति में उतरे और उन्होंने संबलपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा. इस चुनाव में शानदार जीत दर्ज कर उन्होंने साबित किया कि ओडिशा की जनता के बीच उनका आधार बेहद मजबूत है और इसी जीत के इनाम के तौर पर वे आज नई दिल्ली के नीतिगत गलियारों में देश के शिक्षा ढांचे को नियंत्रित कर रहे हैं.
