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गाजा नरसंहार: गाजा नरसंहार में काफी लंबे समय से मोदी सरकार की चुप्पी पर सोनिया गांधी ने निशाना साधा है. उन्होंने शनिवार को कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि गाजा में किए जा रहे नरसंहार पर सरकार की पत्थर जैसी चुप्पी और कोई कार्रवाई न करना नैतिक रूप से गलत है. साथ ही यह राष्ट्रीय हित के नजरिए से भी समझ से परे है. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि भारत ने फिलिस्तीन, ईरान और पूरे मध्य पूर्व में अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बना ली है. इसके अलावा भारत वैश्विक जनमत से भी अलग-थलग पड़ गया है और पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने का मौका लपक लिया.
मजमूलों के लिए आवाज उठानी चाहिए
अंग्रेजी दैनिक अखबार में लिखे अपने लेख सोनिया ने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद की भावना यह मांग करती है कि भारत ने उन मजलूमों के लिए आवाज उठाए, जिनको बेरहमी से मार दिया गया. साथ ही राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए इस नरसंहार पर भारत सरकार को अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए और इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज उठाई जानी चाहिए. सोनिया गांधी की तरफ से पश्चिम एशिया संकट पर ये चौथा लेख है. इससे पहले उन्होंने मार्च में ईरान युद्ध पर एक आर्टिकल लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेटेड हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटना है.
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फिलिस्तीनियों को बेघर कर दिया गया
पश्चिम एशिया संकट से पीछे हटना भारत की विदेशी नीति का हिस्सा नहीं और यह देश की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है. कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद की भावना यह मांग करती है कि इजरायली शासन की नरसंहार जैसी कार्रवाईयों और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लाखों फिलिस्तीनी परिवारों को बेरहमी से बेघर करने और उनकी जमीन को छीनने के खिलाफ बनी वैश्विक जन-राय पर प्रतिक्रिया दें.
94 पेज की यह रिपोर्ट दिल दहला दिया
सोनिया ने गाजा पर भारत चुप है और इस मुद्दे पर दुनिया बोल रही है वाले शीर्षक में लिखा कि सितंबर 2025 में यूएन ‘ऑक्यूपाइड पैलेस्टीनियन टेरिटरी’ पर बनी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि इजरायल गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार कर रहा है. वहीं, 94 पेज की यह रिपोर्ट दिल दहला देने वाली है. इसमें गाजा में इजरायल द्वारा की गई तबाही और उसके कामों के पीछे नरसंहार के मंशा के बारे में भयानक जानकारी दी गई है. इस नरसंहार में 20 हजार बच्चे मारे गए हैं और 44 हजार गंभीर रूप से घायल हुए हैं. साथ ही कई बच्चे तो जीवन भर के लिए अपंग हो गए हैं.
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