Home Latest News & Updates कश्मीरी पंडितों ने मनाई धूमधाम से ज्येष्ठ अष्टमी

कश्मीरी पंडितों ने मनाई धूमधाम से ज्येष्ठ अष्टमी

by Live India
Kashmiri migrant pandits celebrate Jyeshtha Ashtami Jammu

जम्मू एवं कश्मीर समाचार: कश्मीरी पंडित समुदाय ने सोमवार को अपने सबसे पवित्र त्योहारों में से एक ‘ज्येष्ठ अष्टमी’ को धूमधाम से मनाया. इस खास मौके पर जम्मू के जानीपुर इलाके में स्थित खीर भवानी पीठ में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं दर्शन करने पहुंचे. यह मंदिर मुख्य रूप से मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुल्ला में स्थित माता खीर भवानी के पवित्र मंदिर की ही एक प्रतिकृति माना जाता है. यहां पर दर्शन करने के लिए भक्तों का सुबह से ही तांता लगा रहा. बताया जा रहा है कि सुबह तीन बजे यहां पहली आरती हुई, जिसके साथ ही दिन भर चलने वाली धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई. इन कार्यक्रम में विशेष पूजा, हवन और भवन-कीर्तन शामिल है.

भवानी पीठ बना आस्था का केंद्र

1990 के दशक की शुरुआत में उग्रवाद के कारण घाटी से कश्मीरी पंडितों के बड़े पैमाने पर पलायन के बाद जानीपुर में खीर भवानी पीठ का निर्माण किया गया था. समुदाय की कोशिशों से बना यह मंदिर, अब विस्थापित कश्मीर समुदाय के लिए आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र बन गया है. इससे भक्त अपनी पुश्तैनी जमीन से दूर होने के बाद भी माता खीर भवानी से जुड़ी पुरानी परंपराओं को निभाते हैं.

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लोगों के लिए बना आध्यात्मिकता का जरिया

भक्तों का कहना है कि यह मंदिर उन लोगों के लिए बहुत खास है जो कश्मीर में मौजूद असली मंदिर तक नहीं जा पाते हैं. कई लोगों ने इसे अपनी जड़ों से जुड़ा एक आध्यात्मिक जरिया और देवी का आशीर्वाद पाने की जगह बताया. वहीं, जम्मू शहर के बोहरी इलाके से एक श्रद्धालु ने समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए कहा कि हर कोई कश्मीर की यात्रा नहीं कर सकता और यह मंदिर हमारे लिए उस कमी को पूरा करता है.

त्योहार के माध्यम से श्रद्धालु लौट पाते हैं पुश्तैनी घर

उन्होंने कहा कि भक्त अपने परिवारों की सेहत और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं. साथ ही पुश्तैनी जमीन पर लौट सकेंगे और कश्मीर में असली मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे. मंदिर प्रबंधन ने बताया कि सालाना उत्सव के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे. इस मंदिर में भक्त पारंपरिक मिश्री, दूध, फूल और अगरबत्ती का चढ़ावा चढ़ाते हैं. उत्सव के तौर पर 20 हजार से ज्यादा दीये भी तैयार किए जाते हैं और भक्त इन्हें अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए लगाते हैं.

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