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गरीबों की पहचान के लिए पहली बार गिनती

by Live India
जम्मू-कश्मीर में गरीबों की पहचान के लिए पहली बार घरों की गिनतीः स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर उठाने को प्रशासन का ऐतिहासिक कदम

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घरेलू गणना: जम्मू-कश्मीर में गरीब परिवारों की पहचान करने के लिए पहली बार घरों की गिनती (household enumeration) होगी. इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 पैमानों पर पिछड़े परिवारों की पहचान करके उन तक सटीक सरकारी योजनाएं पहुंचाना है. यह सामान्य जनगणना से अलग है और इसका पूरा फोकस केवल गरीब परिवारों का एक सटीक डेटाबेस तैयार करने पर है ताकि कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जा सके. जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने योजना, विकास और निगरानी विभाग (PD&MD) की एक बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक का मकसद जम्मू-कश्मीर में बहुआयामी रूप से गरीब परिवारों की प्रस्तावित घर-घर गिनती का प्रत्यक्ष जायजा लेना था.

न छूटे कोई भी जरूरतमंद परिवार

बहुआयामी रूप से गरीब परिवार वे हैं जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मामले में अभावों का सामना कर रहे हैं. बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रस्तावित घर-घर गिनती विकास यात्रा का अगला तार्किक कदम है. उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद उन वास्तविक परिवारों की पहचान करना है जो कई तरह के अभावों का सामना कर रहे हैं. इसका उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से मान्य और तकनीक-सक्षम डेटाबेस बनाना है, जो सरकारी विभागों को अधिक सटीकता के साथ कल्याणकारी लाभ पहुंचाने, विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पीछे न छूटे.

वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है प्रस्ताव

डुल्लू ने कहा कि प्रस्तावित कवायद डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में पहला कदम है. यह जम्मू-कश्मीर में अभाव वाले क्षेत्रों की पहचान करने और उन्हें दूर करने के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेगा. उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों से कहा कि वे प्लानिंग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर ह्यूमन रिसोर्स की ज़रूरतों का पता लगाएं. मुख्य सचिव ने डिपार्टमेंट को इन रिसोर्स के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि जनगणना के दो चरणों (जिसमें J-K की खानाबदोश आबादी भी शामिल है) के पूरा होने के बाद यह काम शुरू किया जा सके. प्लानिंग, डेवलपमेंट और मॉनिटरिंग डिपार्टमेंट की कमिश्नर सेक्रेटरी आर. एलिस वाज़ ने स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मामले में कई तरह की कमियों का सामना कर रहे परिवारों की पहचान करने के लिए वैज्ञानिक रूप से तैयार प्रस्ताव पेश किया.

शुरू में अंत्योदय अन्न योजना वाले परिवार होंगे शामिल

वाज़ ने कहा कि यह प्रस्ताव नीति आयोग द्वारा यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) के सहयोग से तैयार किए गए नेशनल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) ढांचे पर आधारित है, जिसे J-K में गरीब परिवारों की पहचान के लिए अपनाया गया है. कहा कि शुरू में सरकारी डेटाबेस में पहले से मौजूद सबसे कमज़ोर वर्गों और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) वाले परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिसमें J-K के सभी 20 ज़िलों में लगभग 2.19 लाख लाभार्थी परिवार शामिल होंगे.

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित तरीका राष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले MPI फ्रेमवर्क का पालन करता है. इसमें 12 तय किए गए पैमानों के ज़रिए स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे तीन पहलुओं पर हर घर का आकलन किया जाएगा. इन पैमानों में पोषण, बच्चों और किशोरों की मृत्यु दर, मां का स्वास्थ्य, स्कूल में बिताए साल, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, साफ़-सफ़ाई, पीने का पानी, बिजली, घर, घर की संपत्ति और वित्तीय समावेश शामिल हैं.

डिजिटल ऐप के जरिए होगी गिनती

प्रवक्ता ने कहा कि एक डिजिटल ऐप के ज़रिए वैज्ञानिक रूप से तय वेटेज वाला ‘वंचित होने का स्कोर’ अपने आप तैयार हो जाएगा. जो घर तय सीमा से ज़्यादा वंचित पाए जाएंगे, उन्हें ‘बहु-आयामी रूप से ग़रीब’ माना जाएगा. उन्होंने कहा कि पूरी तरह से आकलन करने के लिए दो व्यवस्थित डिजिटल शेड्यूल का प्रस्ताव दिया गया है. उन्होंने बताया कि पहले शेड्यूल में MPI स्कोर की ऑटोमैटिक गणना के लिए ज़रूरी घर की जानकारी इकट्ठा की जाएगी. वहीं, दूसरा शेड्यूल सिर्फ़ उन घरों के लिए होगा जिन्हें ‘बहु-आयामी रूप से ग़रीब’ माना गया है. इसमें वंचित होने के कारण, सरकारी योजनाओं तक पहुंच में कमी, जागरूकता का स्तर और परिवारों को फ़ायदा उठाने से रोकने वाली रुकावटों की जानकारी ली जाएगी.

योजना बनाने में सरकार को मिलेगी मदद

प्रवक्ता ने कहा कि इससे मिलने वाली जानकारी विभागों को ज़िले और परिवार की खास ज़रूरतों के आधार पर लक्षित उपाय तैयार करने में मदद करेगी. प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया से तैयार होने वाला परिवारों का डेटाबेस सरकार के लिए फ़ैसले लेने में मदद करने वाला एक मज़बूत सिस्टम बनेगा. इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पीने का पानी, साफ़-सफ़ाई, स्वच्छ ऊर्जा, वित्तीय समावेशन, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को एक साथ लाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी मज़बूत होगी और सबूतों पर आधारित ज़िला योजना बनाने में मदद मिलेगी.

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