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जानें मई में कब-कब रखना है प्रदोष व्रत

by Live India
May Pradosh Vrat

May Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यहां जानें मई के महीने में प्रदोष व्रत कब-कब है.

28 अप्रैल, 2026

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है. हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं. एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है और इसके लिए विशेष मुहूर्त होता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. चलिए जानते हैं मई के महीने में प्रदोष व्रत कब-कब है और व्रत के जरूरी नियम क्या हैं.

प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत 14 मई को है और दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई को है. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगी. वहीं, तिथि का समापन 15 मई को सुबह 08 बजकर 31 मिनट पर होगा. ऐसे में 14 मई को प्रदोष किया जाएगा. इस दिन शिव पूजा का समय शाम 07 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक है.

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 मई को सुबह 07 बजकर 56 मिनट पर होगी. वहीं, तिथि का समापन 29 मई को सुबह 09 बजकर 50 मिनट पर होगा. ऐसे में 28 मई को प्रदोष किया जाएगा. इस दिन शिव पूजा का समय शाम 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 15 मिनट तक है.

प्रदोष व्रत के नियम

  • प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, तभी व्रत को पूर्ण माना जाता है.
  • घर में और खासकर मंदिर में साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए.
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए. भूलकर भी लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • इसके अलावा प्रदोष व्रत के दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए.
  • सभी का सम्मान करना चाहिए और गुस्सा करने से बचना चाहिए.
  • मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन और जरूरत की चीजों का दान करना चाहिए.
  • पूजा के दौरान कथा और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए.

पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा शाम में होती है. इस दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. शाम को शिवलिंग पर दूध, दही, गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद महादेव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें. अब शिव चालीसा , कथा या मंत्र जाप करें. आखिर आरती करके प्रसाद ग्रहण करें.

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