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दार्जिलिंग में भारी बारिश से टूटा पुल

by Live India
दार्जिलिंग में भारी बारिश से उफान पर बालासन नदी, टूटा पुल, हजारों लोग रास्ते में फंसे, जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित

भारी वर्षा: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में शुक्रवार को भारी बारिश से बालासन नदी पर बना पुल टूटकर बह गया. जिससे सिलीगुड़ी और मिरिक शहरों के बीच संपर्क टूट गया. दोनों तरफ से आवागमन बंद हो गया और हजारों लोग फंसे गए. उफान पर चल रही बालासन नदी पर बने एक पुल को भारी बारिश से नुकसान पहुंचा, जिससे सिलीगुड़ी और मिरिक सब-डिविज़न के बीच गाड़ियों की आवाजाही बंद हो गई. अक्टूबर 2025 में दुधिया लोहे के पुल के ढहने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ह्यूम पाइप वाला पुल बनाया गया था.

सांसद ने घटनास्थल का किया दौरा

एक अधिकारी ने कहा कि लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से दुधिया में बना ह्यूम पाइप पुल ढह गया. उन्होंने बताया कि गाड़ियों की आवाजाही को पंखाबाड़ी और कर्सियांग होते हुए वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट कर दिया गया है. दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा ने घटनास्थल का दौरा किया और ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया. उन्होंने इस इलाके में बार-बार आवागमन की समस्या के लिए पिछली ममता बनर्जी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया. बीजेपी सांसद ने कहा कि लोहे का पुल गिरने के बाद TMC सरकार कोई पक्का ढांचा नहीं बना पाई. जो अस्थायी पुल बनाया गया था, वह ठीक से नहीं बना था और भारी बारिश में ऐसी दिक्कतें आना तय था.

बिना बांध के पुल बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं

कहा कि अगर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन या सेना की मदद से बेली ब्रिज बनाया गया होता, तो यह एक मज़बूत और टिकाऊ समाधान होता. बिस्टा ने बताया कि पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) एक पक्के पुल के प्रोजेक्ट के लिए अप्रोच रोड और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है. उन्होंने कहा कि बिना बांध के पुल बनाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि बांध के लिए एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट पहले ही तैयार करके टेक्निकल रिव्यू के लिए जादवपुर यूनिवर्सिटी भेजी जा चुकी है. मॉनसून का मौसम खत्म होने के बाद बांध का काम शुरू हो जाएगा. यही इस समस्या का एकमात्र दीर्घकालिक समाधान है.

नया पुल भी खतरे में

एक और अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने बालासन नदी पर दो लेन वाला पुल बनाने के लिए 51 करोड़ रुपये से ज्यादा मंज़ूर किए हैं और इसका काम चल रहा है. इस बीच, सेंट्रल वॉटर कमीशन ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में अचानक आई बाढ़ में पुराना दूधिया पुल बह गया था. नदी के तेज़ बहाव और लगातार हो रहे कटाव के कारण उसी जगह पर बन रहा नया पुल (मिरीक रूट पर) भी खतरे में है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक मरम्मत का काम नहीं हो जाता, तब तक पुल के ढहने से इलाके में रोज़ाना आने-जाने और ज़रूरी सामान के ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ेगा.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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