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- धौलपुर से हेमंत सिकरवार की रिपोर्ट
इंडियन स्कीमर पक्षी: राजस्थान के धौलपुर जिले की राष्ट्रीय चम्बल सेंचुरी संकटग्रस्त और दुर्लभ इंडियन स्कीमर (राइनचॉप्स एल्विकोलिस) के नन्हे मुन्ने चूजों की चहचहाहट से गुलजार हो गई है. आईयूसीएन की रेड बुक में शामिल और दुनियाभर में करीब तीन हजार की संख्या में बचे दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर के संरक्षण को लेकर सफल प्रयास किया गया है. क्योंकि पहली बार फेंसिंग के साए और घोसलों के लिए वालंटियर की तैनाती के बीच 164 अंडों में से 116 इंडियन स्कीमर के बच्चे निकलकर आए हैं, जो इनके संरक्षण में अच्छी खबर है.
डॉक्टरों के प्रयास से मिली सफलता
धौलपुर जिले से होकर गुजर रही चंबल किनारे 47 सफल तीन साइट्स पर कुल घोंसलों को धौलपुर वन विभाग के डीएफओ वन्यजीव डॉ.आशीष व्यास ने बीएनएचएस की डॉ.परवीन शेख के सहयोग से अपनी निगरानी में लिया और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं. बता दें, कि हर साल चंबल के टापुओं पर खुले में इनके घोंसले मवेशियों के पैरों से कुचलकर नष्ट हो जाते रहे हैं या फिर सुरक्षा के अभाव में जंगली जानवर अंडे खा जाते थे. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है और चंबल नदी के किनारे दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर की चहचहाहट से गूंज रहे हैं. इंडियन स्किमर के संरक्षण को लेकर डीएफओ (वन्यजीव) डॉ.आशीष व्यास, बीएनएचएस की डॉ.परवीन शेख और क्षेत्रीय वन अधिकारी वन्यजीव दीपक मीणा ने इस कार्य के सफल क्रियान्वयन में बेहतर कार्य किया है.

उड़ना सीख रहे चूजे
क्षेत्रीय वन अधिकारी वन्यजीव धौलपुर दीपक मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय चम्बल अभ्यारण सेंचुरी धौलपुर द्वारा चम्बल नदी में दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर (पनचीरा) के संरक्षण का कार्य किया. इनके संरक्षण को लेकर फरवरी माह में चम्बल नदी के टापुओं का सर्वे किया कि यह पक्षी कहां कहां नेस्ट कर रहे हैं. इनके संरक्षण के लिए बीएनएचएस की वैज्ञानिक डॉ.परवीन शेख से सहयोग से लिया. चम्बल के तिघरा, गुड़ा और नगर शब्दा जैसे प्रमुख नेस्टिंग स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर उन्हें बाड़ेबंदी कर सुरक्षित किया गया. क्योंकि अंडो को सियार, श्वान और मवेशियों से खतरा बना रहता है. तीनों साइट्स पर कुल 47 घोसलों में 2 से 4 अंडों का क्लच साइज मिला. अब सौ से अधिक अंडो में से इंडियन स्कीमर के चूजे निकले और अब यह उड़ना सीख रहे हैं. अब आगे इसे बड़े लेवल पर किया जाएगा. यह दुर्लभ पक्षी कम होता जा रहा है, इसे बचा सकें और संरक्षित कर सकें.
दुनिया में तीन हजार बचे इंडियन स्कीमर
बीएनएचएस की वैज्ञानिक डॉ.परवीन शेख ने बताया कि इंडियन स्कीमर (पनचीरा) आईयूसीएन की रेड बुक में शामिल है और इनकी संख्या घट रही है. दुनियाभर में करीब तीन हजार की संख्या में बचे हैं और चम्बल नदी में दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर की संख्या करीब एक हजार है. चम्बल नदी इनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं और यहां पर यह गर्मी के दिनों में प्रजनन करते हैं. दिसंबर में यह आ जाते हैं और गर्मी में अंडे देते हैं. अंडों में से बच्चे निकलने के बाद, जब बच्चे उड़ने लायक हो जाते हैं तो यह यहां से माइग्रेट कर जाते हैं. इस समय अंडों में से बच्चे निकल आये हैं और अपने माता पिता के साथ उड़ना सीख रहे हैं. उन्होंने बताया कि इनके संरक्षण को लेकर बीएनएचएस और धौलपुर वन विभाग वन्यजीव के साथ तीन साइटों में से सौ से ज्यादा बच्चे हैच हुए हैं. उन्होंने बताया कि अन्य पक्षी घोसला बना कर अंडे देते हैं, लेकिन इंडियन स्कीमर नदी के बीच में टापू पर अंडे देते हैं और रेत के ऊपर अंडे देती है. इन अंडों को सियार, श्वान और अन्य वन्यजीव खा जाते हैं और मवेशियों के पैरों से कुचल जाते हैं. इनके अंडों को बचाने के लिए धौलपुर वन विभाग वन्यजीव के साथ फेंसिंग के साए और घोसलों के लिए वालंटियर की तैनाती कर अंडों की सफल हैचिंग की है.
चंबल नदी में डेरा डालते हैं इंडियन स्कीमर
बता दें कि इंडियन स्कीमर अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी है, जिसे आईयूसीएन रेड बुक में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है. यह पक्षी रेतीले नदी किनारों और टापुओं पर अंडे देता है. यह अन्य पक्षियों की तरह घास के घोसला नहीं बनाते हैं. इंडियन स्किमर नदी तटीय क्षेत्र इलाके में प्रवास करता है. लेकिन नदियों में लगातर बन रहे बांध से इनके आवास कम हो रहे हैं. इंडियन स्किमर साफ और मीठे पानी वाली नदियों के तटों पर रहते हैं. चंबल नदी पर भारी संख्या में इंडियन स्कीमर डेरा डालते हैं. देशी भाषा में पनचीरा के नाम से जाना जाता है. इंडियन स्कीमर की चोंच उसके शरीर का सबसे आकर्षक भाग होती है. इसकी चोंच लम्बी, मोटी, गहरी नारंगी और सिरे से हल्के पीले रंग की होती है और यह नदी में पानी को चीर कर अपना शिकार बनाते हैं. जिस कारण इसका नाम पनचीरा पड़ गया.
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