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ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी दौरे पर हैं. ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद उनकी अमेरिका की यह पहली यात्रा है. वहीं, पश्चिम एशिया में इस संघर्ष के बाद पहली बार बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के साथ मीटिंग होने जा रही है. इसपर पूरी दुनिया की निगाहें हैं.
बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला बोल दिया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई थी. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया था.
हालांकि, बीते महीने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों का अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ. उसके बाद बीते दिनों एक बार फिर से ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष व हमले शुरू हो गए थे. लेकिन, लगातार 13 रात हमले के बाद एक बार फिर से दोनों देश शांति की बात करते हुए अंतरिम समझौते की ओर बढ़ रहे हैं.
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा पर सभी की नजरें हैं. ईरान के साथ युद्ध समेत लेबनान, गाजा, इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध व अन्य मुद्दों पर ट्रंप के साथ चर्चा हो सकती है. उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम एशिया समेत लेबनान और अन्य जगहों पर जारी संघर्ष को लेकर कुछ बड़े ऐलान हो सकते हैं. जानकार बताते हैं कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से नेतन्याहू की ट्रंप के साथ पहली मुलाकात तनाव को कम करने का एक बड़ा मौका है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

मैंने ट्रंप का पूरा समर्थन किया- नेतन्याहू
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी अमेरिकी यात्रा से पहले अमेरिका के एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार दिया था. इसमें उन्होंने बताया था कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए क्या करना होगा. नेतन्याहू ने ईरान को लेकर कहा, “मुझे लगता है कि जब यह सरकार (ईरानी सरकार) या तो गिर जाएगी या इतनी कमजोर हो जाएगी कि उसे पता चल जाए कि उसे अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना है और अपना रास्ता बदलना है.”
उन्होंने आगे कहा, “असल में राष्ट्रपति ट्रंप यही हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. और मैंने उनका पूरा समर्थन किया… लेकिन किसी न किसी तरह, उन्हें अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना ही होगा. और डील हो या न हो, इसे खत्म होना ही है.”
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ईरान सबसे अहम मुद्दा- इजरायली पीएम
अमेरिका की अपनी यात्रा से पहले पीएम नेतन्याहू ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने कहा, “मैं अब अपने मित्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए रवाना हो रहा हूं. उनके दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद से यह हमारी आठवीं मुलाकात है, जो किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय नेता से अधिक है. यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है, और साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी भी.”
उन्होंने आगे कहा, “इस मुलाकात में, हम सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें ईरान सबसे अहम है. हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उसकी शक्ति को मजबूत करना और हमारे चारों ओर शांति का दायरा बढ़ाना. मैं इजरायल की सुरक्षा, शक्ति और भविष्य सुनिश्चित करने की गहरी प्रतिबद्धता के साथ इस मिशन पर निकल रहा हूं.”
नेतन्याहू ने कहा, “इस यात्रा के दौरान, मैं अपने और इजरायल के सच्चे मित्र, सीनेटर लिंडसे ग्राहम को अंतिम श्रद्धांजलि भी अर्पित करूंगा—जो इजरायल के सर्वकालिक महान मित्रों में से एक हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसा करके, मैं सभी इजरायली नागरिकों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं.”

युद्ध के अलावा रिश्तों को सुधारने वाली भी बैठक
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक होने वाली है. ईरान के खिलाफ दोनों नेताओं के संयुक्त युद्ध शुरू करने के बाद यह पहली बैठक है. जानकार बताते हैं कि यह मुलाकात नेतन्याहू के लिए उनके रिश्तों में आई खटास को दूर करने का एक मौका भी है.
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, जो बैठक की जानकारी देने के लिए नाम न बताने की शर्त पर बोले, दोनों नेता इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्ध को लेकर लेबनान के साथ अमेरिका और इजरायल द्वारा हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क समझौते और अब्राहम समझौते के विस्तार पर भी चर्चा करने की योजना बना रहे हैं.
सोमवार को जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या ईरान के मामले में उनकी और इजरायली प्रधानमंत्री की राय एक जैसी है, तो उन्होंने कहा, “हमारे बीच थोड़ा मतभेद है.” “लेकिन हां, हम काफी हद तक एकमत हैं.” इससे पहले भी ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आए हैं.

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नेतन्याहू को तेहरान से डील के लिए किया किनारा
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में नेतन्याहू के साथ ट्रंप के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, लेकिन पिछले साल व्हाइट हाउस में उनकी वापसी के बाद, उनका गठबंधन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत लग रहा था. जब उन्होंने फरवरी में मिलकर युद्ध शुरू किया, तो वे एक साथ थे और अपनी-अपनी सेनाओं के तालमेल से ईरान की लीडरशिप को खत्म करने और पश्चिम के साथ बेहतर संबंध रखने वाली सरकार के लिए रास्ता बनाने की बात कर रहे थे.
लेकिन जैसे-जैसे ईरान ने पलटवार किया — खाड़ी देशों के शहरों में अमेरिकी ठिकानों और ऊंची इमारतों पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता रोक दिया — ट्रंप पर देश के अंदर और क्षेत्र में अपने सहयोगियों की ओर से इस संघर्ष को खत्म करने का भारी दबाव पड़ा.
तब से, नेतन्याहू — जो ईरान और लेबनान में उसके सहयोगी हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई जारी रखना चाहते थे — को किनारे कर दिया गया क्योंकि ट्रंप तेहरान के साथ समझौता करना चाहते थे.
इस हफ्ते उनका व्हाइट हाउस का दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान में युद्ध और अन्य मुद्दों पर ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं.
इजरायली पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अमित सेगल ने सोमवार को दैनिक समाचार पत्र ‘इजरायल हायोम’ में लिखा, “अमेरिकी इजरायलियों को यह साफ कर रहे हैं कि युद्ध वही चला रहे हैं.” “यह सभी के लिए स्पष्ट है कि इजरायल को पीछे कर दिया गया है.” नेतन्याहू का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित है.
ईरान को परमाणु कार्यक्रम खत्म करना ही होगा- नेतन्याहू
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ने के साथ, नेतन्याहू की योजना है कि वे तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में इजरायली इंटेलिजेंस की जानकारी ट्रंप के साथ साझा करें. यह जानकारी नेतन्याहू की यात्रा से जुड़े एक व्यक्ति ने दी, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं थी.
एक अमेरिकी न्यूज चैनल के शो में मारिया बार्टिरोमो के साथ बातचीत में, नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे ट्रंप के साथ बैठकर यह जान पाएंगे कि ईरान के बारे में उनके मन में क्या योजना है.
नेतन्याहू ने कहा, “क्योंकि मुझे लगता है कि कई मायनों में, आगे कैसे बढ़ना है, यह उनका फैसला है. अगर वे भारी सैन्य संघर्ष में पड़े बिना ऐसा कर सकते हैं, तो यह अच्छी बात है. क्यों नहीं?”
उन्होंने ईरान के बारे में कहा, “लेकिन किसी न किसी तरह, उन्हें अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना ही होगा.”
नेतन्याहू ने इस इंटरव्यू का इस्तेमाल ईरान को अपने देश पर हमला न करने की चेतावनी देने के लिए भी किया और कहा कि इजरायल का जवाब “बहुत जबरदस्त” होगा.

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गाजा और लेबनान में इजरायली हमले से ट्रंप की डील में अड़चन?
अमेरिकी दौरे के दौरान ट्रंप के साथ मीटिंग में नेतन्याहू को एक मौका दिख रहा है, लेकिन उन्हें ट्रंप को यह भी समझाना होगा कि वह गाजा और लेबनान में अमेरिका की कूटनीतिक और पुनर्निर्माण की कोशिशों में कोई अड़चन नहीं डालेंगे. इन जगहों पर राष्ट्रपति (ट्रंप) पहले भी शिकायत कर चुके हैं कि इजरायली हमलों में बहुत से लोग मारे जा रहे हैं.
इजरायल ने हाल ही में इन दोनों जगहों पर कुछ कदम उठाए हैं. लेबनान में, जहां इजरायली सेना का दक्षिणी हिस्से के बड़े इलाके पर कब्जा है, इजरायल ने लेबनानी सेना को कुछ गांवों में तैनात होने की इजाजत देने पर सहमति जताई है.
यह एक “पायलट प्रोग्राम” का हिस्सा है, जिसमें उन इलाकों को सुरक्षित करने की लेबनानी सेना की क्षमता को परखा जाएगा जहां कभी हिज्बुल्लाह सक्रिय था.
अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को कहा कि इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत का अगला दौर अगले हफ्ते रोम में होगा, जिसमें इस प्रोग्राम को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा.
गाजा के मामले में, इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने रविवार को एक उपाय को मंजूरी दी. सैद्धांतिक रूप से, इससे एक अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स (स्थिरता बनाए रखने वाली सेना) के शुरुआती सदस्यों को प्रवेश मिल सकेगा. इस फोर्स का जिक्र पिछले साल इजरायल और हमास के बीच अमेरिका समर्थित युद्धविराम समझौते में किया गया था.
हालांकि, बहुत कम देशों ने इस फोर्स के लिए सैनिक भेजने का वादा किया है, और इजरायल हर मामले को अलग-अलग देखकर ही उन्हें गाजा में प्रवेश की मंजूरी देगा. इन सैनिकों — जिनमें मोरक्को और युगांडा के सैनिक भी शामिल होंगे — को केवल दक्षिण में रफाह के एक छोटे, सुनसान इलाके में काम करने की इजाजत होगी. इस इलाके में कुछ विस्थापित फिलिस्तीनियों की जांच-पड़ताल करने और उन्हें ठहराने की योजना है.
इजरायली सेना लगातार हमले कर रही है; उसका कहना है कि ये हमले चरमपंथियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें आम नागरिक भी मारे गए हैं.

इजरायल के लिए समर्थन में भारी कमी
अमेरिका में इजरायल को मिलने वाला दोनों पार्टियों का समर्थन काफी कम हो गया है, खासकर गाजा में उसके रवैये की वजह से. जून में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायली अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि दुनिया के नेताओं में ट्रंप ही उनके एकमात्र दोस्त हैं. इस योजना की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, वेंस के नेतन्याहू के साथ बैठक में शामिल होने की उम्मीद है; उस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बोलने की इजाजत नहीं थी और उसने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही.
इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित AP-NORC के एक सर्वे में पाया गया कि अमेरिकी वयस्कों के बीच इजरायल के लिए समर्थन में भारी कमी आई है. इजरायल के ‘मारिव’ अखबार के राजनीतिक कमेंटेटर बेन कैस्पिट ने लिखा, “हमने अमेरिका को खो दिया है. धन्यवाद, बीबी.”
अब इजरायल और अमेरिका के बीच रिश्ते को सुधारने के साथ दुनिया के कई मोर्चों पर जारी युद्ध को खत्म करने का मौका है. इसको देखते हुए वाशिंगटन में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की बैठक काफी अहम मानी जा रही है.
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