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West Bengal Election : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के बाद EC ने बड़ा एक्शन लिया. आयोग ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को हटा दिया. अब इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है.
पश्चिम बंगाल चुनाव: भारतीय निर्वाचन आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है. इसके साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और राज्य की विधानसभा का कार्यकाल मई में खत्म हो रहा है. पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे, जिसकी तारीख 23 और 29 अप्रैल तय की गई है. इसी बीच राज्य में सियासी पारा भी हाई हो गया है और सत्तारूढ़ पार्टी ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोमवार को EC द्वारा पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के फेरबदल को लेकर BJP की घबराहट भरी प्रतिक्रिया बताया.
कई वरिष्ठ अधिकारियों को बदला
TMC ने कहा कि विरोधी पार्टी को एहसास हो गया है कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से चुनाव नहीं जीत सकती है. वहीं, विपक्षी दल BJP और CPI(M) ने इस फेरबदल की सराहना करते हुए इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में एक अहम कदम बताया. पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा के बाद इलेक्शन कमीशन ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, DGP पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम को हटा दिया है. EC का कहना है कि राज्य में हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुडे़ कोई भी कार्य नहीं सौंपे जाएंगे. चुनाव आयोग की तरफ से यह फैसला इलेक्शन की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है.
ममता बनर्जी को कमजोर नहीं कर पाई
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि चोर दरवाजे वाली रजनीति के बाद भी बीजेपी पश्चिम बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच रिश्ते को कमजोर नहीं कर पाई. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार भले ही राज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारियों को बदल दें, लेकिन उसके पास पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को बदलने की ताकत नहीं है. उन्होंने बीजेपी पर भी ये आरोप लगाया कि वह EC का इस्तेमाल अपने खुद के विंग के तौर पर कर रही है, ताकि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को चेंज किया जा सके. उन्होंने आगे कहा कि आप लोग सबकुछ बदल सकते हैं लेकिन सीएम ममता बनर्जी को नहीं बदल पाएंगे.
पार्लियामेंट में भी उठाया मुद्दा
राज्य में वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को हटाने वाला मुद्दा TMC ने पार्लियामेंट में भी उठाया. टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इस मुद्दे को उठाया और कहा कि चुनाव आयोग ने देर रात पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को पद से हटा दिया. उन्होंने आगे कहा कि हमारी पार्टी इस फैसले का विरोध करती है और दिन भर के लिए सदन का बहिष्कार करने का फैसला करती है. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने TMC पर निशाना साधते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि संविधान में आयोग को अधिकार दिया गया है, जिसको सदन में उठाने का कोई मतलब नहीं है.
