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पोटका में ब्रेन मलेरिया का कहर

by Live India
पोटका में ब्रेन मलेरिया का कहर: चार बच्चियों की मौत से मचा हड़कंप, खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल!

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Brain Maleriya: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते प्रकोप ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बीते एक सप्ताह के भीतर चार बच्चियों की मौत और 20 से अधिक मरीजों के अस्पताल पहुंचने के बाद इलाके में डर का माहौल है. बीमारी के बढ़ते मामलों ने जहां स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय कर दिया है, वहीं अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है. पोटका प्रखंड के कई गांवों में ब्रेन मलेरिया के मामले सामने आए हैं. केजीबीवी विद्यालय की एक छात्रा समेत हितबासा, कांदर और सानग्राम गांव में बच्चियों की मौत ने लोगों को चिंता में डाल दिया है. ग्रामीणों के बीच बीमारी को लेकर भय का वातावरण है.

प्रभावित गांवों में घर-घर जांच अभियान

लोगों का कहना है कि समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों तो कई जानें बचाई जा सकती हैं. घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची. राज्य स्तरीय वीबीडी कंसल्टेंट, मलेरिया विभाग और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका की टीम ने इलाके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में घर-घर जांच अभियान चलाया जा रहा है. इसके अलावा मच्छरों के नियंत्रण के लिए दवा का छिड़काव, आईआरएस अभियान और लोगों को जागरूक करने का काम भी तेज किया गया है. जिला मलेरिया पदाधिकारी मृत्युंजय धावड़िया ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है. अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है.

बुखार को सामान्य बीमारी न समझें

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें और लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराएं. वहीं ब्रेन मलेरिया के मामलों को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. विपक्षी बीजेपी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों के बावजूद कोल्हान क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दवा की उपलब्धता, स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था में कमी के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी अजय राय ने कहा कि सिर्फ बैठक और दावों से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि गांव स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना होगा.

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा. इधर, सत्ताधारी कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति करार दिया है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि सरकार पूरी गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रभावित इलाकों में लगातार जांच, छिड़काव और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. अधिकारियों को गांव-गांव जाकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. कांग्रेस का कहना है कि बीमारी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी को मिलकर काम करना चाहिए.

पार्टी ने दावा किया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है. ब्रेन मलेरिया का यह मामला अब सिर्फ एक बीमारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी सामने ला रहा है. चार बच्चियों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों और ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत के बीच की दूरी आखिर कब खत्म होगी.

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  • रांची से विशाल भारद्वाज की रिपोर्ट

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