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बुर्किना फासो-फ्रांस संबंध: पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो की सैन्य सरकार ने फ्रांस के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं. फ्रांस उसका पूर्व औपनिवेशिक शासक था और संबंध खराब होने से पहले वह इस पश्चिम अफ्रीकी देश का एक अहम सुरक्षा साझेदार भी था. सैन्य सरकार (जंटा) ने शुक्रवार को कहा कि उसने तुरंत प्रभाव से फ्रांस के साथ संबंध तोड़ लिए हैं. उसने फ्रांस पर बिना कोई सबूत दिए खुलेआम नव-औपनिवेशिक इरादे रखने और विध्वंसक नेटवर्क व आतंकवादियों को सक्रिय समर्थन देने का आरोप लगाया.
पास्कल ने आरोपों को किया खारिज
फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फावरेक्स ने बुर्किना फासो के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरी जवाबी कदमों पर विचार किया जा रहा है. कॉन्फावरेक्स ने कहा कि फ्रांस बुर्किना फासो में फ्रांसीसी सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रख रहा है और उनसे ज्यादा सतर्क रहने का आग्रह किया गया है. 2.3 करोड़ की आबादी वाला यह पश्चिम अफ्रीकी देश कई सालों से हिंसा से जूझ रहा है. यह हिंसा अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़े चरमपंथी समूहों के साथ-साथ सरकारी बलों द्वारा की जा रही है, जिन पर अक्सर बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं करने के आरोप लगते रहे हैं. इसका साहेल क्षेत्र चरमपंथ के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका है.
कई सालों से दोनों देशों के बीच संबंध थे खराब
यह साफ़ नहीं है कि राजनयिक संबंध खत्म होने के बाद क्या होगा या बुर्किना फासो में फ्रांसीसी दूतावास पर इसका क्या असर पड़ेगा. बुर्किना फासो के संचार मंत्री पिंगडवेंड गिल्बर्ट ओएद्राओगो ने एक बयान में कहा कि आपसी सम्मान, भरोसे और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत का सम्मान करने पर आधारित संबंध बनाने के लिए ज़रूरी हालात अब नहीं रहे. दोनों पक्षों के बीच कई सालों से संबंध खराब रहे हैं. बुर्किना फासो की सैन्य सरकार ने पहले भी विदेशी राजनयिकों, जिनमें फ्रांसीसी राजनयिक भी शामिल हैं, को निशाना बनाया था और अक्सर उन पर अपने हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था.
बुर्किना फासो का प्रमुख सुरक्षा साझेदार था फ्रांस
2023 में जुंटा ने फ्रांस से अपने राजदूत को वापस बुलाने को कहा और देश में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट और मानवीय समन्वयक को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया, जबकि 2024 में उसने कथित तौर पर विध्वंसक गतिविधियों के लिए तीन फ्रांसीसी राजनयिकों को देश से निकाल दिया. 2022 में हुए तख्तापलट तक फ्रांस, बुर्किना फासो का प्रमुख सुरक्षा साझेदार था. इसके बाद जुंटा ने चरमपंथी समूहों से लड़ने के लिए भेजे गए सैकड़ों फ्रांसीसी सैनिकों को हटा दिया.
जानकारों का कहना है कि जिस मिलिट्री सरकार ने हिंसा को रोकने का वादा किया था, उसके दौर में हिंसा और बढ़ गई है. ह्यूमन राइट्स वॉच की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, तख्तापलट के बाद के दो सालों में बुर्किना फासो की सेना ने चरमपंथियों के मुकाबले दोगुने आम नागरिकों को मारा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2023 से अगस्त 2025 के बीच देश में मारे गए 1,837 आम नागरिकों में से कम से कम 1,200 की मौत के लिए सरकारी सेना जिम्मेदार थी.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
