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भर्ती घोटालों से बदनाम हुआ बंगाल

by Live India
सुवेंदु ने माना- भर्ती घोटालों से बदनाम हुआ बंगाल, सरकार जल्द लाएगी नई भर्ती नीति

पश्चिम बंगाल: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने माना कि विभिन्न भर्ती घोटालों के कारण पश्चिम बंगाल को काफी बदनामी मिली. साथ ही युवाओं के भविष्य से भी खिलवाड़ किया गया. अब भविष्य में युवाओं के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए उनकी सरकार विधानसभा के अगले बजट सत्र में एक नई भर्ती नीति पेश करेगी. उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट और उच्चतम न्यायालय को पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इन भर्तियों में हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके कारण 26,000 शिक्षकों की भर्ती रद्द हो गईं.

भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की छवि को नुकसान हुआ है और राज्य को इस स्थिति से बाहर लाने की आवश्यकता है. अधिकारी ने कहा कि सरकार परीक्षा के बाद परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका की कार्बन प्रतियां देना चाहती है. कहा कि अब तक राज्य की भर्ती परीक्षाओं के परीक्षार्थियों को ओएमआर शीट की कार्बन प्रतियां नहीं दी गई थीं. अधिकारी ने कहा कि यह गलत इरादे से की गई एक बहुत ही बुरी प्रथा है. भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की प्रथाओं का सहारा लिया गया था.

मौखिक परीक्षा में मिलेंगे न्यूनतम अंक

राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत भर्ती किए गए युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित रोजगार मेले को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल, जो शिक्षा और बुद्धि के उच्च मानकों के लिए जाना जाता था, ने स्कूल की नौकरियों और नगर निकाय भर्ती घोटालों के कारण बदनामी हासिल की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने प्रिय पश्चिम बंगाल को इस स्थिति से बाहर लाना है. यहां तक ​​कि परीक्षा केंद्र भी इस तरह खराब थे कि पूर्वी रेलवे, दक्षिण पूर्वी रेलवे और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे राज्य में अपनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कर रहे थे. मौखिक परीक्षा में न्यूनतम अंक आवंटन होना चाहिए.

टीएमसी सरकार में आरक्षण का पालन नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली टीएमसी सरकार ने राज्य की भर्तियों में ओबीसी, एससी/एसटी, शारीरिक रूप से विकलांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण के 100 पॉइंट रोस्टर के संवैधानिक दायित्वों का पालन नहीं किया. अधिकारी ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को तत्कालीन सरकार द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि हम भर्ती के लिए पारदर्शी लिखित परीक्षा, अकादमिक उत्कृष्टता का उचित मूल्यांकन और आरक्षण के लिए 100-पॉइंट रोस्टर का कार्यान्वयन चाहते हैं, जो अनिवार्य है.

रेलवे भर्ती बोर्ड की तरह होंगी परीक्षाएं

अधिकारी ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार में भर्ती प्रक्रिया उसी तरह होगी जैसे केंद्र सरकार रेलवे और अर्धसैनिक बलों जैसे संगठनों में भर्तियों में दिखाती है. उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूं कि भर्ती परीक्षाओं में उपयोग की जाने वाली ओएमआर शीट की एक प्रति संबंधित उम्मीदवारों को दी जानी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि 6 जून को पश्चिम बंगाल के सभी भर्ती संगठनों की एक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमने केंद्र सरकार के रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की परीक्षा प्रक्रिया का अनुकरण करने का फैसला किया है.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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