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मध्य पूर्व युद्ध: मिडिल ईस्ट में भले ही सीधी लड़ाई न चल रही हो लेकिन वहां पर अभी भी तनाव बना हुआ है. ईरान ने अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को रोक रखा है. साथ ही उसने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी मालवाहक जहाज इस समुद्री गलियारे से गुजरता है तो उसे पहले जानकारी साझा करनी होगी. साथ ही उसको यहां से गुजरने के लिए टोल भी देना होगा. हालांकि, पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि वह बातचीत के माध्यम से इस समस्या को सुलझाए और इस समुद्री गलियारे की स्थिति पहले जैसी हो जाए. इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख मार्शल आसिम मुनीर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ मुलाकात की. उन्होंने यह भी बताया कि इस मुलाकात का मकसद पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करके शांति स्थापित करना है.
मध्यस्थता की कोशिशों का एक हिस्सा
पाकिस्तानी सेना ने बताया कि आसिफ मुनीर शुक्रवार को एक अहम दौरे पर तेहरान पहुंचे थे. इसका सीधा मकसद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की कोशिश को तेज करना था. सेना ने आगे कहा कि यह दौरा सिर्फ मध्यस्थता की कोशिशों का ही एक हिस्सा है. तेहरान पहुंचने पर फील्ड मार्शल मुनीर का स्वागत ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने किया. साथ ही पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान में पहले से ही मौजूद थे.
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शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलना चाहिए
ईरान सरकार ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया और कहा कि मुनीर ने तेहरान में अराघची से मुलाकात की. उन्होंने आगे कहा कि इस बातचीत का मतलब है कि रोकने और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा करना था. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत देर रात तक चली. फील्ड मार्शल की एक महीने में ईरान की यह दूसरी यात्रा है. बता दें कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर उभरा है. इस संघर्ष के कारण ऊर्जा की भारी कमी हो गई है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है. कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को तेहरान और वाशिंगटन दोनों का ही भरोसा हासिल है.
दो मुद्दों पर अटकी है बातचीत
आपको बताते चलें कि पिछले महीने ही इस्लामाबाद ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं की मेजबानी की थी. हालांकि, दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंचने में नाकाम रहे. माना जा रहा है कि बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा अड़चनें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अटका हुआ है. इस जलमार्ग से ऊर्जा का दुनिया की जरूरत का पांचवां हिस्सा गुजरता है. ऐसे में अमेरिका इस समुद्री गलियारे को ईरान को नहीं सौंपना चाहता है. 28 फरवरी को हमला होने के बाद होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और इसके कारण दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा संकट बढ़ने लगा है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
