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भारत का Oldest zoo, 150 साल पुरानी जगह की दिलचस्प कहानी

by Live India
भारत का Oldest zoo, 150 साल पुरानी जगह की दिलचस्प कहानी

Oldest zoo in India: छुट्टियां आते ही बच्चे चिड़ियाघर जाने की जिद करने लगते हैं. भारत के लगभग हर शहर में चिड़ियाघर है. लेकिन क्या आप भारत के सबसे पुराने चिड़ियाघर के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो आज आपको उसी का इतिहास बताने वाले हैं.

13 मई, 2026

भारत में वाइल्डलाइफ और नेचर को लेकर लोगों का प्यार कोई नई बात नहीं है. देश में आज कई बड़े नेशनल पार्क, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और मॉडर्न जूलॉजिकल पार्क मौजूद हैं, लेकिन इनमें एक ऐसा चिड़ियाघर भी है जिसने सबसे पहले भारत में वाइल्डलाइफ रिजर्व की नींव रखने का काम किया था. हम बात कर रहे हैं अलीपुर चिड़ियाघर के बारे में, जिसे भारत का सबसे पुराना चिड़ियाघर माना जाता है. कोलकाता का ये चिड़ियाघर आज भी लोगों के बीच उतना ही पॉपुलर है, जितना पहले हुआ करता था.

1875 में हुई शुरुआत

अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन, जिसे लोग अलीपुर जू के नाम से भी जानते हैं, की स्थापना 24 सितंबर 1875 को हुई थी. खास बात ये है कि इस जू को बनाने में कोलकाता की आम जनता ने भी आर्थिक मदद की थी. लोगों ने सिर्फ पैसे ही नहीं दिए, बल्कि अपने कई जानवर भी दान किए थे. यही वजह है कि ये चिड़ियाघर शुरू से ही लोगों और शहर के इमोशन्स से जुड़ा रहा.

एक शौक की कहानी

अलीपुर जू का इतिहास काफी दिलचस्प है. इसकी शुरुआत उस टाइम के भारत के गवर्नर जनरल रिचर्ड वेलेस्ली से जुड़ी हुई है. उन्हें जानवरों से काफी लगाव था. कोलकाता के बैरकपुर इलाके में बने अपने समर हाउस में उन्होंने कई रेयर और जंगली जानवरों का एक पर्सनल कलेक्शन तैयार किया था. धीरे-धीरे ये कलेक्शन इतना बड़ा हो गया कि बाद में यही अलीपुर जू की नींव बना. उस दौर में भारत में अंग्रेजों का शासन था और बड़े लेवल पर ऐसा चिड़ियाघर बनाना आसान नहीं था. लेकिन जानवरों को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही थी.

कई बार हुए फेल

दिलचस्प बात ये है कि अलीपुर जू एक ही बार में नहीं बन गया था. इसके पीछे कई लोगों की सालों की मेहनत और कोशिशें थीं. साल 1842 में जॉन मैक्लेलैंड ने कोलकाता में एक बड़ा चिड़ियाघर खोलने की सोची. लेकिन तब किसी ने उन्हें सीरियस नहीं लिया. करीब 20 साल बाद जोसेफ बार्ट फेयर ने फिर से इस आइडिया को आगे बढ़ाया. इस बार लोगों ने इंटरेस्ट तो दिखाया, लेकिन सबसे बड़ी प्रोब्लम जमीन की थी. इसके बाद कार्ल लुई श्वेंडलर ने इस प्रोजेक्ट का पूरा प्लान तैयार किया. आखिरकार 1873 में भारत सरकार ने इस जू के लिए करीब 46.5 एकड़ जमीन देने का फैसला किया और धीरे-धीरे ये सपना सच बन गया.

बदल दी तस्वीर

अलीपुर जू के इतिहास में एक नाम बहुत खास माना जाता है और वो है, राम ब्रह्मा सान्याल. वो इस जू के पहले सुपरिटेंडेंट बने थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक सिंपल कर्मचारी के तौर पर की थी, लेकिन जानवरों के लिए उनके लगाव और मेहनत ने उन्हें सुपरिटेंडेंट बना दिया. राम ब्रह्म सन्याल ने 1892 में ‘A Handbook of the Management of Animals in Captivity’ नाम की किताब लिखी थी. ये किताब लंबे टाइम तक दुनिया भर के जूलॉजिकल पार्क्स के लिए एक गाइड मानी जाती रही.

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