5
राम मंदिर दान विवाद: अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा मामला काफी तूल पकड़ चुका है. इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महा सचिव चंपत राय समेत कई लोगों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है. इस बीच राम मंदिर चढ़ावा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. हालांकि, इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका को कोर्ट से झटका लगा है. आइए जानते हैं पूरी खबर.
गर्मी की छुट्टियों के बाद मामले की सुनवाई- कोर्ट
मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में चंदे के कथित गबन की निष्पक्ष और तत्काल जांच की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों के बाद मामले की सुनवाई के लिए तारीख लिस्ट की जाएगी.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि, “आसमान गिरने वाला नहीं है… इतनी जल्दी क्या है?”
मामले को सीबीआई से जांच कराने की मांग
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के नेतृत्व में एक मल्टी डिसिप्लिनरी स्पेशल जांच टीम(SIT) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं और अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए.
इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वे जनहित की रक्षा करने और लाखों भक्तों और दानदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक, पर्यवेक्षी और लेखापरीक्षा तंत्रों का गठन और संचालन करें.
याचिका में और क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संबंधित गायब राशि और अन्य कथित अनियमितताओं के बारे में रिपोर्टें अंततः सही साबित हों या न हों, ऐसी रिपोर्टों ने अयोध्या की महिमा की बहाली के लिए संघर्ष करने वाली पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है.” इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने एफआईआर या किसी नियमित आपराधिक मामले को दर्ज किए बिना ही मामले की जांच शुरू कर दी है.
याचिका में आगे कहा गया है, “इस तरह की जांच से जनता का अधिक विश्वास पैदा होगा, बजाय इसके कि किसी विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा प्रारंभिक जांच की जाए जिसमें प्रशासनिक अधिकारी शामिल हों जिनके पास आपराधिक जांच में विशेष योग्यता न हो.”
13 जून हो हुआ था एसआईटी का गठन
मालूम हो कि 13 जून को, राम मंदिर में चढ़ावा में हेराफेरी और दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी में लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजीपी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल थे.
आठों आरोपियों के घर छापेमारी, राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SIT का एक्शन, इतने लाख बरामद
समाचार स्रोत: पीटीआई
