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4800 घुसपैठियों को भेजा गया बांग्लादेश

by Live India
Suvendu Adhikari

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Suvendu Adhikari: देश की आजादी के बाद पहली बार बीते महीने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. इस सरकार के मुखिया यानी कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हैं. राज्य में बीजेपी की सरकार आते ही यहां अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों को लेकर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हो गई है. पश्चिम बंगाल में अधिकतर अवैध प्रवासी व घुसपैठियों की सूचना में यह जानकारी मिली थी कि ये पड़ोसी देश बांग्लादेश के हैं.

इस बीच राज्य की शुभेंदु सरकार इनको वापस इनके देश भेजने का काम शुरू कर दी है. मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य में बनाए गए होल्डिंग सेंटर्स से अभी तक 4800 घुसपैठियों(अवैध प्रवासियों) को बांग्लादेश भेजा जा चुका है. उन्होंने आगे यह भी बताया कि जल्द ही 836 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया जाएगा.

बाड़ लगाने के लिए बीएसफ को दी जमीन- सीएम

बंगाल के सीएम शुभेंदु ने जोर देकर कहा कि अवैध अप्रवासन एक बड़ा मुद्दा है और कहा कि उनकी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक 556 किलोमीटर में से लगभग 100 किलोमीटर की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंप दी है. भाजपा के विशेष प्रशिक्षण शिविर की तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, “बाड़ लगाने के लिए आवश्यक 556 किलोमीटर भूमि में से हमने बीएसएफ को लगभग 100 किलोमीटर भूमि सौंप दी है और उत्तरी बंगाल में चिकन नेक कॉरिडोर को प्राथमिकता दी है.”

बांग्लादेश के साथ पश्चिम बंगाल की सबसे लंबी सीमा

‘चिकन नेक’, जिसे आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है, उत्तरी बंगाल में लगभग 20-22 किलोमीटर चौड़ा और लगभग 60 किलोमीटर लंबा एक संकरा भूभाग है. यह भारत के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. सुरक्षा और रणनीतिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इसे एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील जीवन रेखा माना जाता है. सभी राज्यों में से पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो कुल 4,096 किलोमीटर में से 2,217 किलोमीटर तक फैली हुई है.

अवैध प्रवासियों के निर्वासन का काम शुरू- बंगाल सीएम

मुख्यमंत्री शुभेंदु ने इस बात पर जोर देते हुए कि उनकी सरकार ने केंद्र सरकार के एक कानून के अनुसार उन अवैध प्रवासियों को निर्वासित करना शुरू कर दिया है, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं, अधिकारी ने कहा, “इन लोगों को सीधे बीएसएफ को सौंपा जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि हालांकि यह कानून देश के अन्य राज्यों में लागू किया गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने इसे लागू नहीं किया और कहा कि अवैध प्रवासियों को राज्य की जेलों में रखा गया था और उन्होंने करदाताओं के पैसे पर सुविधाओं का लाभ उठाया था.

अधिकारी ने कहा, “राज्य के सीमावर्ती जिलों में स्थापित हिरासत केंद्रों से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को वापस भेज दिया गया है,” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे 836 लोग इन सुविधाओं से निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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