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CBSE Digital Checking अब कंप्यूटर चेक करेगा 12वीं की कॉपियां

by Live India
CBSE Digital Checking

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CBSE Digital Checking: सीबीएससी अब 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां डिजिटली कंप्यूटर से चेक करवाएगा. यह नया सिस्टम 2026 से लागू किया जा रहा है.

11 फरवरी, 2026

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला किया है. सीबीएससी अब 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां डिजिटली कंप्यूटर से चेक करवाएगा. पहले यह कॉपियां टीचर्स चेक करते थे, लेकिन 2026 सेशन से कॉपी को ‘ऑन-स्क्रीन-मार्किंग’ (OSM) सिस्टम से चेक किया जाएगा. सीबीएससी ने साफ कहा है कि 2026 से 12वीं क्लास की कॉपियों का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल होगा. डिजिटली चेकिंग होने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बच्चों के नंबर जोड़ने में गलतियां नहीं होंगी.

गलतियां नहीं होंगी

टीचर्स द्वारा मैनुअल चेकिंग करने में बच्चों के नंबर जोड़ने में अक्सर गलतियां हो जाती थीं, जिससे रिजल्ट आने के बाद गड़बड़ी की शिकायत मिलती थी. अब कंप्यूटर सॉफ्टवेयर खुद ही सब कुछ मैनेज करेगा. इससे कॉपी चेक करने का समय भी बचेगा और कैलकुलेशन में गलतियां भी नहीं होंगी. फिलहाल यह नया नियम केवल 12वीं के लिए लागू किया गया है. 10 वीं क्लास के बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां पहले की तरह मैन्युअली ही चेक होंगी. लेकिन भविष्य में 10वीं के लिए भी कंप्यूटर चेकिंग का सिस्टम लाया जा सकता है. इस नए तरीके से टीचर्स को कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी, वे स्कूल से ही कॉपियां चेक कर सकते हैं.

स्कूलों को निर्देश

इस नए सिस्टम को लागू करने के लिए, CBSE ने स्कूलों से अपनी कंप्यूटर लैब तैयार करने को कहा है. स्कूलों में अच्छा इंटरनेट कनेक्शन, Windows 8 या उससे ऊपर के वर्जन वाले लैपटॉप/कंप्यूटर और पावर बैकअप होना चाहिए. बोर्ड टीचर्स को ट्रेनिंग भी देगा और बाद में किसी भी तरह की दिक्कत से बचने के लिए ट्रायल रन भी करेगा.

क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM)

ऑन स्क्रीन मार्किंग कॉपी चेक करने का नया तरीका है, जिसे अब सीबीएससी ने अपना लिया है. इस मेथड में बच्चों की आंसरशीट को मैन्युअली चेक करने के बजाय उसे स्कैन किया जाता है, जिसके बाद उसकी डिजिटल फाइल तैयार होती है. इस डिजिटल फाइल को एग्जामिनर या टीचर्स कंप्यूटर पर स्कैन कॉपी को ओपन करके उसे चेक करेंगे. चेकिंग के साथ नंबर भी जुड़ते जाएंगे. आखिर में सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक टोटल नंबर जोड़ देगा. इससे कैलकुलेशन में गड़बड़ी नहीं होगी, समय बचेगा और वैरिफिकेशन की जरूरत खत्म हो जाएगी.

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