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UCC in Gujarat: गुजरात विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता’ यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़ा अहम बिल पेश कर दिया गया है. जानें इसके लागू होने के बाद क्या-कुछ बदलेगा.
- गांधीनगर से निकुल पटेल
गुजरात में कानून व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को बदलने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है. गुजरात विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता’ यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़ा अहम बिल पेश कर दिया गया है. इसके साथ ही राज्य देश में समान कानून लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है. राज्य की भारतीय जनता पार्टी की सरकार पहले से ही UCC को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल करती रही है. अब विधानसभा में बिल पेश होने के बाद इसके जल्द पारित होने की उम्मीद जताई जा रही है.
राज्यपाल की मंजूरी मिलने का इंतजार
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सदन से पास होने के बाद इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी भी शीघ्र मिल सकती है, जिससे यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा. अगर यह कानून लागू होता है, तो गुजरात में सभी धर्मों और समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम एक समान हो जाएंगे. अभी तक ये नियम अलग-अलग पर्सनल लॉ के तहत संचालित होते हैं, लेकिन UCC लागू होने के बाद एक समान कानूनी ढांचा तैयार होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में सरलता और समानता आने की बात कही जा रही है.
UCC से क्या बदलेगा
इस बिल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं, खासकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर देखने को मिल सकता है. कानून लागू होने के बाद निकाह हलाला जैसी प्रथाओं से महिलाओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. साथ ही, बहुविवाह पर भी पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान किया गया है. यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसे सात साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है. लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी इस बिल में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है. अब ऐसे संबंधों को कानूनी मान्यता देने के साथ-साथ उनका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा. इससे महिलाओं और पार्टनर्स को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और विवाद की स्थिति में न्याय पाना आसान हो सकेगा.
उत्तराधिकार यानी संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी इस कानून में एकरूपता लाई जाएगी. यदि कोई व्यक्ति वसीयत नहीं बनाता है, तो उसकी संपत्ति के बंटवारे के लिए एक समान नियम लागू होंगे. इसके तहत उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणियों में बांटकर संपत्ति का वितरण किया जाएगा, जिससे पारिवारिक विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इस कानून में आदिवासी समुदाय को इससे बाहर रखा गया है. सरकार का कहना है कि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के लिए यह फैसला लिया गया है.
उत्तराखंड के बाद गुजरात में हो रहा लागू
गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का दूसरा राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी. इससे पहले उत्तराखंड ने इस दिशा में पहल की थी और अब गुजरात भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है. कुल मिलाकर, UCC बिल का पेश होना सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है. यह कानून जहां एक ओर समानता और न्याय की दिशा में कदम है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज होने की पूरी संभावना है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह बिल किस रूप में लागू होता है और इसका समाज पर क्या व्यापक असर पड़ता है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
