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Bihar Liquor Tragedy: बिहार में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई. घटना के बाद प्रशासन ने SHO को निलंबित कर दिया.
3 अप्रैल 2026
बिहार शराब त्रासदी: बिहार में जहरीली शराब कांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई. घटना के बाद प्रशासन ने SHO को निलंबित कर दिया. एक ग्राम चौकीदार सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में जहरीली शराब के सेवन से तीन और लोगों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या शुक्रवार को चार हो गई. अधिकारियों ने कहा कि छह लोगों का सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि सात लोगों को प्रारंभिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है. यह घटना गुरुवार को मोतिहारी के तुरकौलिया और रघुनाथपुर इलाके में हुई. पूर्वी चंपारण के जिला मजिस्ट्रेट सौरभ जोरवाल ने कहा कि मरने वालों की संख्या अब चार हो गई है. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. मौत का सही कारण रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा.
आरोपियों पर हत्या का केस दर्ज
डीएम ने बताया कि घटना के संबंध में एक ग्राम चौकीदार सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तुरकौलिया पुलिस स्टेशन के प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. एसपी स्वर्ण प्रभात ने कहा कि घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है. पुलिस ने कहा कि मृतक के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर शिकायत के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पहले पीड़ित ने रघुनाथपुर इलाके में अवैध शराब का सेवन किया था. पुलिस ने शराब आपूर्तिकर्ता की पहचान कर ली है. उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा. जिला पुलिस और शराब विरोधी टास्क फोर्स (एएलटीएफ) की एक टीम परसौनी, मुशहरी टोला और तुरकौलिया में तलाशी ले रही है. घटना की उच्च स्तरीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं. मालूम हो कि नीतीश सरकार ने 5 अप्रैल, 2016 को बिहार में शराब की बिक्री और खपत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था.
तेजस्वी यादव ने सरकार पर बोला हमला
घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर एनडीए सरकार की शराबबंदी नीति की विफलता और इसकी गंभीर कमियों को उजागर किया है. यादव ने कहा कि राज्य में ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2016 से अब तक बिहार में जहरीली शराब पीने से 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आधिकारिक आंकड़ा है, सटीक संख्या इससे कहीं अधिक है. जहरीली शराब से कई लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है. यह कानून सत्तारूढ़ भाजपा-जद(यू) के कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और उनके संरक्षण में पलने वाले शराब माफियाओं के लिए मुनाफे का सौदा बन गया है. कहा कि पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम नकली शराब बनाई जाती है. राज्य में शराब की होम-डिलीवरी धड़ल्ले से की जाती है.
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