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भोजशाला में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, हाई कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई पूजा-अर्चना

by Live India
Bhojshala Temple

Bhojshala Temple: अपने 242 पन्नों के फैसले में, हाई कोर्ट ने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हर शुक्रवार को परिसर में मुसलमानों को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. एएसआई के आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को ही स्मारक पर पूजा करने की अनुमति थी.

Bhojshala Temple: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में आज सैकड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ लगी. यहां श्रद्धा के इस जनसैलाब ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की. शुक्रवार 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विवादित भोजशाला को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. यह फैसला हिंदूओं के पक्ष में आया था. शुक्रवार को हाई कोर्ट ने विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित कर दिया. इसके एक दिन बाद आज शनिवार को यहां श्रद्धालु प्रार्थना करने के लिए मध्ययुगीन स्मारक पर उमड़ पड़े.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इस स्मारक पर आज श्रद्धालुओं को मालाएं लिए हुए ‘सरस्वती वंदना’ करते और मंत्रों का जाप करते देखा गया.

1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती

जानकारी के अनुसार, इंदौर ग्रामीण रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) मनोज कुमार सिंह ने कहा कि धार में स्थिति शांतिपूर्ण है और श्रद्धालु भोजशाला में दर्शन के लिए आ रहे हैं. उन्होंने आगे बताया कि धार में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1200 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भोजशाला पहुंचे एक श्रद्धालु गोकुल नागर ने कहा, “इस दिन को देखने के लिए हमने वर्षों तक संघर्ष किया है. हम बहुत खुश हैं कि अब हम प्रतिदिन भोजशाला में पूजा कर सकेंगे, जबकि पहले हमें यह अवसर केवल मंगलवार को ही मिलता था.”

हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि धार जिले में विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है. अपने 242 पन्नों के फैसले में, उच्च न्यायालय ने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हर शुक्रवार को परिसर में मुसलमानों को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. एएसआई के आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को ही स्मारक पर पूजा करने की अनुमति थी.

मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है. वहीं, हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में एक आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि भोजशाला विवाद मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर उनके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए.

यह भी पढ़ें: क्या है भोजशाला का इतिहास? जानें विवाद शुरू होने से लेकर HC में कानूनी लड़ाई तक

समाचार स्रोत: पीटीआई

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