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भारत पाकिस्तान है: हर बार की भांति एक बार फिर से पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNGC) में शर्मसार हुआ है. उसे भारत ने एक बार फिर से लताड़ लगाई है. जी हां, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने पाकिस्तान की सच्चाई बताते हुए कहा कि उसका नरसंहार का कलंकित इतिहास रहा है. भारत ने खुलकर यह बात बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा’ विषय पर कही. बता दें कि पाकिस्तान ने बहस में भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की कोशिश की थी और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था.
पाकिस्तान की इस करतूत का जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने कहा, “यह विडंबना है कि नरसंहार के कृत्यों के अपने लंबे समय से कलंकित इतिहास वाले पाकिस्तान ने उन मुद्दों का हवाला देना चुना है जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं.”
पाक का अफगान पर हमला उचित नहीं- भारत
इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर किए गए हमलों का भी मुद्दा उठाया. बता दें कि इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर बर्बर तरीके से हवाई हमला किया था, इसमें कई अफगानी और बेकसूर नागरिक मारे गए थे. उसने राजधानी काबुल के एक अस्पताल को भी निशाना बनाया था. भारत ने पाकिस्तान के द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, “दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान, शांति, चिंतन और दया के समय में, पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर बर्बर हवाई हमला किया था.”
पार्वथानेनी हरीश ने आगे कहा, “यूएनएएमए (अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) के अनुसार, हिंसा के इस कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए, जबकि इसको किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता.”
निर्दोषों को निशाना बनाना पाकिस्तान का पाखंड- पार्वथानेनी हरीश
पार्वथानेनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करते हुए “अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पाकिस्तान का पाखंड है. बता दें कि यूएनएएमए के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले तरावीह की शाम की नमाज की समाप्ति के समय हुए, जब कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. यूएनएएमए के अनुसार, अफगान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से अधिक लोगों को विस्थापित घोषित किया गया है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई इस तरह की जघन्य आक्रामकता उस देश से कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए जो “अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और सुनियोजित नरसंहार करता है.”
भारत ने किया ऑपरेशन सर्चलाइट का भी पर्दाफाश
पर्वथानेनी ने कहा आगे कि पाकिस्तान ने 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान अपनी ही सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के सामूहिक बलात्कार के सुनियोजित ऑपरेशन की मंजूरी दी थी. ऑपरेशन सर्चलाइट वह कोडनेम था जिसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना ने मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बांग्लादेशी राष्ट्रवादी आंदोलन के खिलाफ अपनी कार्रवाई के लिए किया था.
उन्होंने बताया, “इस तरह का अमानवीय व्यवहार दशकों से पाकिस्तान द्वारा अपनी आंतरिक विफलताओं को देश के भीतर और बाहर हिंसा के बढ़ते हिंसक कृत्यों के माध्यम से छिपाने के बार-बार किए गए प्रयासों को दर्शाता है. आस्था, कानून और नैतिकता से रहित पाकिस्तान के दुष्प्रचार को दुनिया आसानी से समझ सकती है.”
समाचार स्रोत: पीटीआई
