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Gujarat News:निक्षा बारोट ने फतह किया एवरेस्ट बेस कैंप

by Live India
Gujarat News:निक्षा बारोट ने फतह किया एवरेस्ट बेस कैंप

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गुजरात समाचार: गुजरात के पालनपुर की 8 वर्षीय साहसी बालिका निक्षा बारोट ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेक्स में शामिल माउंट एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक को सफलतापूर्वक पूरा कर एक नई मिसाल कायम की है. इतनी कम उम्र में एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन निक्षा ने यह कठिन ट्रेक केवल 7 दिनों में पूरा कर सभी को हैरान कर दिया. उसकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. निक्षा बारोट ने हिमालय की कठिन परिस्थितियों, माइनस डिग्री तापमान, ऑक्सीजन की कमी और खतरनाक पहाड़ी रास्तों का सामना करते हुए लगभग 130 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को पूरा किया.

दुर्गम इलाकों को पार किया

इस विशेष अभियान का आयोजन अनुभवी एवरेस्टर निशा के मार्गदर्शन में किया गया था. ट्रेक की शुरुआत 16 मई 2026 को नेपाल की राजधानी काठमांडू से लुकला पहुंचने के बाद हुई थी. लुकला को दुनिया के सबसे कठिन एयरपोर्ट्स में से एक माना जाता है, जहां से एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक की शुरुआत होती है. ट्रेक के पहले दिन निक्षा ने पाखडिंग तक की यात्रा पूरी की. इसके बाद वह नामचे बाजार पहुंची, जहां शरीर को ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए एक दिन का विश्राम रखा गया. इसके बाद उसने तेंगबोचे, डिंगबोचे, लोबुचे और गोरक्षेप जैसे बेहद कठिन और दुर्गम इलाकों को पार किया. आखिरकार 22 मई 2026 को निक्षा एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने में सफल रही. यह बेस कैंप समुद्र तल से लगभग 5,364 मीटर यानी 17,598 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इतनी ऊंचाई पर सांस लेना आसान नहीं होता, क्योंकि वहां ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होती है.

तेज ठंडी हवाएं बनी चुनौतीपूर्ण

इसके अलावा लगातार बदलता मौसम, बर्फीले रास्ते और तेज ठंडी हवाएं ट्रेक को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देती हैं. लेकिन इन सभी मुश्किलों के बावजूद निक्षा ने अद्भुत साहस और आत्मविश्वास का परिचय दिया. निक्षा के पिता नीलेश बारोट ने बताया कि उनकी बेटी बचपन से ही साहसिक गतिविधियों में रुचि रखती है. उन्होंने कहा कि ट्रेक के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां आईं जब सामान्य लोगों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता था, लेकिन निक्षा ने कभी हार नहीं मानी. उसकी इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ने इस कठिन अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बेस कैंप पहुंचने के बाद योग किया

इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने के बाद निक्षा ने वहां योग किया और भारत का राष्ट्रगान गाया. 17,598 फीट की ऊंचाई पर तिरंगे के साथ राष्ट्रगान गाने का दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक और गर्व का पल बन गया. छोटी उम्र में देशभक्ति और आत्मविश्वास का ऐसा उदाहरण देखने को मिला, जिसने सभी को प्रभावित किया. निक्षा ने अपनी इस उपलब्धि को सिर्फ एक साहसिक अभियान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया. एवरेस्ट बेस कैंप पर उसने ‘Save Nature, Save Himalayas’, ‘Every Child Should Plant a Tree’ और ‘Fit India, Green India’ जैसे संदेशों वाले प्लेकार्ड प्रदर्शित किए. उसने लोगों से अपील की कि ग्लोबल वॉर्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए.

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सामाजिक कार्यों में ले चुकी हैं भाग

विशेष बात यह है कि निक्षा इतनी कम उम्र में भी पर्यावरण के प्रति काफी जागरूक है. इससे पहले भी वह कई सामाजिक और पर्यावरणीय अभियानों में भाग ले चुकी है. महज 6 साल की उम्र में उसने उत्तराखंड का कठिन केदारकांठा ट्रेक सफलतापूर्वक पूरा किया था. इसके अलावा उसने अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक लगभग 4,556 किलोमीटर लंबी ‘Pedal to Plant’ साइकिल यात्रा में भी भाग लिया था. इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था. निक्षा की इन उल्लेखनीय उपलब्धियों और पर्यावरण संरक्षण में योगदान को देखते हुए 26 जनवरी 2026 को जिला स्तर पर उसे सम्मानित भी किया गया था. अब एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक की यह सफलता उसकी साहसिक यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय बन गई है. आज निक्षा बारोट देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है. इतनी छोटी उम्र में उसका साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता. उसकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है.

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