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जानें जेवर एयरपोर्ट की खासियत

by Live India
Noida International Airport (6)

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: उत्तर प्रदेश के विकास के इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से कमर्शियल फ्लाइट सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी. नोएडा एयरपोर्ट को दिल्ली-NCR रीजन के लिए दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तौर पर डेवेलप किया गया है, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकल्प है. इस एयरपोर्ट की एक नहीं, बल्कि कई खासियत हैं. यहां जानें क्यों नोएडा इंटरनेशल एयरपोर्ट भारत का सबसे अनोखा और आधुनिक एयरपोर्ट है.

लखनऊ से नोएडा लैंड करेगी पहली फ्लाइट

कल सुबह की पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा की होगी. इंडीगो की फ्लाइट संख्या 6E 2278 सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी. इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली कमर्शियल फ्लाइट उड़ान भरेगी. शुरुआती चरण में जेवर एयरपोर्ट से देश के पांच बड़े महानगरों के लिए सीधी विमान सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें मुख्य रूप से लखनऊ, बेंगलुरू, मुंबई, हैदराबाद और देहरादून शामिल हैं.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा. इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी.

172 किसानों के लिए भावुक पल

15 जून का दिन पूरे प्रदेश वासियों के लिए खास है, लेकिन जेवर के 172 किसानों के लिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जिन्होंने एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन दी थी. जेवर एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट में कोई बड़ा VIP नहीं, बल्कि 172 किसान सवार होंगे, जिन्होंने इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए अपनी उपजाऊ जमीन सरकार को दे दी. सभी 172 किसान जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहली फ्लाइट से लखनऊ पहुंचेंगे. लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका धन्यवाद करेंगे. इन किसानों के लिए अपनी जमीन पर बने एयरपोर्ट से पहली बार आसमान में उड़ान भरना गौरवपूर्ण और भावुक पल होगा.

चार चरणों में बन रहा एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशल एयरपोर्ट चार चरणों में बनाया जा रहा है. एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है. पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है. पहले फेज में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं. वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों तक की जाएगी. वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी. अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक की लिस्ट में शामिल हो जाएगा.

कितनी लागत से बन रहा एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशल एयरपोर्ट के सभी चरणों की कुल लागत 29,560 करोड़ रुपए है. पहले चरण के निर्माण और विकास में कुल 11,282 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. इसमें से 6,876 करोड़ रुपये कंसेशनेयर ने इन्वेस्ट किए हैं, जबकि राज्य सरकार ने जमीन खरीदने पर 4,406 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के अनुसार, बाकी तीन फेज के निर्माण का अनुमानित बजट लगभग 18,278 करोड़ रुपए तय किया गया है.

एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 5,845 हेक्टेयर जमीन पर कुल चार फेज में बनेगा. पहले फेज में 1,334 हेक्टेयर पर काम किया गया है. 2050 तक प्रोजक्ट पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा और दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक होगा.

40 एकड़ में बनेगी MRO फैसिलिटी

जेवर में सिर्फ एक एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि विमानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए एशिया का सबसे बड़ी MRO फैसिलिटी (Maintenance, Repair, and Overhaul) भी बन रही है. इसमें 40 एकड़ की एमआरओ फैसिलिटी बनाई जा रही है. इसके साथ ही एयरपोर्ट की कार्गो फैसिलिटी को हर साल 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो हैंडल करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसे 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है.

दिल्ली-NCR में बढ़ेगी कनेक्टिविटी

एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर, यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को देश का पहला ऐसा राज्य बना देगा जिसके पास पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट होंगे. इसे एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर भी देखा जा रहा है जो सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क को इंटीग्रेट करेगा, जिससे नेशनल कैपिटल रीजन और उत्तरी भारत में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा. यह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशल एयरपोर्ट पर भीड़ को कम करेगा. जेवर एयरपोर्ट से आगरा का ताज महल 2 घंटे से भी कम दूरी पर है. भविष्य में जेवर को मल्टी मोडल हब बनाने के लिए इसे मेट्रो, बुलेट ट्रेन और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से साथ सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए लाइफलाइन साबित होगा.

भारत का पहला नेट-जीरो एमिशन एयपोर्ट

एयरपोर्ट को एक सस्टेनेबल और फ्यूचर-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर डिजाइन किया गया है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मकसद नेट-जीरो एमिशन फैसिलिटी के तौर पर काम करना है, जिससे कार्बन उत्सर्जन जीरो होगा. इससे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण और काब्रन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी. इसमें बड़ी स्तर पर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा. एयरपोर्ट परिसर में 83 एकड़ में फैला एक विशाल सौर ऊर्जा फार्म बनाया गया है, जिससे 51,966 मेगावाट प्रति घंटे से अधिक स्वच्छ ऊर्जा पैदा होगी. इससे पारंपरिक बिजली ग्रिड पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. जेवर एयरपोर्ट को अपनी जरूरत की 100 प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा से ही मिलेगी.

भारतीय विरासत से प्रेरित है डिजाइन

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG ने बनाया है, जिसमें स्विस इंजीनियरिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की संस्कृति और वाराणसी के गंगा घाटों से प्रेरित डिजाइन भी दिखाया गया है. आर्किटेक्चरल डिजाइन भारतीय विरासत से प्रेरित है, जिसमें पारंपरिक घाटों और हवेलियों की याद दिलाने वाले एलिमेंट शामिल हैं, जिससे कल्चरल एस्थेटिक्स को मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलाया गया है.

हर मौसम में उड़ान भर सकती हैं फ्लाइट्स

डिजिटल-स्मार्ट एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को स्मार्ट एयरपोर्ट के तौर पर बनाया गया है, जिससे यात्रियों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी के जरिए तेज और आसान सर्विस मिलेंगी, जैसे पेपरलेस यात्रा, फेस रिकग्निशन से एंट्री और बोर्डिंग, ऑटोमेटेड चेक-इन, इंतजार का समय कम होना, और मोबाइल ऐप के जरिए फ्लाइट से जुड़ी जानकारी पैसेंजर्स तक आसानी से पहुंचना.

यहां आपको बोर्डिंग पास की जरूरत नहीं होगी. आपके चेहरे को स्कैन करके ही सारे गेट्स अपने आप खुल जाएंगे, जिससे एंट्री में कम समय लगेगा. जेवर एयरपोर्ट का एक वर्चुअल वर्जन भी तैयार किया गया है, जिसमें एआई पहले ही अनुमान लगा लेता है कि किस गेट पर ज्यादा भीड़ होने वाली है या कहां देरी हो सकती है और स्टाफ तुरंत उसे ठीक कर सकते हैं.

विमानों के नेविगेशन सिस्टम को साइबर अटैक या गलत जीपीएस सिग्नलों से बचाने के लिए रनवे पर भारत की सबसे एडवांस एंटी-स्पूफिंग तकनीक लगाई गई है. यात्रियों के लिए एक खास मोबाइल ऐप बनाया गया है, जिसके जरिए यात्री टिकट बुकिंग से लेकर फ्लाइट का स्टेटस और पार्किंग स्लॉट तक फोन पर देख सकते हैं.

रोजगार के अवसर पैदा करेगा

जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक इंजन साबित होगा. कंस्ट्रक्शन से लेकर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे अलग-अलग सेक्टर में लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे लोकल इकॉनमी और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा. इस एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा होने के बाद पायलट, केबिन क्रू, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, हैंडलिंग स्टाफ और बैगेज मूवर्स को रोजगार मिला है. इसके अलावा एयरपोर्ट मेंटेनेंस इंजीनीयर्स, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, कस्टमर केयर और हॉस्पिटैलिटी स्टाफ की भी नियुक्ति की गई है. वर्तमान में 50,000 लोगों को डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रोजगार मिल चुका है.

MRO फैसिलिटी में देश-विदेश के विमान ठीक होने आएंगे, जिससे एयरोस्पेस इंजीनीयर्स, टेक्निशियन और मैकेनिक्स को नौकरी मिलेगी. कैब ड्राइवर्स, टैक्सी ऑपरेटर्स को भी रोजगार मिलेगा. एयरपोर्ट के विस्तार के साथ रोजगार और बढ़ेगा. एयरपोर्ट के आसपास होटल खुलेंगे, जिससे नए रोजगार की कड़ी शुरू होगी. एयरपोर्ट की वजह से बड़ी ग्लोबल कंपनियों ने जेवर के आस-पास फैक्ट्रियां लगानी शुरू कर दी हैं.

पानी और कचरा प्रबंधन

एयरपोर्ट पर पानी और कचरा प्रबंधन का भी ध्यान रखा गया है. रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, पानी बचाने वाली टेक्नोलॉजी, वेस्ट को अलग करना, सही तरीके से डिस्पोजल और रीसाइक्लिंग, वेस्टवॉटर का ट्रीटमेंट और दोबारा इस्तेमाल करने की प्रैक्टिस से पर्यावरण को कम नुकसान होगा.

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