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E20 ईंधन: आजकल देश में E20 Fuel को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कई जगहों पर इसपर बवाल और विरोध भी देखा गया. कई लोग ऐसा दावा कर रहे हैं कि E20 Fuel से गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं, लेकिन सरकार ने इस दावे को भ्रामक और अफवाह बताया है.
देश की सरकारी तेल कंपनियों में से एक भारत पेट्रोलियम ने बताया है कि E20 Fuel से इंजन को नुकसान नहीं पहुंचता है, बल्कि E20 Fuel सुरक्षित है और आधुनिक वाहनों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है. हालांकि, उसने यह भी कहा कि केवल कुछ पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स (जैसे होज, सील, गैस्केट) जल्दी बदलने की जरूरत पड़ सकती है.
सरकारी तेल कंपनी ने तथ्य बताते हुए कहा है कि ARAI, IOCL और SIAM के व्यापक परीक्षणों में इंजन, धातु या प्लास्टिक पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पाया गया है. आगे कहा गया कि E20 अधिकतर मॉडर्न गाड़ियों के लिए एक सुरक्षित और टेस्टेड फ्यूल है.
ARAI, IOCL और SIAM द्वारा किए गए परीक्षणों में E20 से इंजन या उसके घटकों को कोई गंभीर नुकसान नहीं पाया गया। E20 अधिकांश आधुनिक वाहनों के लिए सुरक्षित और परिक्षित ईंधन है।
BPCL के साथ अफवाह नहीं, तथ्य चुनें।#बीपीसीएल #E20तथ्य #स्वच्छईंधन #मिथकबनामतथ्य #हरितभविष्य@HardeepSPuri… pic.twitter.com/kcK3E0Fh2J
– भारत पेट्रोलियम (@BPCLimited) 4 जुलाई, 2026
आइए अब हम इसके बारे में विस्तार से और एकदम आसान भाषा में जानते हैं. हम सबसे पहले यह जानेंगे कि आखिरकार E20 Fuel क्या है और भारत में इसको लागू करने के लिए कब से तैयारी रही थी. इसके साथ ही जानेंगे कि E20 Petrol से गाड़ियों को क्या नुकसान या फायदा है. आखिर भारत में E20 फ्यूल क्यों लागू की जा रही है और दुनिया के किन-किन देशों में इसका उपयोग होता है.
क्या है E20 Fuel?
सबसे पहले हम E20 Fuel की बात करेंगे. भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, E20 Fuel का मतलब है कि इस ईंधन में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण है. इसका अर्थ हुआ कि अगर आप पेट्रोल वाली गाड़ियों में E20 Fuel भरवाते हैं, तो उसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होगा.

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2003 में शुरू हुआ इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blended Petrol) साल 2003 में शुरू किया गया था. मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के साथ इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम 2003 में शुरू किया गया था. तकनीकी तैयारियों और हितधारकों के परामर्श के आधार पर इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, जिसका अंतिम चरण 2023 से 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का कार्यान्वयन है.
मंत्रालय ने बताया है कि सरकार तेल रिफाइनिंग कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ईंधन परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करके इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कार्यान्वयन की लगातार निगरानी करती है. E20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से, इथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन की खराबी या वाहन के टूटने की कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई है.
E20 के सही तथ्यों के साथ बढ़ाएँ भरोसे का सफ़र
E20 के बारे में फैली गलत धारणाओं से भ्रमित न हों। ईंधन में उपयोग होने वाला एथेनॉल सीधे गन्ने के रस से नहीं मिलाया जाता, बल्कि औद्योगिक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है।
कई गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही ईंधन में… pic.twitter.com/rQz640J1y4– भारत पेट्रोलियम (@BPCLimited) 4 जुलाई, 2026
गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाने का दावा गलत
सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कुछ भ्रामक और निराधार दावों पर ध्यान दिया है, जिनका उद्देश्य जनता को भ्रमित और गुमराह करना प्रतीत होता है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस बात को दोहराता है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से मान्य है और सरकार द्वारा इसकी लगातार निगरानी की जाती है.
मंत्रालय ने कहा कि यह भी देखा गया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो बना रहे हैं और शेयर कर रहे हैं जिनमें गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है. ऐसी सामग्री भ्रामक और निराधार है. ईंधन में मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल स्थापित औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा तैयार किया जाता है और पेट्रोल में मिलाने से पहले सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन करता है.
इथेनॉल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल जैसे गन्ने का रस, गुड़, टूटा हुआ चावल और मक्का से बनाया जाता है, लेकिन इथेनॉल के गुण कच्चे माल से बहुत अलग होते हैं क्योंकि यह फर्मेंटेशन सहित कई प्रक्रियाओं से गुजरता है, जिससे कच्चे माल में मौजूद शर्करा का फर्मेंटेशन होता है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 ईंधन में ऐसा कोई भी ज्ञात आकर्षण कारक नहीं है जो चींटियों या अन्य कीटों को वाहन के ईंधन टैंक के आसपास इकट्ठा होने के लिए आकर्षित करे.

E10 वाहनों के लिए भी E20 ईंधन सुरक्षित- एक्सपर्ट
E20 Fuel को लेकर आज 4 जुलाई को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता भी की गई. इसमें जानकार और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड एवं एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स एंड गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कहा कि इथेनॉल बेहतर ड्राइविंग अनुभव देता है और इसका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है. उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल के शुरुआती दौर में भी इथेनॉल का उपयोग होता था और आज इसकी बेहतरीन क्षमता के कारण इसका इस्तेमाल फॉर्मूला-1 रेसिंग कारों में भी किया जाता है. उन्होंने बताया कि पौधों से प्राप्त होने के कारण इथेनॉल एक स्वच्छ एवं शून्य-कार्बन (Zero Carbon) ईंधन है.
वहीं, एक्सपर्ट और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर फैली आशंकाओं पर मारुति सुजुकी इंडिया के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा, “भारत में वर्ष 2023 से E20 ईंधन और E20-अनुकूल वाहनों को अनिवार्य किया गया है. वहीं, 2023 से पहले निर्मित E10 वाहनों पर भी E20 ईंधन का व्यापक परीक्षण किया गया है.”
राहुल भारती ने आगे बताया कि परीक्षणों में E20 ईंधन के उपयोग से पुराने वाहनों में घिसाव, जंग, पुर्जों को नुकसान या वाहन की आयु पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया. उन्होंने कहा कि E10 वाहनों के लिए भी E20 ईंधन सुरक्षित है.

कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले योजना बनाई – हरदीप सिंह पुरी
आज शनिवार को जोधपुर में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी E20 फ्यूल को लेकर अपनी बात कही. उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में, आपने सोशल मीडिया पर बायोफ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर कुछ हलचल देखी होगी. मैं आलोचना का स्वागत करता हूं. अगर आपको लगता है कि हमारे काम में कोई कमी है, तो कृपया बताएं, हम आपकी बात सुनेंगे; हम आपके सुझावों को अपने काम में शामिल करेंगे और जरूरी सुधार करेंगे.”
उन्होंने आगे कहा, ” हालांकि, उन अफवाहों पर भी ध्यान दें जो फैलाई जा रही थीं: पहली यह कि इथेनॉल के इस्तेमाल से कीड़े-मकोड़े आएंगे; दूसरी यह कि इथेनॉल के इस्तेमाल से इंजन खराब हो जाएगा या फ्यूल पंप काम करना बंद कर देगा.”
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ” इथेनॉल के इस्तेमाल का कॉन्सेप्ट हमने नहीं बनाया है, इस पर एक सदी से काम चल रहा है. फोर्ड मोटर कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड अपने समय में बायोफ्यूल, केरोसिन और फॉसिल फ्यूल से चलने वाली कारें चलाते थे. जहां तक भारत की बात है, कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले इसके लिए योजना बनाई थी.”
मंत्री पुरी ने कहा, ” मुझे ब्राजील में राजदूत के तौर पर बिताया अपना समय याद है—खासकर 2006 से 2008 के बीच. उस समय शरद पवार कृषि मंत्री थे. हमने दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5% बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था, हालांकि हम उसे पूरा नहीं कर पाए—हम 1.4% पर ही अटक गए.”

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विदेशी मुद्रा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि यह उल्लेखनीय है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम(EBP) ने कच्चे तेल के आयात में कमी लाकर देश को 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद की है. इस कार्यक्रम ने इथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने वाले कृषि कच्चे माल की निरंतर मांग भी पैदा की है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है.
भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ परिवहन की दिशा में आ रहे परिवर्तन को गति देने में इथेनॉल मिश्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सरकार वैज्ञानिक प्रमाणों और हितधारकों के साथ निरंतर जुड़ाव के आधार पर इस कार्यक्रम को सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है.

अमेरिका समेत कई देशों में इथेनॉल मिश्रित इंधन का उपयोग
दुनिया में इथेनॉल मिश्रित इंधन का प्रयोग या उपयोग करने वाला देश केवल भारत ही नहीं है. इसके अलावा और भी कई ऐसे देश हैं, जहां पर इथेनॉल मिश्रित इंधन का उपयोग होता है. सरकार दावा करती है कि ये उपयोग काफी सफलता के साथ होता है.
दुनिया में अमेरिका, जापान के अलावा कनाडा, ब्राजील, थाईलैंड और यूरोपीय देशों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफल उपयोग किया जाता है. ब्राजील ने तो लंबे समय से उच्च स्तर की इथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाया है, जिसमें E27 मानक पेट्रोल मिश्रण के रूप में कार्य करता है. सरकार कहती है कि इथेनॉल मिश्रण एक विश्व स्तर पर स्वीकृत प्रक्रिया है.
भारत की तेल कंपनियों में से एक इंडियन ऑयल ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा, “E20 इथेनॉल ब्लेंडेड ईंधन कोई नया या बिना परीक्षण का प्रयोग नहीं है. यह विश्व के कई देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है.” इन्होंने आगे कहा, “भारत में भी E20 कार्यक्रम को व्यापक परीक्षण और वैज्ञानिक मंजूरी के बाद लागू किया गया है. यह स्वच्छ, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार ईंधन विकल्प है, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.” E20 को भारत के लिए एक सुरक्षित, परिक्षित और भविष्य के लिए तैयार ईंधन बताया जा रहा है.
20 % से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, आपको कितना होगा फायदा?
