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सौरव गांगुली जन्मदिन: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली 54 साल के हो गए हैं. क्रिकेट फैंस आज भी उनकी मैदान पर उन पारियों को याद करते हैं, जहां पर टीम इंडिया संकट में थी. उन्होंने अपनी शानदार बल्लेबाजी से जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया. सौरव गांगुली का आगाज इतना शानदार रहा था कि उन्होंने शुरुआती दो टेस्ट मैचों में शतकीय पारी खेली थी. इसके बाद जब उन्हें टीम इंडिया की कमान सौंपी गई थी तो देश को जीतने की भी आदत लग गई. इसके बाद भारतीय टीम ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को भी वनडे सीरीज में हराने हराने का काम किया. यही वजह थी की गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने नई ऊंचाइयों को छूआ और देश के बाहर भी सीरीज जीतने की शुरुआत कर दी. इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और हरभजन सिंह जैसे क्रिकेटर्स के करियर को भी संवारने में उनका अहम रोल रहा था. साथ ही भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी ने भी गांगुली की कप्तानी में ही डेब्यू किया था और जब माही की शुरुआत ज्यादा खास नहीं रही थी उसके भी दादा ने उन्हें कई मौके दिए थे.
दादागिरी के किस्से रहे सबसे ज्यादा चर्चित
सौरव गांगुली के मैदान पर दादागिरी वाले किस्से आज भी क्रिकेट फैंस के जेहन में है. वह पल कोई क्रिकेट फैंस नहीं भूल सकता है जब गांगुली ने अंग्रेजी ग्राउंड पर अपनी टीशर्ट लहराकर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को जवाब दिया था. मामला यह है कि 13 जुलाई, 2002 को इंग्लैंड के ऐतिहासिक ग्राउंड लॉर्ड्स मैदान पर मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह की जादुई पारी के दम पर भारत ने फाइनल मैच में हराकर नेटवेस्ट सीरीज पर कब्जा किया था और तब से इस दिन को ऐतिहासिक माना जाता है. इसके बाद ही सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकानी में अपनी टीशर्ट उताकर सेलेब्रेट किया था.

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फ्लिंटॉफ ने उसी साल 3 फरवरी, 2002 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ सीरीज में जीत दर्ज करने के बाद अपनी टीशर्ट निकालकर मैदान पर दौड़ लगाई थी. इसके बाद जब इंग्लैंड में भारत ने सीरीज जीती तो दादा ने फ्लिंटॉफ को जवाब देने के लिए अपनी टीशर्ट उतारकर हवा में लहराने का काम किया. साथ ही बदला लेने के लिए लॉर्ड्स के मैदान से कोई अच्छी जगह नहीं हो सकती थी. हालांकि, इस घटना के बाद गांगुली ने दुख व्यक्त किया था. लेकिन क्या करें क्रिकेट खेलते समय खिलाड़ियों में काफी उत्साह आ जाता है और वह जश्न में इतने डूब जाते हैं कि उन्हें कई बार पता तक नहीं चल पाता है. साल 2018 में सौरव गांगुली ने एक बार कहा था कि फाइनल मैच में जहीर खान के विनिंग के शॉट के बाद मैं काफी उत्साहित हो गया था और उस वक्त मैं अपने आपको रोक नहीं पाया था. हालांकि, गांगुली ने यह भी माना कि जीत के बाद अपनी टीशर्ट उतारकर हवा में लहराने ठीक नहीं था. जश्न मनाने और भी तरीके होते हैं.
ऑस्ट्रेलिया का भी थोड़ दिया था घमंड
बात साल 2001 की है. जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सौरव गांगुली ने स्टीव वॉ को दिन में तारे दिखाने का काम किया था. कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान ईडन गार्डन्स में खेले गए टेस्ट मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ टॉस के लिए समय से पहले आ गए, लेकिन गांगुली समय पर नहीं पहुंच पाए. बताया जाता है कि गांगुली का उस वक्त ब्लेजर कहीं खो गया था, जिसको खोजने में काफी समय लग गया था. इसके बाद गांगुली जब मैदान पर टॉस के लिए पहुंचे तो स्टीव वॉ गुस्सा हो गए. वहीं, भारतीय टीम ने फॉलोअन मिलने के बाद भी उस मुकाबले में जीत दर्ज की थी. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ रोक दिया था. उस मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया 16 मैचों से लगातार जीतता हुआ आ रहा था.

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कई युवा खिलाड़ियों को किया तैयार
इसके अलावा दादा के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अपनी कप्तानी में सबसे ज्यादा युवा खिलाड़ियों को मौका दिया था. उनकी कप्तानी में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों ने टी-20 विश्व कप 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. गांगुली के पिता माता-पिता महाराज कहते थे. वहीं, इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज जैफ्री बॉयकॉट उन्हें ‘प्रिस ऑफ कोलकाता’ से संबोधित किया था. अपने क्रिकेट करियर में शानदार रिकॉर्ड के दौरान उनके ये दो नाम काफी पॉपुलर हुए थे और भारतीय क्रिकेट फैंस भी इन्हीं दो नामों से उन्हें संबोधित करते थे. हालांकि, सहयोगी खिलाड़ी उन्हें प्यार से दादा कहते आ रहे हैं. वहीं, रिटायरमेंट होने के कई साल बाद उन्हें बीसीसीआई का भी अध्यक्ष बनाया गया और वहां पर कार्यकाल खत्म होने के बाद वह आईपीएल में भी काफी सक्रिय रहे. उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स की टीम में संचालन निदेशक पद पर भी रहे हैं. बता दें कि गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी 2002 में संयुक्त विजेता बनी थी और इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी को चैंपियन बनाने का काम किया था. इसके अलावा उनकी कप्तानी में भारतीय टीम साल 2004 में पाकिस्तान दौरे पर भी गई थी और वहां पर टेस्ट-वनडे सीरीज पर अपना कब्जा किया था. यह एक हैरान कर देने वाली जीत थी और इस जीत पर विश्वास भारतीय फैंस को भी नहीं हुआ था.

विश्व कप में बनाया सर्वोच्च स्कोर
वनडे विश्व कप में सबसे बड़ा स्कोर बनाने का रिकॉर्ड सौरव गांगुली के नाम पर है. विश्व कप 1999 में श्रीलंका के खिलाफ टांटन में 183 रनों की तूफानी पारी खेली थी. इसके बाद आज भी भारतीय खिलाड़ी के रूप में विश्व कप में 183 रनों की सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है. यह एक ऐसा रिकॉर्ड हैं जो बीते करीब दो दशकों से ज्यादा कायम है. इसके अलावा दादा ने चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे बड़ा स्कोर (117 रन) बनाने का रिकॉर्ड भी बना रखा है. साल 2000 में आईसीसी नॉकआउट फाइनल में उनकी 117 रनों की पारी इस टूर्नामेंट में अब तक की सबसे बड़ी पारी बनी हुई है. उन्होंने यह पारी न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली थी और यह आज भी कायम है.
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2003 में हुई असली परीक्षा
चार सालों से मेहनत कर रहे सौरव गांगुली की असली परीक्षा विश्व कप 2003 में देखने को मिली. भारतीय टीम इस मेगा टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ 7 मैचों की वनडे सीरीज में 5-2 से जीतकर पहुंची थी. टूर्नामेंट के दूसरे मैच में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय टीम को लेकर एक शानदार स्पीच दी थी. इस भाषण के बाद टीम इंडिया का हौसला चार गुना बढ़ गया था. फिर क्या था भारतीय टीम ने लगातार 8 मैचों को जीतने का काम किया. सुपर-6 में पहुंचने के बाद भारत ने न्यूजीलैंड को भी 7 विकेट से हरा दिया और इस जीत के साथ ही भारत के सितारे सातवें आसमान पर बुलंद हो गए थे. इसके बाद सेमीफाइनल में भारत ने केन्या को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.

वहीं, फाइनल में भारत की टक्कर ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई थी. भारतीय गेंदबाजों की शुरुआत थोड़ी सही रही थी. लेकिन इसके बाद रिकी पोंटिंग ने नाबाद 121 गेंदों में 140 और डेमियन मार्टिन 84 गेंदों में 88 रनों की शानदार पारी खेली थी. इसके बाद कंगारुओं ने 50 ओवर में 359 रन बोर्ड पर लगा दिए. वहीं, लक्ष्य का पीछे करने के लिए उतरी भारतीय टीम ने 59 रनों पर ही अपने तीन विकेट गंवा दिए. वहीं, वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ ने पारी को संभालने की कोशिश की. अंत में टीम इंडिया को 125 रनों से हार का सामना करना पड़ा. दूसरी तरफ सौरव गांगुली के लिए बहुत बड़ा झटका था. फाइनल में पहुंचने के बाद इतनी बुरी हार से भारतीय खेमा गम में डूब गया था.
ऐसा गांगुली का क्रिकेटर करियर
इस दौरान अपने करियर में गांगुली ने 49 टेस्ट और 147 मैचों में कप्तानी की थी. गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम विश्व कप 2003 के फाइनल में पहुंची थी और इस टूर्नामेंट में फाइनल से पहले तक अपनी मजूबती बनाए रखी थी. साथ ही 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम संयुक्त विजेता भी रही थी. बता दें कि गांगुली ऑस्ट्रेलिया में वनडे फॉर्मेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं. इसके अलावा उन्होंने न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में भी शतक जड़ने का काम किया था. वहीं, दुनिया के उन 6 क्रिकेटर्स में एक सौरव गांगुली भी हैं जिन्होंने वनडे में 10 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं.
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