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शादी से पहले बढ़ा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन का ट्रेंड

by Live India
Rising trend pre-wedding background verification

दिल्ली-एनसीआर : कभी शादी तय करने के लिए परिवार, रिश्तेदारों की राय, गोत्र और कुंडली मिलान को ही पर्याप्त माना जाता था. लेकिन बदलते दौर में शादी की प्रक्रिया भी बदल रही है. सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और ऑनलाइन रिश्तों के बढ़ते चलन के बीच अब लोग सिर्फ सामने वाले की बातों पर भरोसा करने के बजाय उसकी पूरी पृष्ठभूमि की जांच करा रहे हैं. सिया-केतन और सोनम-राजा रघुवंशी जैसे चर्चित मामलों के बाद यह ट्रेंड और तेज हो गया है.

दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में प्री-मैरिटल बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की मांग लगातार बढ़ रही है. डिटेक्टिव एजेंसियों के मुताबिक पहले जहां हर महीने 10 से 15 मामले आते थे, अब यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. एजेंसियां 40 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज होने का दावा कर रही हैं.

अरेंज मैरिज तक सीमित नहीं रह गई जांच

यह जांच अब सिर्फ अरेंज मैरिज तक सीमित नहीं रह गई है. अरेंज मैरिज, लव मैरिज, री-मैरिज और एनआरआई मैरिज. चारों तरह के रिश्तों में लोग शादी से पहले पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं. डिटेक्टिव एजेंसियों के अनुसार करीब 70 प्रतिशत मामलों में कैरेक्टर, सोशल स्टेटस और फैमिली बैकग्राउंड की जांच कराई जाती है. वहीं, बाकी मामलों में आपराधिक रिकॉर्ड, आर्थिक स्थिति, कर्ज, कानूनी विवाद और अन्य जानकारियों की पड़ताल कराई जाती है.

रिश्तों ने लोगों की चिंता बढ़ाई

विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) का बढ़ता चलन और सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले रिश्तों ने लोगों की चिंता बढ़ाई है. आज किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान और वास्तविक जीवन में काफी अंतर हो सकता है. ऐसे में माता-पिता और युवा सिर्फ भरोसे के बजाय तथ्यों के आधार पर फैसला लेना चाहते हैं.

परिवारों को अधिक सतर्क बना दिया

हाल ही के वर्षों में सामने आए कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों ने भी इस सोच को मजबूत किया है. शादी के बाद वित्तीय धोखाधड़ी, छिपाए गए आपराधिक रिकॉर्ड और हिंसा के मामलों ने परिवारों को अधिक सतर्क बना दिया है. यही वजह है कि अब शादी से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन को सुरक्षा के एक अतिरिक्त कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

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निजता की सीमाओं के भीतर होना चाहिए

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी तरह का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कानून और निजता की सीमाओं के भीतर होना चाहिए. किसी का फोन हैक करना, निजी अकाउंट तक अवैध पहुंच बनाना या गैरकानूनी तरीके से जानकारी जुटाना अपराध की श्रेणी में आता है. उनका कहना है कि जांच केवल वैध और सार्वजनिक स्रोतों या कानूनी माध्यमों से ही कराई जानी चाहिए.

शादी जीवनभर का फैसला

लोगों की राय भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है. कई लोगों का कहना है कि अगर शादी जीवनभर का फैसला है तो पूरी जानकारी लेना गलत नहीं है. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि रिश्ते विश्वास पर टिके होते हैं, लेकिन विश्वास करने से पहले सच्चाई जान लेना भी आज के समय की जरूरत बन चुका है.

एक समय था जब शादी से पहले सिर्फ कुंडली मिलाई जाती थी. अब कुंडली के साथ कैरेक्टर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि भी जांची जा रही है. बदलते सामाजिक माहौल में प्री-मैरिटल बैकग्राउंड वेरिफिकेशन धीरे-धीरे अपवाद नहीं, बल्कि एक नया सामाजिक ट्रेंड बनता जा रहा है.

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  • दिल्ली से खुशबू सिंह की रिपोर्ट

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