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यूएस ईरान समाचार: कुछ समय पहले ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में शांति को कायम करने के लिए अंतरिम समझौता हुआ था और उसपर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में साइन भी किए थे. लेकिन, यह अंतरिम समझौता ठंडे बस्ते में पड़ गया है और एक बार फिर से पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हो गया है.
जी हां, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मालवाहक जहाजों पर ईरानी हमले की जवाबी कार्रवाई में एक बार फिर से अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी है. यूएस आर्मी ने लगातार सातवीं रात ईरान पर हमले जारी रखे हैं. वहीं, अमेरिकी हमले का पलटवार करते हुए ईरान खाड़ी के कई देशों को अपना निशाना बना रहा है, जहां पर अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर और सैन्य ठिकानों पर हमला
मिली जानकारी के अनुसार, होर्मुज पर चल रही लड़ाई के तेज होने के साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को मध्य पूर्व में अपने हमलों को तेज कर दिए. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए गए. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने हमलों का विस्तार करते हुए और अधिक पुलों और एनर्जी साइटों को निशाना बनाया और एक महत्वपूर्ण ईरानी बंदरगाह पर एक टावर को ध्वस्त कर दिया.
यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों के बाद की गई, जिसमें उन्होंने तेहरान पर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी पकड़ ढीली करने के लिए दबाव डालने की बात कही थी.
अमेरिकी सेना ने इन ठिकानों पर किया अटैक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बताया, “अमेरिकी सेना ने 17 जुलाई को रात 9:30 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार सातवीं रात हमले किए.” इसमें आगे कहा गया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने निगरानी ठिकानों, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन के नीचे बने हथियारों के गोदामों और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया. अमेरिकी सेना ने अन्य साधनों के अलावा फाइटर जेट, एरियल ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल किया.
सेंट्रल कमांड ने बताया, “CENTCOM कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर ईरान को जवाबदेह ठहराना जारी रखे हुए है और साथ ही ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी को पूरी तरह से लागू कर रहा है.” अमेरिकी सेना ने कहा कि 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व में तैनात हैं और वे सतर्क, घातक और तैयार हैं.
ईरान ने किया जवाबी हमला
अमेरिकी हमले के जवाब में, ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइलें दागीं. इनमें युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला कतर और कुवैत शामिल हैं, जहां इस रेगिस्तानी देश के एक जल विलवणीकरण संयंत्र (water desalination plants) को नुकसान पहुंचा.
इस क्षेत्र में कई दिनों से लगातार हमले हो रहे हैं और संघर्ष का केंद्र बिंदु जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है. अंतरिम सीजफायर के टूटने से चार महीने से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा है. अमेरिकी केंद्रीय कमान ने शुक्रवार देर रात कहा कि उसने ईरान की सेना को कमजोर करने के उद्देश्य से लगातार सातवीं रात हमले किए हैं. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
