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Land-for-Jobs Scam : लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार की मुसीबत बढ़ गई है. दिल्ली की राउज एवेन्य कोर्ट ने आरोप तय करने का आदेश दिया है और अब इनके खिलाफ आगे सुनवाई चलेगी.
9 जनवरी 2026
नौकरियों के बदले ज़मीन घोटाला: जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद और उनके परिवार समेत अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि आपराधिक कार्यों को अंजाम दिया जा सके. उन्होंने आगे कहा कि रेलवे अधिकारियों और उनके करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से यादव परिवार द्वारा जमीन के टुकड़े हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया.
103 आरोपियों में से 3 की मौत हो गई
कोर्ट ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए और 52 लोगों को बरी कर दिया, जिनमें रेलवे अधिकारी भी शामिल थे. इससे पहले CBI ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में वेरिफिकेशन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसकी चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से करीब 5 की मौत हो गई है. कोर्ट ने आरोप तय करने की तारीख 23 जनवरी रखी है. साथ ही CBI ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. इसमें आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप-डी कैटेगरी में नियुक्तियां 2004 से 2009 तक लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान की गईं.
लेन-देन में बेनामी संपत्तियां
बताया जा रहा है कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के बराबर हैं. आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक मकसद से प्रेरित है. इसके अलावा अदालत ने कहा कि इस मामले में सरकारी संवैधानिक और विवेक का दुरुपयोग हुआ है. फिलहाल कोर्ट ने 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं. साथ ही कोर्ट ने इस मामले में 52 आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया है, चार्जशीट के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, जिसके कारण इन लोगों को बरी कर दिया गया है.
अदालत के इस फैसले जहां एक तरफ 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है तो वहीं लालू परिवार के लिए कानूनी लड़ाई काफी लंबी खिंचने वाली है. हालांकि, मुख्य अभियुक्तों समेत 41 लोगों को पर ट्रायल चलेगा . अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में आरोप तय करने के बाद ये मामला नए मोड़ पर आ गया है और लालू परिवार के खिलाफ मुसीबत बढ़ने वाली है.
