Home Top News कच्चे तेल ने दी राहत, लेकिन Dollar की अकड़ बरकरार

कच्चे तेल ने दी राहत, लेकिन Dollar की अकड़ बरकरार

by Live India
कच्चे तेल ने दी राहत, लेकिन Dollar की अकड़ बरकरार

7

Rupee vs Dollar: डॉलर की दादागिरी के साथ एक बार फिर रुपया सुस्त पड़ता दिखा. आप भी जानें इसके पीछे की वजह और इससे आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर.

16 जनवरी, 2026

रुपया बनाम डॉलर: इंडियन करेंसी यानी हमारे रुपये के लिए साल 2026 की शुरुआत थोड़ी उतार-चढ़ाव भरी रही है. शुक्रवार की सुबह जब बाजार खुला, तो रुपये की सेहत में थोड़ी गिरावट देखी गई. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे टूटकर 90.44 के लेवल पर जा पहुंचा. ये लगातार तीसरा मौका है जब रुपये की चाल कमजोर पड़ी है. आखिर ग्लोबल मार्केट में चल क्या रहा है और डॉलर इतना भाव क्यों खा रहा है, ये हर कोई जानना चाहता है.

फीकी पड़ी रुपये की चमक?

फॉरेन एक्सचेंज मार्केट के जानकारों का कहना है कि रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ फॉरेन इन्वेस्टर्स की लगातार बिकवाली है. फॉरेन इन्वेस्टर्स भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर सेफ जगह पर लगाने का मन बना रहे हैं. शुक्रवार सुबह इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 90.37 पर खुला था, लेकिन कुछ ही देर में ये फिसलकर 90.44 के लेवल पर आ गया. इससे पहले बुधवार को भी रुपया 11 पैसे गिरकर 90.34 पर बंद हुआ था. आपको बता दें कि गुरुवार को मुंबई में BMC इलेक्शन की छुट्टी होने की वजह से बाजार बंद रहा था. हालांकि, आज खुलते ही बाज़ार पर दबाव साफ नजर आया.

यह भी पढ़ेंःSpam calls पर TRAI का बड़ा एक्शन: टेलीकॉम कंपनियों पर लगाया 150 करोड़ रुपये का जुर्माना

ट्रेड डेफिसिट का तड़का

रुपये की इस गिरावट के पीछे 7 समंदर पार वाले अमेरिका का भी हाथ है. दिसंबर के जो अमेरिकी महंगाई के आंकड़े आए हैं, उन्होंने इन्वेस्टर्स की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. सबको लग रहा था कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करेगा, लेकिन अब इसकी उम्मीद कम ही दिख रही है. इसकी वजह से भी डॉलर इंडेक्स मजबूत बना हुआ है. वहीं दूसरी तरफ, भारत की ट्रेड डेफिसिट ने भी थोड़ी टेंशन बढ़ा दी है. दिसंबर 2025 में भारत का ट्रेड डेफिसिट यानी घाटा बढ़कर 25.04 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में 22 बिलियन डॉलर था. ऐसे में जब हम बाहर से सामान ज्यादा खरीदते हैं और बेचते कम हैं, तो हमारी करेंसी पर दबाव बढ़ता है.

कच्चे तेल ने दी राहत

हालांकि, पूरा हाल खराब नहीं है. कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्होंने रुपये को बहुत ज्यादा गिरने से बचा लिया. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 0.34 फीसदी की गिरावट आई है. ये 63.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. तेल का सस्ता होना भारत जैसे बड़े इम्पोर्टर्स के लिए हमेशा अच्छी खबर होती है. इसके साथ ही, इंडियन शेयर मार्केट में भी हरियाली देखने को मिली. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. शेयर बाजार की इस मजबूती ने रुपये को सहारा दिया है, वरना गिरावट और भी ज्यादा हो सकती थी. फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में फॉरेन इन्वेस्टर्स क्या फैसला लेंगे. अगर वो भारत में इन्वेस्ट करने के लिए वापस आते हैं, तो रुपया फिर से अपनी खोई हुई ताकत हासिल कर सकता है.

यह भी पढ़ेंः करदाताओं को बड़ी राहत: 1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून, अब TDS रिफंड हुआ और भी आसान

Related Articles