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Stock Market का ब्लैक थर्सडे, इन्वेस्टर्स के करोड़ों स्वाहा

by Live India
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Stock Market: आज सुबह शेयर मार्केट के इन्वेस्टर्स अपना पोर्टफोलियो देखकर काफी ज्यादा निराश हुए. आप भी जानें बाज़ार में इस गिरावट के पीछे की असली वजह.

02 अप्रैल, 2026

आज भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत किसी डरावने सपने जैसी रही. अगर आप सुबह अपनी चाय की चुस्की के साथ पोर्टफोलियो चेक कर रहे थे, तो लाल रंग देखकर आपका चौंकना लाजिमी है. दरअसल, ग्लोबल मार्केट से मिले खराब हिंट्स और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने दलाल स्ट्रीट का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है. जहां सेंसेक्स 1,350 अंक तक टूट गया, वहीं निफ्टी भी 22,250 के करीब स्ट्रगल करता नजर आया. आसान शब्दों में कहें तो बाजार के हर सेक्टर में आज सेल लगी है, लेकिन ये वो सेल नहीं जिसका इन्वेस्टर्स मज़ा ले सकें.

गिरावट की असली वजह

शेयर मार्केट में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल पॉलिटिक्स है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इन्वेस्टर्स को बुरी तरह से डरा दिया है. कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत उछलकर 105 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. वैसे भी, जब तेल महंगा होता है, तो भारत जैसी इकोनॉमी के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं क्योंकि हमारा इम्पोर्ट बिल बढ़ जाता है. साथ ही, फॉरेन इन्वेस्टर्स यानी FIIs ने भी जमकर बिकवाली की है. अकेले 1 अप्रैल को उन्होंने 8,331 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे मार्केट पर भारी दबाव बना हुआ है.

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किसका हाल बुरा

आज शेयर मार्केट में हर तरफ लाल निशान दिखा. सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), श्रीराम फाइनेंस और एशियन पेंट्स जैसे बड़ी कंपनियों के शेयर 2 से 3 प्रतिशत तक नीचे गिर गए. ऑटो, फार्मा, सरकारी बैंक और मेटल सेक्टर में भी भारी गिरावट देखी गई. रीयल एस्टेट सेक्टर की हालत तो और भी खराब रही, जहां शोभा और गोदरेज प्रॉपर्टीज जैसे नाम 3.5 प्रतिशत तक टूट गए. लेकिन इस उदासी के बीच भी ऐसी खबरें आईं जो कुछ लोगों के लिए मुस्कुराने की वजह बनीं. टीवीएस मोटर कंपनी ने मार्च के महीने में अपनी सेल्स में 25 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की है. वहीं, सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रहा, जिसमें 44 प्रतिशत का उछाल देखा गया.

अब आगे क्या?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा. निफ्टी के लिए 22,000 से 22,200 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट की तरह काम कर सकता है. फिलहाल इन्वेस्टर्स को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनानी चाहिए. अगर आप लॉन्ग टर्म वाले इन्वेस्टर्स हैं, तो ऐसी गिरावट अच्छे क्वालिटी शेयर्स को धीरे-धीरे एड करने मौका भी हो सकती है. बस याद रखें, बाजार में डरना मना है, संभलकर चलना जरूरी है. लेकिन किसी भी तरह की इन्वेस्टमेंट से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह लेनी भी जरूरी है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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