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एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत

by Live India
Malviya Nagar Fire Incident

Malviya Nagar Fire Incident: बुधवार को दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में भीषण आग ने कुल 21 लोगों की जिंदगी छीन ली है. वहीं, कई घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस घटना की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिसमें देखा गया कि होटल की आग से बचने के लिए कुछ लोग उस बिल्डिंग से नीचे भी कूद रहे थे. इस दौरान कई लोगों को चोटें भी लगीं, लेकिन राहत की बात यह रही कि उनकी जिंदगी आग से बच गई.

मालवीय नगर अग्निकांड ने कुल 21 लोगों की जान ली है, इनमें 12 विदेशी और बाकी के भारतीय नागरिक थे. इस बीच दिल को झकझोर देने वाली एक जानकारी सामने आई है. जी हां, इस हादसे में जिन 09 भारतीय लोगों की मौत हुई है, उनमें से आठ लोग एक ही परिवार के थे. यह परिवार एक निजी कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रहे विवेक अग्रवाल का था. विवेक की भी इस घटना में दर्दनाक मौत हो गई और उनके आखिरी शब्द- ‘भाई, शायद हम बच न पाएं…’यह उनके रिश्तेदार पुनीत गुप्ता के कानों में अभी भी गूंज रहे हैं.

विवेक के साथ मां, पत्नी, दो बेटियों समेत कुल 8 की मौत

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक होटल में लगी भीषण आग में लगभग पूरा परिवार मारे जाने के बाद बुधवार को गुरुग्राम स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा रहा. सेक्टर 46 में खाली पड़े घर के बाहर सदमे में डूबे पड़ोसी जमा हो गए, वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि विवेक (48), उनकी पत्नी तरजिनी (47), मां प्रेम लता और बेटियां जीविसा और वारिया सहित परिवार के कुल आठ सदस्यों की बुधवार सुबह आग में दर्दनाक मौत हो गई.

विवेक के एक पड़ोसी योगेंद्र सिंह ने बताया, “विवेक एक निजी कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उनकी पत्नी एक गैर सरकारी संगठन चलाती थीं. हमें बताया गया है कि पोस्टमार्टम के बाद शव आएंगे. हम सब सदमे में हैं.”

“भाई, शायद हम बच न पाएं”- विवेक के आखिरी शब्द

सीए विवेक अग्रवाल के रिश्तेदार पुनीत गुप्ता ने बताया कि उन्हें आग के बीच विवेक ने फोन किया और कहा, “भाई, शायद हम बच न पाएं.” उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि वे एक रुमाल गीला करके अपना चेहरा ढक लें, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ. अब वे मर चुके हैं.” उन्होंने आगे कहा, “जब तक हम वहां पहुंचे, तब तक वे सब मर चुके थे.”

परिजनों ने बताया कि विवेक के मामा अशोक और मामा कमला गोयल, जो राजस्थान के किशनगढ़ के रहने वाले थे, और एक अन्य रिश्तेदार झुमरी लाल गोयल भी मरने वालों में शामिल हैं. वहीं, दिल्ली के महावीर एन्क्लेव में रहने वाले विवेक के ससुर प्रेम बंसल ने बताया कि घटना के समय विवेक की मां, पत्नी, दो बेटियां, मामा, मामी और एक अन्य मामा मौजूद थे. उन्होंने कहा कि वे गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी मौत हो गई.

अस्पताल में भर्ती बीमार पिता ही अब जीवित

परिजनों के अनुसार, विवेक ने मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में दो कमरे बुक किए थे, जहां आग लगी थी, क्योंकि उनके पिता राधे श्याम अग्रवाल पिछले कई दिनों से पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे थे. एक रिश्तेदार ने बताया कि विवेक की बेटी जीविसा, जो मरने वालों में सबसे छोटी थी, अपने दादा से मिलने अस्पताल जाने के लिए एक दिन पहले बेंगलुरु से लौटी थी. परिवार के आठ सदस्यों की मौत के बाद, अब परिवार में एकमात्र जीवित सदस्य विवेक के बीमार पिता राधे श्याम हैं.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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