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नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखित पुस्तक ‘अपनापन’ नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव का नई दिल्ली में भव्य लोकार्पण किया गया. यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी भावभूमि बन गया जहां स्मृतियां जीवंत हो उठीं. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का वह आत्मीय पक्ष उभरकर सामने आया, जो उन्हें एक जननेता से आगे बढ़ाकर जनमन का विश्वास बनाता है.
इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, लेखक व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार मंच पर उपस्थित रहे. इस गरिमामयी कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, सामाजिक कार्यकर्ता, लखपति दीदियां और प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में शामिल हुए.
‘मोदी’ यानी मेकिंग ऑफ डेवलप्ड इंडिया
पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि ‘अपनापन’ केवल एक पुस्तक का शीर्षक नहीं, बल्कि विश्वास और राष्ट्रीय दायित्व का भाव है. उन्होंने पीएम मोदी की संवाद शैली की सराहना करते हुए कहा कि मन की बात जैसे माध्यमों से उन्होंने सीधे जनता के दिलों में जगह बनाई है. वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं पहले भी कहता था कि मोदी का अर्थ है, मेकिंग ऑफ डेवलप्ड इंडिया. आज भारत जिस आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है, उसमें यह प्रत्यक्ष दिखाई देता है.
वैश्विक मंच पर बढ़ाई भारत की साख
उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया के बड़े नेता भी पारंपरिक पश्चिमी शैली को छोडक़र सहजता से नमस्ते कहकर भारतीय संस्कृति को स्वीकार कर रहे हैं. पद्म पुरस्कारों में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने रिकॉग्नाइज द अनरिकॉग्नाइज्ड ‘अनाम नायकों की पहचान’ की सोच से साधारण जमीन से जुड़े लोगों और किसानों को यह राष्ट्रीय सम्मान देकर सामाजिक गौरव बढ़ाया है.
शिवराज जी राजनीति के सच्चे ‘मामा’
शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में लगातार 17 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहकर जनता का अटूट विश्वास जीतना और फिर केंद्र में कृषि मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है. उन्होंने एक पुराना प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब शीर्ष नेतृत्व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रहा था, तब उन्होंने ही शिवराज जी का नाम सुझाया था, जिस पर अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी ने सहमति जताई. शिवराज जी ने अपनी सादगी, विनम्रता और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जनता के बीच गहरा भरोसा कमाया. यही कारण है कि जनता उन्हें आदर और आत्मीयता से मामा कहती है, जो कि उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है.
पुस्तक जनसेवा और किसान-संवेदना की गंभीर अभिव्यक्ति
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा गांवों में खेतों और साधारण जन के संघर्षों से बनती है. यह पुस्तक केवल संस्मरणों का संग्रह नहीं है, बल्कि पीएम मोदी के जनसेवा, ग्रामीण भारत और किसान-संवेदना की एक गंभीर अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि शक्ति के साथ करुणा और संवेदना का मेल ही सच्चे जनविश्वास की नींव रखता है और यह पुस्तक इसी स्वरूप का विस्तार है.
35 वर्षों में PM मोदी को हर क्षण देश के लिए जीते देखा
भावुक मन से अपने अनुभवों को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा मैंने पिछले 35 वर्षों की सहयात्रा में नरेंद्र मोदी को हर क्षण केवल और केवल देश के लिए जीते देखा है. सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठकर भी वे आम आदमी के जीवन की धडक़नों से जुड़े हैं. शिवराज सिंह ने कहा कि मोदी जी की विश्वसनीयता केवल उनकी बड़ी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उनकी नीयत की पारदर्शिता, आचरण की सादगी और कर्म की निरंतरता से बनी है. उनका अपनापन केवल कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक फैला है. यही वजह है कि आज पूरा देश गर्व से कहता है, श्मोदी का परिवार.
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पर्यावरण के लिए खड़े रहे पीएम
शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री काल का एक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि जब प्रधानमंत्री जी रीवा के एक कार्यक्रम में आने वाले थे, तब उन्होंने फोन पर एक सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि एक बेटी को धरती मां के रूप में तैयार करो जो मंच से नाटक के जरिए लोगों से कहे, मुझे मत मारो, मैं तुम्हारी मां हूं. मुझ पर इतना केमिकल फर्टिलाइजर और कीटनाशक मत डालो, आने वाली पीढिय़ों का ध्यान रखो. रीवा के कार्यक्रम में जब ‘धरती कहे पुकार के’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई तो प्रधानमंत्री पूरे समय सम्मान और गंभीरता में खड़े रहे, ताकि जनता भी मिट्टी और पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को पूरी गंभीरता से समझे. यह उनकी दूरदर्शी सोच का जीवंत उदाहरण है.
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत है यह कृति
समारोह के अंत में प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने कहा कि अपनापन राजनीति और सार्वजनिक जीवन में मानवीय संबंधों की उस समृद्ध परंपरा को सामने लाती है जो समाज को भीतर से जोड़ती है. वक्ताओं ने युवाओं और राजनीति में आने वाले नए चेहरों को सलाह दी कि वे इस पुस्तक को जरूर पढ़ें, क्योंकि इसमें संगठन, सेवा, शुचिता और राष्ट्र-निर्माण के कई अनमोल सूत्र छिपे हैं.
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