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West Bengal Result : बंगाल चुनाव के नतीजों का सबसे ज्यादा झटका ममता बनर्जी को लगा है. बीजेपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है. इसी बीच CPM का भी 5 साल का सूखा खत्म हो गया.
पश्चिम बंगाल परिणाम: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम आ गया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) 206 सीट जीतकर सबसे पार्टी बन गई है और वह पहली बार सरकार बनाने जा रही है. साथ ही 15 साल से सत्ता पर काबिज टीएमसी विपक्ष में बैठने जा रही है और पार्टी को इस बार मात्र 80 सीटों पर ही जीत मिली है. इसी बीच एक हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है. इस चुनाव में 2016 के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्किस्ट) के उम्मीदवार मुस्तफिजुर रहमान ने डोमकल विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और वह एकमात्र ऐसे उम्मीदवार है जिन्होंने CPM के 5 साल के सूखे को खत्म कर दिया है.
निकट प्रतिद्वंद्वी उम्मीद को 16296 वोटों से हराया
साल 2021 के चुनाव में CPI(M) पश्चिम बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी और 34 साल के शासन के बाद ऐसा पहली बार हो रहा था जब CPM का कोई उम्मीदवार विधानसभा . हालांकि, इस बार भी पार्टी ने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया है. इसके बाद भी पार्टी ने कम से कम बंगाल में खाता तो खोल लिया. मुस्तफिजुर रहमान ने अपने निकट प्रतिद्वंद्वी TMC के उम्मीदवार हुमायूं कबीर को 16296 वोटों के अंतरों से हरा दिया. इस चुनाव में मुस्तफिजुर को 107882 वोट मिले हैं और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है. अब पार्टी का 5 साल का सूखा खत्म हो गया और विधानसभा में CPM की तरफ से कोई आवाज उठाने वाला उम्मीदवार भी खड़ा होगा.
2021 में मिली शून्य सीट
विधानसभा चुनाव 2021 में CPM को एक भी सीट नहीं मिली थी. इसके बाद पार्टी को TMC और BJP की तरफ से आलोचना का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस बार उसने शून्य का टैग खत्म कर दिया है और इस बार उसके एक उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. एक समय था जब पूर्व मंत्री अनीसुर रहमान इस सीट से जीतते थे और 2011 में भी उन्होंने डोमकल से जीत हासिल की थी. वहीं, 10 साल बाद एक बार फिर डोमकल विधानसभा लाल हो गई है.
कौन हैं मुस्तफ़िज़ुर रहमान?
45 वर्षीय मुस्तिफिजुर रहमान पोस्टग्रेजुएट हैं और उन्होंने अपना पेशा एक समाज सेवक के रूप में चुना है. उन्होंने साल 2026 के पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में डोमकल से CPI (M) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. उनके हलफनामे में उनकी कुल संपत्ति 3.5 करोड़ रुपये है और उनकी देनदारियां शून्य रुपये है. इसके अलावा हलफनामे में दो लंबित आपराधिक मामलों का भी खुलासा किया.
इन लोगों को बनाया लक्ष्य
साथ ही रहमान छात्र संगठन की गतिविधियों के माध्यम से राजनीति में सक्रिय हैं. वह अपने इलाके में काफी पॉपुलर हैं और अतिथि श्रमिकों के कल्याण के लिए हस्तक्षेप करते हैं. रहमान के हस्तक्षेप के बाद चुनावों से पहले 400 से अधिक श्रमिक परिवार तृणमूल छोड़कर सीपीएम में शामिल हो गए. इस निर्वाचन क्षेत्र में प्रवासी मजदूर एक अहम ताकत हैं. इनमें से आधे से ज्यादा केरल के रहने वाले हैं और चार महीने पहले मुस्तिफिजुर ने पेरुम्बावूर में इन्हीं लोगों को लक्ष्य बनाकर चुनाव प्रचार किया था. साथ ही सीपीएम केरल से आए इन लोगों में से ज्यादातर को वोट डलवाने में कामयाब रही.
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